मध्य प्रदेश: एंटी इंकंबेंसी से बचने के लिए भाजपा 85 सीटों पर नये पेशेवर चेहरों को दे सकती है टिकट
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में जीत का परचम फहराने के लिए भाजपा हर एंगल से सोच कर रणनीति बनाने में जुटी है। पहले दौर के सर्वे के बाद पार्टी को मौजूदा विधायकों के कामकाज का फीडबैक मिल चुका है। पार्टी कार्यकर्ताओं और आम जनता की राय के मुताबिक 85 सीटों के भाजपा विधायक ऐसे हैं जिन्हे वो दोबारा सत्ता में लाना नहीं पसंद करेंगे। मौजूदा भाजपा विधायकों के प्रति सामने आई नाराजगी का नतीजा है कि पार्टी प्रदेश स्तर पर मंथन में जुट गई है कि इस स्थिति से कैसे निपटा जाये?
एंटी इंकंबेंसी का प्रभाव पार्टी को चुनाव के नतीजो में भुगतना पड़ सकता है इसलिए नगर निगम और पालिका क्षेत्र में आने वाली 85 सीटों के कार्यकर्ताओं और लोगों के फीडबैक के आधार पर ऐसे विधायकों का नंबर कट सकता है जिन्होने जनता को निराश किया है। पार्टी ने शुरूआती विचार-विमर्श और माथापच्ची के बाद इस समस्या का हल निकाल लिया है ।
क्या है रणनीति
प्रदेश भाजपा के अंदरखाने से जानकारी मिल रही है कि 70 पार कर चुके विधायकों को इस बार चुनाव में आराम दिया जा सकता है। खराब प्रदर्शन करने वाले नेताओं का टिकट काटने के साथ अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले,समाजसेवी,डॉक्टर,इंजीनियर,सीए,शिक्षक,उद्योगपति,वकील,गैर राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय,और रिटायर शासकीय सेवक को प्रत्याशी के तौर पर चुनावी मैदान में उतारा जा सकता है।
पार्टी के सूत्रों के मुताबिक ऐसा कर, भाजपा के मौजूदा विधायकों के प्रति एंटी इंकम्बेंसी को कम किया जा सकेगा और दावेदारों के बीच टिकट को लेकर लड़ाई भी खत्म होगी। केंद्रीय नेताओं के साथ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की इस संबंध में पहले दौर की बातचीत हो चुकी है और सूत्रों की मानें तो राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से चर्चा के बाद इसे अमलीजामा भी पहना दिया जाएगा।
लेकिन इस बड़ी उलट-फेर की संभावना के बीच केंद्रीय नेताओं ने कहा है कि जो मौजूदा नेता जो 7-8 या इससे अधिक बार से जीत रहे हैं, उन्हें दोबारा मौका दिया जाए। जिनके जीतने की उम्मीद नहीं उनकी जगह नए चेहरे लाए जाएं और इन नए चेहरों में पहली बार के सांसद, महापौर-निगम अध्यक्ष, पालिका अध्यक्ष भी हो सकते हैं।
2013 में भी नये चेहरों ने दिलाई थी जीत
पिछले चुनाव में भाजपा ने 43 नए चेहरे उतारे थे और इनमें से 31 ने जीत हासिल की थी। इनमें शिक्षक नेता मुरलीधर पाटीदार,उद्योगपति चैतन्य कश्यप और कार्टूनिस्ट घनश्याम पिरोनिया शामिल हैं। यह प्रयोग भाजपा के लिए सही साबित हुआ था इसलिए प्रदेश भाजपा को विश्वास है कि पेशेवर प्रत्याशी भी जीत सुनिश्चित कर सकते हैं।
