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मध्यप्रदेश: इंदौर को मिला राष्ट्रीय जल शक्ति पुरस्कार, वेस्ट जोन में आया पहले नंबर पर...जल संरक्षण के लिए किए गए कार्यों की हुई सराहना
Sat, 08 Jan 2022 01:49 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा
Updated Sat, 08 Jan 2022 01:49 PM IST
सार
पांचवीं बार देश के सबसे स्वच्छ शहर घोषित हुए इंदौर के खाते में एक और उपलब्धि आई है। राष्ट्रीय जल पुरस्कार इंदौर को मिला है। वेस्ट जोन में इंदौर पहले नंबर पर आया है। जल संरक्षण के लिए किए गए कार्यों के चलते यह पुरस्कार इंदौर को प्राप्त हुआ है।
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मप्र के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने दी बधाई।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
पांचवीं बार देश के सबसे स्वच्छ शहर घोषित हुए इंदौर के खाते में एक और उपलब्धि आई है। राष्ट्रीय जल पुरस्कार इंदौर को मिला है। वेस्ट जोन में इंदौर पहले नंबर पर आया है। जल संरक्षण के लिए इंदौर द्वारा किए गए कार्यों के चलते यह पुरस्कार प्राप्त हुआ है। इस उपलब्धि पर मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने ट्वीट कर इंदौर को बधाई दी है।
दरअसल केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने शुक्रवार को राष्ट्रीय जल पुरस्कार 2020 की घोषणा की, जिसमें वेस्ट जोन में इंदौर पहले स्थान पर आया है। जहां तालाब किनारे से अतिक्रमण हटाने, गहरीकरण, सीवेज का शुद्धिकरण, वाटर हार्वेस्टिंग क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ कार्य करना पाया गया है। सर्वश्रेष्ठ राज्य श्रेणी में उत्तर प्रदेश को प्रथम पुरस्कार मिला। जबकि राजस्थान और तमिलनाडु को दूसरा और तीसरा स्थान आया है। समारोह में जल संसाधन प्रबंधन कार्य को लेकर 11 विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार दिए गए। अधिकारियों के मुताबिक पहला राष्ट्रीय जल पुरस्कार 2018 में जल शक्ति मंत्रालय ने रखा था। राष्ट्रीय जल पुरस्कार के लिए अधिकारियों ने कबीट खेड़ी एसटीपी प्लांट का निरीक्षण किया था। यहां सीवेज का पानी नाले में रोका गया। इसके लिए पूरे शहर में नाला टेपिंग की गई। सीवेज के पानी को एसटीपी से ट्रीटमेंट किया गया। प्रतिदिन 315 एमएलडी सीवेज जल शोधन करने की क्षमता है। तालाबों के अतिक्रमण को हटाने में भी जिले ने दावेदारी की थी। अफसरों ने कनाड़िया स्थित तालाब का दौरा किया था। इमारतों की छतों पर वर्षा जल संचयन कार्यों को सराहा गया। वाटर हार्वेस्टिंग से भूजल स्तर को रिचार्ज करने में काफी मदद मिली। इसके चलते अलग-अलग क्षेत्रों में जल स्तर बढ़ा है। अधिकारियों ने कई निजी मकानों में बनाए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का भी निरीक्षण किया गया था। गंभीर नदी के प्रवाह पर जल वृद्धि कार्य को देखने भी अधिकारी पहुंचे थे। भगोरा गांव में चेक डैम, फार्म तालाब, रिचार्ज शाफ्ट, नाला ट्रेंचिंग आदि जैसे विभिन्न कार्यों का निरीक्षण किया। इसके अलावा गंभीर और चोरल नदी किनारों से भी अतिक्रमण हटाया गया।
दोबारा उपयोग के योग्य बनाया पानी
इंदौर ने जल संरक्षण में कुछ ऐसे कार्य किए जिसके चलते यह पुरस्कार इंदौर को मिला है। प्रमुख रूप से नगर निगम ने शहर के लगभग पूरे सीवेज के पानी का शोधन किया। पानी को दोबारा उपयोग योग्य बनाया। शहरी क्षेत्र में तालाबों का अतिक्रमण हटाकर गहरीकरण किया। ग्रामीण क्षेत्रों में छोटी नदियों जैसे गंभीर, चोरल, कारम सहित कई नदियों पर चेक डैम का निर्माण किया। बांध बनाए। 100 ग्रामीण तालाबों को गहरा करने का अभियान प्रत्येक वर्ष 5 वर्ष तक जनभागीदारी से किया जाता है। तालाबों में बिना किसी सरकारी खर्च के जलजमाव बढ़ जाता है। तालाबों की मिट्टी का उपयोग किसान अपने खेतों में कर रहे हैं। जिले में सामुदायिक और निजी भूमि पर पौधारोपण किया गया। शहरी क्षेत्रों में 16000 निजी भवनों और ग्रामीण क्षेत्रों में 1400 सरकारी भवनों पर छत वर्षा जल संचयन का प्रभावी कार्य किया गया है।
