उज्जैन के महाकाल मंदिर में प्रवेश के लिए जारी वीआईपी पास निरस्त
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उज्जैन के महाकाल मंदिर को लेकर वहां के कलेक्टर ने एक बड़ा फैसला लिया है। महाकाल मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष व कलेक्टर मनीष सिंह ने मंदिर में बगैर पास घुसने वालों पर रोक लगाई है। चूंकि महाकाल मंदिर में प्रवेश के लिए सरकारी विभागों को जारी किए गए सत्कार/प्रोटोकाल पास निरस्त करने का बड़ा कदम मंदिर प्रबंध समिति ने उठाया है। कलेक्टर मनीष सिंह ने 188 पास निरस्त करने का आदेश जारी किया है। चौंकाने वाला पहलू यह सामने आया है कि चुनिंदा निजी लोगों को भी ये पास जारी कर दिए गए, जिनमें राजनीति से जुड़े लोग भी शामिल हैं। आदेश में कलेक्टर ने यह स्पष्ट किया है कि इस तरह के वीआईपी पास जारी करने का कोई औचित्य नहीं है।
ये वय्वस्था महाकाल मंदिर में सुधार के लिए किया गया है। आदेश के साथ वह सूची भी जारी की गई है, जिन लोगों के नाम ये जारी किए गए थे। केंद्र व राज्य शासन के अधिकारियों को ये पास जारी किए गए थे। कलेक्टर ने इस संबंध में एक फरमान जारी करते हुए ये आदेश 6 प्रतियों में पुलिस चौकी प्रभारी को तामिल किए जाएं, जिससे कि सूची प्रवेश के सभी दरवाजों पर मौजूद पुलिसकर्मियों को दी जा सके। निजी सुरक्षा कंपनी के प्रभारी को भी इतनी ही प्रतियों में इसे उपलब्ध कराया जाए। थाना प्रभारी महाकाल को भी सूची सहित देने को कहा है।
आदेश में साफ किया है कि सभी विभागों के शासकीय प्रतिनिधियों, निजी व्यक्तियों से अपेक्षा की जाती है कि वे अगर भस्मार्ती के लिए प्रवेश चाहते हैं तो विधिवत मंदिर प्रशासन की सत्कार शाखा में एक दिन पहले दोपहर 1 बजे तक लिखित आवेदन प्रस्तुत करें व विशेष दर्शन की सुविधा चाहते हैं तो श्रद्घालुओं का विवरण पदनाम व महत्व अंकित करते हुए सत्कार शाखा में आवेदन देकर 250 रुपए प्रति व्यक्ति के मान से रसीद कटवाकर भगवान महाकाल के दर्शन सभी श्रद्घालुओं को करा सकते हैं।
कलेक्टर ने आदेश में खासतौर से यह भी कहा है कि जिन लोगों के नाम से जारी पास निरस्त किए गए हैं, अगर वे पुलिसकर्मी या निजी सुरक्षाकर्मी के साथ विवाद या अप्रिय स्थिति निर्मित करते हैं तो शासकीय कार्य में बाधा मानकर पुलिस थाने में उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाए।
इसलिए उठाया कड़ा कदम
महाकाल मंदिर की व्यवस्थाओं को सुधारने के प्रति कलेक्टर सिंह निरंतर प्रयास कर रहे हैं। इसी क्रम में उनके संज्ञान में यह बात सामने आई कि पास की अवधि खत्म होने के बाद भी लोग मंदिर में प्रवेश करने के लिए विवाद कर रहे थे। इससे मंदिर में अप्रिय स्थितियां बन रही थीं।
किसी को 4 किसी को 5 पास कर दिए थे जारी
मंदिर में प्रवेश के लिए कुछ विभागों को 4 तो किसी को 5 पास तक जारी कर दिए थे। राजस्व विभाग के पांच पटवारी, मप्र राज्य पर्यटन विकास निगम को चार, कृषि उपज मंडी समिति व केंद्रीय उत्पादन व सीमा शुल्क के तीन-तीन प्रतिनिधियों को पास जारी किए गए थे। एसबीआई को सबसे ज्यादा पास जारी किए गए थे। जेथल ब्रांच के चार प्रतिनिधियों सहित बुधवारिया शाखा व रिजनल ऑफिस के प्रतिनिधि को भी एक-एक पास दिए गए थे।
