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मध्य प्रदेश: प्रदेश में स्टेम सेल थैरेपी आधारित बोन मैरो ट्रांसप्लांट की 4 मेडिकल कॉलज से होगी शुरुआत
Fri, 01 Apr 2022 07:40 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Fri, 01 Apr 2022 07:40 PM IST
सार
मध्यप्रदेश के चार मेडिकल कॉलेज में 6 महीने में स्टेम सेल थैरेपी आधारित बोन मैरो ट्रांसप्लांट एवं पीडियाट्रिक कैंसर यूनिट की स्थापना होगी। इसके एक साल में 20 बोन मैरो ट्रासंप्लांट करने का लक्ष्य तय किया गया है।
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चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश के चार मेडिकल कॉलेज में 6 महीने में स्टेम सेल थैरेपी आधारित बोन मैरो ट्रांसप्लांट एवं पीडियाट्रिक कैंसर यूनिट की स्थापना होगी। इसके एक साल में 20 बोन मैरो ट्रासंप्लांट करने का लक्ष्य तय किया गया है।
चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने बताया कि प्रदेश में स्टेम सेल थैरेपी आधारित बोन मैरो ट्रांसप्लांट एवं पीडियाट्रिक कैंसर यूनिट की स्थापना की जा रही है। मध्य प्रदेश में चार मेडिकल कॉलेज भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर और रीवा में यह सुविधा प्रारंभ होगी। लगभग 6 माह में इसे विकसित किया जाएगा।
प्रदेश में बच्चों के जेनेटिक बीमारियां जैसे सिकल सेल एनीमिया, एप्लास्टिक एनीमिया, थैलीसीमिया तथा कैंसर ल्यूकीमिया, मल्टीपल माईलोमा, नॉन हॉजकिन्स लिंफोमा के उपचार के लिए बोनमैरो ट्रांसप्लांट यूनिट की स्थापना की जाएगी। प्रथम चरण में गांधी चिकित्सा महाविद्यालय में 06 बिस्तरीय बोनमैरो ट्रांसप्लांट यूनिट एवं 24 बिस्तरीय पीडियाट्रिक कैंसर यूनिट की स्थापना की जाएगी। इस यूनिट के माध्यम से विश्व स्तरीय चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसमें स्वयं के (ऑटोलॉगस) स्टेम सेल ग्राफ्टिंग एवं अन्य व्यक्ति के (एलोजेनिक) बोनमैरो ट्रांसप्लांट किया जाएगा।
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ऐसे होगा ट्रांसप्लांट
बच्चों में सिकल सेल एनीमिया, एप्लास्टिक एनीमिया एवं थैलीसीमिया जैसी जेनटिक बीमारियों के कारण बच्चों के संक्रमित बोन मैरो को निकाल कर दूसरे व्यक्ति का स्वस्थ बोनमैरो ट्रांसप्लांट किया जाएगा। पीड़ित बच्चों के बोनमैरो को ट्रांसप्लांट करने के लिए प्राथमिक डोनर बच्चों के भाई बहन होते हैं, जिनका बोनमैरों के बच्चों के बोन मैरो से मैच करने की संभावना 25 प्रतिशत से अधिक होती है। वहीं, कैंसर जैसे ल्यूकीमिया, मल्टीपल माईलामा, नॉन हॉजकिन्स लिंफोमा के पीड़ित मरीजों में उनके ही स्टेम सेल को निकाल कर ऑटोलॉगस स्टेम सेल ट्रांसप्लांट किया जाएगा। पीड़ित मरीज के ही स्टेम सेल को निकाला जाएगा, फिर उसको क्रायो प्रिजर्व किया जाएगा। उसके बाद उसी मरीज में ऑटालॉगस ट्रांसप्लांट की जाएगी।
बोन मैरो के लिए सेकेंडरी डोनर
पीड़ित बच्चों के भाई-बहन के ना होने की स्थिति में अन्य व्यक्ति के बोनमैरो जो बच्चों के साथ 100 प्रतिशत मैच करता है का उपयोग में लिया जा सकता है। सेकेंडरी डोनर को स्टेम सेल रजिस्ट्री के माध्यम से चिन्हित किया जाता है।
