ओंकारेश्वर में बड़ा हादसा टला: होमगार्ड और नाविकों ने डूबते दो श्रद्धालुओं को बचाया, समय रहते किया रेस्क्यू
ओंकारेश्वर के ब्रह्मपुरी घाट पर स्नान के दौरान गहरे पानी में डूब रहे दो श्रद्धालुओं को नाविकों और होमगार्ड जवानों ने तत्परता से रेस्क्यू कर बचाया। घटना ने साहस दिखाया, साथ ही नाविकों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग उठी।
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मां नर्मदा की पावन धारा के तट पर एक बार फिर मानवीय साहस, सतर्कता और सेवा भावना का अद्भुत उदाहरण देखने को मिला। राजस्थान के जयपुर से दर्शन और स्नान के लिए आए दो श्रद्धालु गहरे पानी में डूबने लगे, लेकिन घाट पर तैनात नाविकों और होमगार्ड के जवानों की तत्परता ने एक संभावित हादसे को टाल दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जयपुर निवासी सूर्यनारायण (40 वर्ष) एवं राजू (32 वर्ष) ब्रह्मपुरी घाट पर स्नान करने पहुंचे थे। स्नान के दौरान अनजाने में वे गहरे पानी की ओर बढ़ गए और देखते ही देखते डूबने लगे। घाट पर मौजूद लोगों के शोर मचाने पर तत्काल कार्रवाई करते हुए नर्मदा नदी में नाव संचालन कर रहे नाविकों के सहयोग से होमगार्ड के जवान सेवक परिहार एवं हरिराम सोलंकी ने बिना देर किए रेस्क्यू अभियान शुरू किया।
नाव के माध्यम से जोखिम भरे हालात में नदी के बीच पहुंचकर जवानों ने दोनों श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाला। समय रहते किए गए इस साहसिक प्रयास ने न केवल दो जिंदगियां बचाईं, बल्कि घाट पर मौजूद श्रद्धालुओं में सुरक्षा के प्रति विश्वास भी मजबूत किया।
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बचाए गए दोनों युवकों ने भावुक होकर होमगार्ड जवानों और नाविकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यदि कुछ मिनट और देरी होती, तो स्थिति भयावह हो सकती थी। होमगार्ड के जिला कमांडेंट आशीष कुशवाहा ने बताया कि अमावस्या जैसे विशेष पर्वों पर ओंकारेश्वर में हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए नर्मदा नदी के प्रमुख घाटों पर एसडीईआरएफ और होमगार्ड के प्रशिक्षित जवानों की तैनाती की गई है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
इस घटनाक्रम के बीच ओंकारेश्वर नागरिक संघ के अध्यक्ष कैलाश भंवरिया ने एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि घाटों पर नाव संचालन करने वाले नाविक कई बार अपनी जान जोखिम में डालकर डूबते हुए लोगों को बचाते हैं, लेकिन उनके पास पर्याप्त सुरक्षा संसाधन नहीं होते। कई बार बिना लाइफ जैकेट और आधुनिक उपकरणों के ही वे तेज धाराओं में कूद पड़ते हैं।
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इन जांबाज नाविकों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण, प्रशिक्षण और प्रोत्साहन दिया जाए, ताकि जो लोग हर दिन दूसरों की जान बचाते हैं, उनका जीवन भी सुरक्षित रह सके। ओंकारेश्वर में घटित यह घटना न केवल एक सफल रेस्क्यू ऑपरेशन है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि सतर्कता, त्वरित निर्णय और सेवा भावना से बड़ी से बड़ी दुर्घटना को भी टाला जा सकता है। साथ ही यह प्रशासन और समाज दोनों के लिए एक संकेत है कि जिन हाथों से दूसरों की जान बचती है, उन्हें भी मजबूत और सुरक्षित बनाना समय की मांग है।