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कंटूर ट्रेंचिंग, गली प्लग, रिचार्ज शाफ्ट आदि वाटरशेड विकास। नगरीय एवं औद्योगिक जिला होने के कारण भूमि की कम उपलब्धता के कारण नालों की पूरी लंबाई में खाई खोदकर जलभराव एवं पुनर्भरण किया।
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दरअसल केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने शुक्रवार को राष्ट्रीय जल पुरस्कार 2020 की घोषणा की, जिसमें वेस्ट जोन में इंदौर पहले स्थान पर आया है। जहां तालाब किनारे से अतिक्रमण हटाने, गहरीकरण, सीवेज का शुद्धिकरण, वाटर हार्वेस्टिंग क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ कार्य करना पाया गया है। सर्वश्रेष्ठ राज्य श्रेणी में उत्तर प्रदेश को प्रथम पुरस्कार मिला। जबकि राजस्थान और तमिलनाडु को दूसरा और तीसरा स्थान आया है। समारोह में जल संसाधन प्रबंधन कार्य को लेकर 11 विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार दिए गए। अधिकारियों के मुताबिक पहला राष्ट्रीय जल पुरस्कार 2018 में जल शक्ति मंत्रालय ने रखा था। राष्ट्रीय जल पुरस्कार के लिए अधिकारियों ने कबीट खेड़ी एसटीपी प्लांट का निरीक्षण किया था। यहां सीवेज का पानी नाले में रोका गया। इसके लिए पूरे शहर में नाला टेपिंग की गई। सीवेज के पानी को एसटीपी से ट्रीटमेंट किया गया। प्रतिदिन 315 एमएलडी सीवेज जल शोधन करने की क्षमता है। तालाबों के अतिक्रमण को हटाने में भी जिले ने दावेदारी की थी। अफसरों ने कनाड़िया स्थित तालाब का दौरा किया था। इमारतों की छतों पर वर्षा जल संचयन कार्यों को सराहा गया। वाटर हार्वेस्टिंग से भूजल स्तर को रिचार्ज करने में काफी मदद मिली। इसके चलते अलग-अलग क्षेत्रों में जल स्तर बढ़ा है। अधिकारियों ने कई निजी मकानों में बनाए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का भी निरीक्षण किया गया था। गंभीर नदी के प्रवाह पर जल वृद्धि कार्य को देखने भी अधिकारी पहुंचे थे। भगोरा गांव में चेक डैम, फार्म तालाब, रिचार्ज शाफ्ट, नाला ट्रेंचिंग आदि जैसे विभिन्न कार्यों का निरीक्षण किया। इसके अलावा गंभीर और चोरल नदी किनारों से भी अतिक्रमण हटाया गया।
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दोबारा उपयोग के योग्य बनाया पानी
इंदौर ने जल संरक्षण में कुछ ऐसे कार्य किए जिसके चलते यह पुरस्कार इंदौर को मिला है। प्रमुख रूप से नगर निगम ने शहर के लगभग पूरे सीवेज के पानी का शोधन किया। पानी को दोबारा उपयोग योग्य बनाया। शहरी क्षेत्र में तालाबों का अतिक्रमण हटाकर गहरीकरण किया। ग्रामीण क्षेत्रों में छोटी नदियों जैसे गंभीर, चोरल, कारम सहित कई नदियों पर चेक डैम का निर्माण किया। बांध बनाए। 100 ग्रामीण तालाबों को गहरा करने का अभियान प्रत्येक वर्ष 5 वर्ष तक जनभागीदारी से किया जाता है। तालाबों में बिना किसी सरकारी खर्च के जलजमाव बढ़ जाता है। तालाबों की मिट्टी का उपयोग किसान अपने खेतों में कर रहे हैं। जिले में सामुदायिक और निजी भूमि पर पौधारोपण किया गया। शहरी क्षेत्रों में 16000 निजी भवनों और ग्रामीण क्षेत्रों में 1400 सरकारी भवनों पर छत वर्षा जल संचयन का प्रभावी कार्य किया गया है।
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कंटूर ट्रेंचिंग, गली प्लग, रिचार्ज शाफ्ट आदि वाटरशेड विकास। नगरीय एवं औद्योगिक जिला होने के कारण भूमि की कम उपलब्धता के कारण नालों की पूरी लंबाई में खाई खोदकर जलभराव एवं पुनर्भरण किया।
