कमलनाथ ने शिवराज पर साधा निशाना, कहा- अभी तो एक दिन ही हुआ है, कहेंगे कुछ करेंगे कुछ
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भाजपा के वरिष्ठ नेता शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार रात को चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और मंगलवार को उन्होंने विधानसभा में बहुमत साबित कर दिया। बहुमत साबित करने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ट्वीट कर शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधा।
कमलनथ ने ट्वीट किया कि एक तरफ कोरोना वायरस को लेकर सुरक्षा व सावधानी के लिए उठाए गए तमाम निर्णय, प्रदेश में भी लॉकडाउन, कर्फ़्यू जैसे निर्णय, वही दूसरी तरफ शिवराज सरकार द्वारा खुद के निर्णयों का उल्लंघन कर कर्फ्यू में भी विधानसभा सभा का सत्र आज बुलाने का देर रात में लिया गया निर्णय समझ से परे है।
कमलनाथ ने आगे लिखा कि विश्वास मत हासिल करने के लिये समय था, आखिर इतनी जल्दबाजी क्यों? कोरोंना से बचाव के लिये यह दोहरे मापदंड क्यों? जनता के लिए नियमो के पालन की सख्ती व खुद उल्लंघन पर उल्लंघन? अभी तो एक दिन ही हुआ है, कहेंगे कुछ करेंगे कुछ....
बता दें कि विश्वास मत के दौरान एक भी कांग्रेस विधायक सदन में मौजूद नहीं था। कांग्रेस का कहना है कि कोरोना की वजह से उनका एक भी विधायक सदन में नहीं पहुंचा, इसलिए शिवराज ने सर्वसम्मति से विश्वास मत जीत लिया। सभी विधायकों ने ‘हां’ कहकर विश्वास मत प्रस्ताव पारित कर दिया। इससे पहले स्पीकर एनपी प्रजापति ने इस्तीफा दे दिया था। इस वजह से विधायक जगदीश देवड़ा ने कार्यवाही पूरी कराई। इसके बाद विधानसभा का सत्र 27 मार्च सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दिया गया।
एक तरफ़ कोरोना वाइरस को लेकर सुरक्षा व सावधानी के लिये लिये गये तमाम निर्णय,प्रदेश में भी लॉक डाउन,कर्फ़्यू जैसे निर्णय,वही दूसरी तरफ़ शिवराज सरकार द्वारा ख़ुद के निर्णयों का उल्लंघन कर कर्फ़्यू में भी विधानसभा सभा का सत्र आज बुलाने का देर रात में लिया गया निर्णय समझ से परे,
— Office Of Kamal Nath (@OfficeOfKNath) March 24, 2020
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दिग्विजय सिंह ने ज्योतिरादित्य सिंधिया पर किया हमला
वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने भाजपा में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया पर जनादेश को निलाम करने जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए मध्यप्रदेश की जनता के नाम खुला पत्र लिखा है। गौरतलब है कि पिछले दिनों सिंधिया 22 विधायकों को लेकर पार्टी से अलग हो गए थे। सिंधिया के समर्थित 22 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया जिसके बाद कमलनाथ सरकार गिर गई।
दिग्विजय ने कहा कि यह बेहद दुखद घटनाक्रम है जिसने न सिर्फ कांग्रेस कार्यकर्ताओं बल्कि उन सभी नागरिकों की आशाओं और संघर्ष पर पानी फेर दिया, जो कांग्रेस की विचारधारा में यकीन रखते हैं। मुझे बेहद दुख है कि सिंधिया उस समय भाजपा में गए, जब भाजपा खुलकर आरएसएस के असली एजेंडा को लागू करने के लिए देश को पूरी तरह बांट रही है। कुछ लोग यह कह रहे हैं कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को कांग्रेस में उचित पद और सम्मान मिलने की संभावना समाप्त हो गई थी, इसलिए वह भाजपा में चले गए, लेकिन ये गलत है।
यदि वे प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष बनना चाहते थे, तो ये पद उन्हें 2013 में ही ऑफर हुआ था और तब उन्होंने केंद्र में मंत्री बने रहना पसंद किया था। यही नहीं, 2018 में चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस पार्टी ने उन्हें उपमुख्यमंत्री पद संभालने का न्योता भी दिया था। लेकिन उन्होंने स्वयं इसे अस्वीकार कर अपने समर्थक तुलसी सिलावट को उप मुख्यमंत्री बनाने की पेशकश कर दी थी। कमलनाथ तुलसी सिलावट को उप मुख्यमंत्री बनाने के लिए तैयार नहीं हुए और हाल के घटनाक्रम ने ये साबित भी कर दिया है कि वे सही थे।
तुलसी सिलावट न सिर्फ भाजपा में गए, बल्कि ऐसे समय में गए, जब राज्य में कोरोना वायरस की महामारी से निपटने की प्राथमिक जिम्मेदारी स्वास्थ्य मंत्री के नाते उन्हीं की थी। सिंधिया ऐसे व्यक्ति को कांग्रेस सरकार का उप मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे, जो न सिर्फ कांग्रेस विचारधारा के प्रति बेइमान निकला, बल्कि पूर्ण रूप से गैर जिम्मेदार भी साबित हुआ है।
