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मध्य प्रदेश: सोमेश्वर धाम के पट खोलने के संबंध में रायसेन जिला प्रशासन ने लिखा उमा भारती को पत्र
Mon, 11 Apr 2022 09:44 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायसेन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायसेन
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Mon, 11 Apr 2022 09:44 AM IST
सार
रायसेन किले में बंद सोमेश्वर धाम शिव मन्दिर में उमा भारती ने सोमवार 11 अप्रैल को जलाभिषेक करने की घोषणा की थी। उमा भारती के एलान के बाद रायसेन जिला प्रशासन ने पत्र लिखकर उन्हें मंदिर के पुरातत्व विभाग के आधीन होने की जानकारी दी।
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रायसेन के किले में बंद सोमेश्वरनाथ।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
रायसेन किले में बंद सोमेश्वर धाम शिव मन्दिर में उमा भारती ने सोमवार 11 अप्रैल को मंदिर में जलाभिषेक करने की घोषणा की थी। उमा भारती के एलान के बाद रायसेन जिला प्रशासन की ओर से कलेक्टर अरविंद दुबे ने पत्र जारी कर मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती को मंदिर की वस्तुस्थिति से अवगत कराया हैं।
पत्र के जरिए कलेक्टर ने रायसेन किले में बंद शिव मंदिर के केन्द्रीय पुरातत्व विभाग (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) के अधीन होने की जानकारी दी है। दरअसल मंदिर का गर्भगृह केन्द्रीय पुरातत्व विभाग द्वारा सिर्फ महाशिवरात्रि पर खोला जाता है। शेष दिनों में यह बंद रहता है। रोजाना निर्धारित समय में दर्शक/पर्यटक दरवाजे के बाहर से शिवलिंग एवं अन्य पुरातात्विक महत्व की संरचनाओं का अवलोकन कर सकते हैं।
जिला प्रशासन एवं राज्य शासन द्वारा शिव मंदिर के गर्भगृह को खोलने का निर्णय नहीं लिया जा सकता है। जिला प्रशासन ने पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के 11 अप्रैल के प्रवास के लिए केन्द्रीय पुरातत्व विभाग को अवगत कराया है। केन्द्रीय पुरातत्व विभाग यदि अनुमति देगा, तो जिला प्रशासन द्वारा तत्काल उमा भारती को अवगत कराया जाएगा।
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फिलहाल जिला प्रशासन का प्रयास है कि 11 अप्रैल से पहले कोई उत्तर केन्द्रीय पुरातत्व से प्राप्त हो। इन तथ्यों से जिला प्रशासन द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री उमा को अवगत कराया गया है। किले के बाहर जन आंदोलन को देखते हुए सुरक्षा की दृष्टि से शहर में बाहर से अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
सोमेश्वर धाम का इतिहास
रायसेन के वरिष्ट पुरातत्वविद राजीव चौबे के अनुसार मंदिर 11 वीं सदी परमार कालीन हैं। 16 वीं सदी में मुगलों के आक्रमण के बाद शेरशाह सूरी ने इसे मस्जिद का स्वरूप दे दिया था। लेकिन आजादी के बाद यहा मंदिर को लेकर बड़ा आंदोलन हुआ। जिसके फलस्वरूप 1974 में तत्कालीन मुख्यमंत्री पीसी सेठी ने विशेष अनुमति लेकर मंदिर की मूर्तियों को स्थापित कराया और हर शिवरात्रि के मौके पर यहां मेले का आयोजन कर 12 घंटे के लिए मन्दिर पूजा के लिए खोला जाने लगा।
मंदिर पुरातत्व विभाग के नियमों के कारण बंद है। जिसे खोलना इतना आसान नहीं हैं। लेकिन अब पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा के दौरान व्यास पीठ से फिर मन्दिर को खोले जाने की मांग उठी है।
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पत्र के जरिए कलेक्टर ने रायसेन किले में बंद शिव मंदिर के केन्द्रीय पुरातत्व विभाग (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) के अधीन होने की जानकारी दी है। दरअसल मंदिर का गर्भगृह केन्द्रीय पुरातत्व विभाग द्वारा सिर्फ महाशिवरात्रि पर खोला जाता है। शेष दिनों में यह बंद रहता है। रोजाना निर्धारित समय में दर्शक/पर्यटक दरवाजे के बाहर से शिवलिंग एवं अन्य पुरातात्विक महत्व की संरचनाओं का अवलोकन कर सकते हैं।
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जिला प्रशासन एवं राज्य शासन द्वारा शिव मंदिर के गर्भगृह को खोलने का निर्णय नहीं लिया जा सकता है। जिला प्रशासन ने पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के 11 अप्रैल के प्रवास के लिए केन्द्रीय पुरातत्व विभाग को अवगत कराया है। केन्द्रीय पुरातत्व विभाग यदि अनुमति देगा, तो जिला प्रशासन द्वारा तत्काल उमा भारती को अवगत कराया जाएगा।
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फिलहाल जिला प्रशासन का प्रयास है कि 11 अप्रैल से पहले कोई उत्तर केन्द्रीय पुरातत्व से प्राप्त हो। इन तथ्यों से जिला प्रशासन द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री उमा को अवगत कराया गया है। किले के बाहर जन आंदोलन को देखते हुए सुरक्षा की दृष्टि से शहर में बाहर से अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
सोमेश्वर धाम का इतिहास
रायसेन के वरिष्ट पुरातत्वविद राजीव चौबे के अनुसार मंदिर 11 वीं सदी परमार कालीन हैं। 16 वीं सदी में मुगलों के आक्रमण के बाद शेरशाह सूरी ने इसे मस्जिद का स्वरूप दे दिया था। लेकिन आजादी के बाद यहा मंदिर को लेकर बड़ा आंदोलन हुआ। जिसके फलस्वरूप 1974 में तत्कालीन मुख्यमंत्री पीसी सेठी ने विशेष अनुमति लेकर मंदिर की मूर्तियों को स्थापित कराया और हर शिवरात्रि के मौके पर यहां मेले का आयोजन कर 12 घंटे के लिए मन्दिर पूजा के लिए खोला जाने लगा।
मंदिर पुरातत्व विभाग के नियमों के कारण बंद है। जिसे खोलना इतना आसान नहीं हैं। लेकिन अब पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा के दौरान व्यास पीठ से फिर मन्दिर को खोले जाने की मांग उठी है।
