{"_id":"6274f7e41ef8631ab0200fa4","slug":"madhya-pradesh-panchayat-elections-supreme-court-reserves-its-verdict-will-be-pronounced-on-may-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"मध्य प्रदेश पंचायत चुनाव: सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा, 10 मई को सुनाया जाएगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मध्य प्रदेश पंचायत चुनाव: सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा, 10 मई को सुनाया जाएगा
Fri, 06 May 2022 05:28 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Fri, 06 May 2022 05:28 PM IST
सार
मध्य प्रदेश में पंचायत चुनाव में OBC आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब इस मामले में 10 मई को फैसला सुनाया जाएगा।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मध्य प्रदेश में पंचायत चुनाव में OBC आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब इस मामले में 10 मई को फैसला सुनाया जाएगा।
याचिकाकर्ता सैयद जाफर और जया ठाकुर की तरफ से एडवोकेट वरुण ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि संविधान के अनुसार मध्य प्रदेश में तत्काल पंचायत एवं नगर पालिका चुनाव की घोषणा हो। संविधान के अनुसार प्रदेश की शोषित एवं पिछड़ी जातियों को प्रतिनिधित्व देते हुए पंचायत एवं नगर पालिका चुनाव में आरक्षण दिया जाना संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने न्यायालय से अनुरोध किया की संविधान अनुसार प्रदेश सरकार से जो भी प्रक्रिया करानी हो वह कराए लेकिन ओबीसी आरक्षण आवश्यक दे।
बता दें मध्य प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग की पहली रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश की थी। रिपोर्ट में आयोग ने दावा किया है कि मध्य प्रदेश में 48 प्रतिशत मतदाता अन्य पिछड़ा वर्ग के हैं। आयोग ने नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव में ओबीसी को 35 प्रतिशत आरक्षण देने की अनुशंसा की है।
विज्ञापन
विज्ञापन
याचिकाकर्ता सैयद जाफर और जया ठाकुर की तरफ से एडवोकेट वरुण ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि संविधान के अनुसार मध्य प्रदेश में तत्काल पंचायत एवं नगर पालिका चुनाव की घोषणा हो। संविधान के अनुसार प्रदेश की शोषित एवं पिछड़ी जातियों को प्रतिनिधित्व देते हुए पंचायत एवं नगर पालिका चुनाव में आरक्षण दिया जाना संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने न्यायालय से अनुरोध किया की संविधान अनुसार प्रदेश सरकार से जो भी प्रक्रिया करानी हो वह कराए लेकिन ओबीसी आरक्षण आवश्यक दे।
विज्ञापन
बता दें मध्य प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग की पहली रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश की थी। रिपोर्ट में आयोग ने दावा किया है कि मध्य प्रदेश में 48 प्रतिशत मतदाता अन्य पिछड़ा वर्ग के हैं। आयोग ने नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव में ओबीसी को 35 प्रतिशत आरक्षण देने की अनुशंसा की है।
विज्ञापन
