{"_id":"618664ff6331b0090b17fc8d","slug":"madhya-pradesh-panchayat-elections-may-be-announced-this-month-legal-screw-is-stuck-in-civic-elections","type":"story","status":"publish","title_hn":"मध्यप्रदेश: इसी माह हो सकती है पंचायत चुनावों की घोषणा, निकाय चुनाव में फंसा है कानूनी पेंच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मध्यप्रदेश: इसी माह हो सकती है पंचायत चुनावों की घोषणा, निकाय चुनाव में फंसा है कानूनी पेंच
Sat, 06 Nov 2021 04:50 PM IST
रवींद्र भजनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवास
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवास
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Sat, 06 Nov 2021 04:50 PM IST
सार
मप्र में उपचुनावों में बेहतर प्रदर्शन की बदौलत भाजपा ने राहत की सांस ली है। इसी के चलते अब आगामी चुनावों पर फोकस किया जा रहा है। इसी माह पंचायत चुनावों की घोषणा की जा सकती है।
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उपचुनाव हो गए। नतीजे आ गए। दीपोत्सव पर्व भी संपन्न हुआ। अब फिर से चुनावी समर की तैयारी है। मप्र में उपचुनावों में बेहतर प्रदर्शन की बदौलत भाजपा ने राहत की सांस ली है और आत्मविश्वास भी लौटा है और इसी के चलते अब आगामी चुनावों पर फोकस किया जा रहा है। इसी माह पंचायत चुनावों की घोषणा की जा सकती है।
दरअसल, पंचायत चुनावों को लेकर निर्वाचन आयोग में पिछले दिनों कलेक्टरों से वीसी में चर्चा की थी। इसमें पूरी तैयारी के लिए कहा गया था। निर्वाचन आयोग की वीसी के बाद जिलों में स्टैंडिंग कमेटी का गठन भी हो चुका है। ग्राम पंचायत और जनपद पंचायतों के आरक्षण की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। इसके चलते निर्वाचन आयोग ने चुनाव का मन बनाया है। सरकार की ओर से भी सहमति है। तीन चरणों में चुनाव होंगे। सरपंचों का चुनाव मतपत्रों से होगा तो जिला पंचायत चुनाव ईवीएम से होंगे।
जिला पंचायतों में होना है आरक्षण
जिला पंचायतों के आरक्षण की प्रक्रिया अभी बाकी है। मप्र में 52 जिला पंचायतें हैं। इनमें अध्यक्ष पद के आरक्षण के लिए निर्वाचन आयोग ने सरकार से जानकारी मांगी है। कहा जा रहा है कि इस माह के अंत तक आरक्षण की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
विज्ञापन
नगरीय निकाय चुनाव उलझन में
नगरीय निकायों के चुनावों को लेकर उलझन बरकरार है। पूर्व में आरक्षण जरूर हुआ था लेकिन मामला कोर्ट तक पहुंचा। आरक्षण को कोर्ट में चुनौती दी गई लिहाजा बात वहीं रूक गई। सबसे ज्यादा नजरें निकाय चुनावों पर ही है क्योंकि इस साल चुनाव होना संभव नहीं लग रहा। अगले साल यदि चुनाव हो गए तो ठीक वरना 2023 में मप्र में विधानसभा चुनाव होंगे। ऐसे में मुश्किल होगी।
जिला पंचायतों पर ज्यादा फोकस
ग्राम पंचायतों के चुनावों में पार्टी का ज्यादा महत्व नहीं है और व्यक्तिगत आधार पर ये चुनाव होते हैं, इसलिए भाजपा-कांग्रेस इस पर ज्यादा फोकस नहीं करेगी लेकिन जनपद और जिला पंचायत में जरूर दोनों दलों की साख दांव पर रहेगी। जिला पंचायत अहम इकाई है और ग्रामीण विकास की योजनाएं इसी के माध्यम से तैयार होती है। ऐसे मेें जिला पंचायत के अध्यक्ष व सदस्यों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
विज्ञापन
दरअसल, पंचायत चुनावों को लेकर निर्वाचन आयोग में पिछले दिनों कलेक्टरों से वीसी में चर्चा की थी। इसमें पूरी तैयारी के लिए कहा गया था। निर्वाचन आयोग की वीसी के बाद जिलों में स्टैंडिंग कमेटी का गठन भी हो चुका है। ग्राम पंचायत और जनपद पंचायतों के आरक्षण की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। इसके चलते निर्वाचन आयोग ने चुनाव का मन बनाया है। सरकार की ओर से भी सहमति है। तीन चरणों में चुनाव होंगे। सरपंचों का चुनाव मतपत्रों से होगा तो जिला पंचायत चुनाव ईवीएम से होंगे।
विज्ञापन
जिला पंचायतों में होना है आरक्षण
जिला पंचायतों के आरक्षण की प्रक्रिया अभी बाकी है। मप्र में 52 जिला पंचायतें हैं। इनमें अध्यक्ष पद के आरक्षण के लिए निर्वाचन आयोग ने सरकार से जानकारी मांगी है। कहा जा रहा है कि इस माह के अंत तक आरक्षण की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
विज्ञापन
नगरीय निकाय चुनाव उलझन में
नगरीय निकायों के चुनावों को लेकर उलझन बरकरार है। पूर्व में आरक्षण जरूर हुआ था लेकिन मामला कोर्ट तक पहुंचा। आरक्षण को कोर्ट में चुनौती दी गई लिहाजा बात वहीं रूक गई। सबसे ज्यादा नजरें निकाय चुनावों पर ही है क्योंकि इस साल चुनाव होना संभव नहीं लग रहा। अगले साल यदि चुनाव हो गए तो ठीक वरना 2023 में मप्र में विधानसभा चुनाव होंगे। ऐसे में मुश्किल होगी।
जिला पंचायतों पर ज्यादा फोकस
ग्राम पंचायतों के चुनावों में पार्टी का ज्यादा महत्व नहीं है और व्यक्तिगत आधार पर ये चुनाव होते हैं, इसलिए भाजपा-कांग्रेस इस पर ज्यादा फोकस नहीं करेगी लेकिन जनपद और जिला पंचायत में जरूर दोनों दलों की साख दांव पर रहेगी। जिला पंचायत अहम इकाई है और ग्रामीण विकास की योजनाएं इसी के माध्यम से तैयार होती है। ऐसे मेें जिला पंचायत के अध्यक्ष व सदस्यों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