स्टेम सेल रजिस्ट्री
भारत सरकार की स्टेम सेल रजिस्ट्री में कोई भी व्यक्ति स्वेच्छा से अपने बोनमैरो को डोनेट करने के लिए स्वयं को रजिस्टर कर सकता है। किसी भी पीड़ित बच्चों के बोनमैरों से मैच होने पर वह अपने बोन मैरो को डोनेट कर सकता है।
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चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने बताया कि प्रदेश में स्टेम सेल थैरेपी आधारित बोन मैरो ट्रांसप्लांट एवं पीडियाट्रिक कैंसर यूनिट की स्थापना की जा रही है। मध्य प्रदेश में चार मेडिकल कॉलेज भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर और रीवा में यह सुविधा प्रारंभ होगी। लगभग 6 माह में इसे विकसित किया जाएगा।
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प्रदेश में बच्चों के जेनेटिक बीमारियां जैसे सिकल सेल एनीमिया, एप्लास्टिक एनीमिया, थैलीसीमिया तथा कैंसर ल्यूकीमिया, मल्टीपल माईलोमा, नॉन हॉजकिन्स लिंफोमा के उपचार के लिए बोनमैरो ट्रांसप्लांट यूनिट की स्थापना की जाएगी। प्रथम चरण में गांधी चिकित्सा महाविद्यालय में 06 बिस्तरीय बोनमैरो ट्रांसप्लांट यूनिट एवं 24 बिस्तरीय पीडियाट्रिक कैंसर यूनिट की स्थापना की जाएगी। इस यूनिट के माध्यम से विश्व स्तरीय चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसमें स्वयं के (ऑटोलॉगस) स्टेम सेल ग्राफ्टिंग एवं अन्य व्यक्ति के (एलोजेनिक) बोनमैरो ट्रांसप्लांट किया जाएगा।
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ऐसे होगा ट्रांसप्लांट
बच्चों में सिकल सेल एनीमिया, एप्लास्टिक एनीमिया एवं थैलीसीमिया जैसी जेनटिक बीमारियों के कारण बच्चों के संक्रमित बोन मैरो को निकाल कर दूसरे व्यक्ति का स्वस्थ बोनमैरो ट्रांसप्लांट किया जाएगा। पीड़ित बच्चों के बोनमैरो को ट्रांसप्लांट करने के लिए प्राथमिक डोनर बच्चों के भाई बहन होते हैं, जिनका बोनमैरों के बच्चों के बोन मैरो से मैच करने की संभावना 25 प्रतिशत से अधिक होती है। वहीं, कैंसर जैसे ल्यूकीमिया, मल्टीपल माईलामा, नॉन हॉजकिन्स लिंफोमा के पीड़ित मरीजों में उनके ही स्टेम सेल को निकाल कर ऑटोलॉगस स्टेम सेल ट्रांसप्लांट किया जाएगा। पीड़ित मरीज के ही स्टेम सेल को निकाला जाएगा, फिर उसको क्रायो प्रिजर्व किया जाएगा। उसके बाद उसी मरीज में ऑटालॉगस ट्रांसप्लांट की जाएगी।
बोन मैरो के लिए सेकेंडरी डोनर
पीड़ित बच्चों के भाई-बहन के ना होने की स्थिति में अन्य व्यक्ति के बोनमैरो जो बच्चों के साथ 100 प्रतिशत मैच करता है का उपयोग में लिया जा सकता है। सेकेंडरी डोनर को स्टेम सेल रजिस्ट्री के माध्यम से चिन्हित किया जाता है।
स्टेम सेल रजिस्ट्री
भारत सरकार की स्टेम सेल रजिस्ट्री में कोई भी व्यक्ति स्वेच्छा से अपने बोनमैरो को डोनेट करने के लिए स्वयं को रजिस्टर कर सकता है। किसी भी पीड़ित बच्चों के बोनमैरों से मैच होने पर वह अपने बोन मैरो को डोनेट कर सकता है।
