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मध्य प्रदेश: पटाखों संबंधी मामले में दिए आदेश का पालन न होने पर एनजीटी सख्त, जबलपुर, इंदौर, भोपाल व ग्वालियर कलेक्टरों को नोटिस
Fri, 04 Feb 2022 06:32 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Fri, 04 Feb 2022 06:32 PM IST
सार
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने दायर अवमानना मामले की सुनवाई करते हुए जबलपुर, इंदौर, भोपाल व ग्वालियर कलेक्टरों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। ये नोटिस पटाखे फोड़ने संबंधी आदेश का पालन न होने पर दिए गए हैं।
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इंदौर, भोपाल व ग्वालियर कलेक्टरों को नोटिस
- फोटो : Social Media
विस्तार
पटाखे फोड़ने संबंधी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश का अक्षरश: पालन न होने को लेकर दायर अवमानना याचिका को एनजीटी ने सख्ती से लिया। एनजीटी के न्यायिक सदस्य शिवकुमार सिंह व एक्सपर्ट मेंबर अरुण कुमार वर्मा की युगलपीठ ने दायर अवमानना मामले की सुनवाई करते हुए जबलपुर, इंदौर, भोपाल व ग्वालियर कलेक्टरों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
एनजीटी में यह अवमानना याचिका डॉ. पीजी नाजपांडे व रजत भार्गव की ओर से दायर की गई थी। जिसमें कहा गया था कि 27 अक्टूबर 2021 को एनजीटी ने पटाखे फोड़ने संबंधी आदेश जारी किए थे। साथ ही जिला कलेक्टरों पर आदेश के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। आरोप है कि उक्त आदेश का पालन करने में जबलपुर, इंदौर, भोपाल व ग्वालियर जिला कलेक्टर पूर्णत: फेल रहे हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता प्रभात यादव ने बेंच को बताया कि उस समय वायु इंडेक्स पुअर था और आदेश के बावजूद भी देर रात तक पटाखे फोड़ने का दौर बदस्तूर जारी रहा। इतना ही नहीं ग्रीन पटाखे फोड़े ही नहीं गए। रात 2 बजे तक पटाखे फोड़े गए। जबकि कलेक्टरों ने मात्र दो घंटे पटाखे फोड़े जाने के आदेश जारी किए थे। जिस कारण विपरीत स्थिति निर्मित हुई, जिसके लिये दोषी अधिकारियों से मुआवजा वसूला जाए।
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एनजीटी में यह अवमानना याचिका डॉ. पीजी नाजपांडे व रजत भार्गव की ओर से दायर की गई थी। जिसमें कहा गया था कि 27 अक्टूबर 2021 को एनजीटी ने पटाखे फोड़ने संबंधी आदेश जारी किए थे। साथ ही जिला कलेक्टरों पर आदेश के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। आरोप है कि उक्त आदेश का पालन करने में जबलपुर, इंदौर, भोपाल व ग्वालियर जिला कलेक्टर पूर्णत: फेल रहे हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता प्रभात यादव ने बेंच को बताया कि उस समय वायु इंडेक्स पुअर था और आदेश के बावजूद भी देर रात तक पटाखे फोड़ने का दौर बदस्तूर जारी रहा। इतना ही नहीं ग्रीन पटाखे फोड़े ही नहीं गए। रात 2 बजे तक पटाखे फोड़े गए। जबकि कलेक्टरों ने मात्र दो घंटे पटाखे फोड़े जाने के आदेश जारी किए थे। जिस कारण विपरीत स्थिति निर्मित हुई, जिसके लिये दोषी अधिकारियों से मुआवजा वसूला जाए।
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