फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Madhya Pradesh sanctuary does not have the manpower and money to take care of the cattle

ना लोग ना पैसा, देश के पहले गो अभ्यारण्य ने गायों के लिए बंद किए दरवाजे

Mon, 30 Jul 2018 09:48 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Updated Mon, 30 Jul 2018 09:48 AM IST
विज्ञापन
Madhya Pradesh sanctuary does not have the manpower and money to take care of the cattle

मध्यप्रदेश सरकार ने अपने राज्य में गायों के लिए कामधेनू गौ अभ्यारण्य का निर्माण किया था। लेकिन यह गौशाला फंड की कमी से जूझ रहा है। पांच महीने पहले इस अभ्यारण्य ने अपने दरवाजे गायों के लिए खोले थे लेकिन फरवरी में इसने गायों के प्रवेश पर रोक लगा दी है। उसका कहना है कि उसके पास गायों की देखभाल के लिए लोगों की कमी के साथ ही पैसों की भी किल्लत है। 

विज्ञापन


राज्य के आगर जिले के सलारिया गांव में 472 हेक्टेयर में फैला हुआ यह अभ्यारण्य सितंबर 2017 में खोला गया था। इसे गायों के लिए देश में बने पहले अभ्यारण्य के तौर पर प्रचारित किया जा रहा था। इसमें इधर-उधर भटकने वाली और त्याग दी जाने वाली गायों को आश्रय देने के लिए बनाया गया था। इसका मकसद गाय के पेशाब और गोबर से कीटनाशक और दवा बनाना था। योजना थी कि इस आश्रय स्थल में बने 24 शेड में 6000 गायों को रखा जाएगा। वहीं अभ्यारण्य में इस समय केवल 4,120 गाए मौजूद हैं।
विज्ञापन


इस अभ्यारण्य की देखभाल कर रहे पशुपालन विभाग केवल गायों के लिए चारे के लिए पैसा मुहैया करवा रहा है। पशुपालन विभाग के एक सूत्र ने कहा, 'खर्च 10 करोड़ रुपए से ज्यादा का है लेकिन मिलने वाला बजट उसका आधा है। लगभग 4 करोड़ रुपए चारे में खर्च हो जाते हैं।' सूत्र के अनुसार वित्त विभाग के एक अधिकारी ने मध्य प्रदेश गौ संवर्धन बोर्ड से कहा है कि वह गायों की सुरक्षा के लिए लोगों से चंदा इकट्ठा करें। 
विज्ञापन
विज्ञापन


उप निदेशक डॉक्टर वीएस कोसरवाल जिनके पास अभ्यारण्य की जिम्मेदारी है, उन्होंने फंड की कमी होने की बात को स्वीकार किया। उन्होंने कहा, 'हमने फरवरी से गायों के प्रवेश पर रोक लगा दी है। इस क्षेत्र में उप-मंडल मजिस्ट्रेट परिवहन के लिए अनुमति नहीं दे रहे हैं।' भविष्य और वर्तमान की जरुरतों को ध्यान में रखते हुए अभ्यारण्य के उद्घाटन के बाद गो संरक्षण बोर्ड ने 22 करोड़ रुपये का एक प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा था। जिसे रद्द कर दिया गया। इसके अलावा 14 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को भी मंजूरी नहीं मिली।


अभ्यारण्य के पास आय का कोई साधन नहीं है क्योंकि उसके पास आने वाली गाए वृद्ध और पुरानी होती हैं या फिर दूध देना बंद कर चुकी होती हैं। परिसर में बिजली के लिए तीन बायो-गैस प्लांट लगाए गए हैं। गाए के पेशाब से एसेंस निकालने के लिए कुछ मशीनें मौजूद हैं। वहीं जबलपुर की नानाजी देशमुख वेटेरिनरी साइंस यूनिवर्सिटी के कुछ विशेषज्ञ कभी-कभी अभयारण्य आते रहते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed