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इस खूनी खेल में गई कई जान, फिर भी प्रेम के लिए ये खतरनाक परंपरा जारी

Mon, 10 Sep 2018 02:58 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Updated Mon, 10 Sep 2018 02:58 PM IST
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madhya pradesh gotmar mela in padurna started, lost many lives in this tradittion 

मध्यप्रदेश के पांढुर्ना में कई सालों से चली आ रही एक खतरनाक परंपरा का आज से शुरू हो रही है। इस परंपरा का नाम है गोटमार, जिसमें दो गांव के लोग एक दूसरे पर पत्थर बरसाते हैं। गोटमार खेल की परंपरा निभाने के लिए पोला पर्व के दूसरे दिन जाम नदी के तट पर दो गांव के लोग एक दूसरे पर पत्थर बरसाएंगे। ये एक जान लेवा परंपरा है जिसमें अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है। इस परंपरा के चलते कई लोग बुरी तरह घायल भी हो चुके हैं जिनमें कई लोगों की आखें फूट चुकी हैं। इस के बाद भी ये परंपरा लगातार जीरी है। 

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इस बार भी प्रशासन ने मेला परिसर में घायलों के लिए चार अस्थाई अस्पताल बनाएं हैं। ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर अशांक भगत ने बताया कि 20-20 सदस्यों की पांच टीमें बनाकर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होती रहेंगी। चारों अस्थाई अस्पतालों में चार टीमें और एक रिजर्व टीम रहेगी। इसके अलावा 12 चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम सिविल अस्पताल में तैनात रहेगी। जरूरी उपचार के लिए 12 एम्बुलेंस लगाई गई हैं। इसमें आठ छोटी और चार बड़ी एम्बुलेंस घायलों के उपचार में मदद करेगीं। 
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इस तरह होती है परंपरा की शुरूआत

गोटमार खेल के दिन सुबह सांवरगांव पक्ष के लोग कावले परिवार के घर से झण्डा लाकर जाम नदी के बीच लगा देते हैं। इसके बाद दिनभर पांढुर्ना पक्ष के लोग इसे तोडऩे का प्रयास करते हैं। सांवरगांव पक्ष के लोग इसे तोडऩे से रोकते हैं। पहले ये परंपसा देर रात तक चलती थी पर प्रशासन के समझाने के बाद अब सूरज ढलने के बाद दोनों पक्ष झण्डा निकालकर चंडी माता के मंदिर में अर्पित करते हैं। इसके बाद माता चंडी की पूजा-अर्चना कर प्रसाद बांटा जाता है।
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इतिहास है बहुत पुराना

इस मेले के आयोजन के इतिहास के बारे में कहा जाता है कि सावरगांव की एक आदिवासी कन्या को पांढुरना के किसी लड़के से प्रेम हो गया था। दोनों ने चोरी छिपे प्रेम विवाह कर लिया। पांढुरना का लड़का साथियों के साथ सावरगांव जाकर लड़की को भगाकर अपने साथ ले जा रहा था। उस समय जाम नदी पर पुल नहीं था। 


नदी में गर्दन भर पानी रहता था, जिसे तैरकर या किसी की पीठ पर बैठकर पार किया जा सकता था और जब लड़का लड़की को लेकर नदी से जा रहा था तब सावरगांव के लोगों को पता चला और उन्होंने लड़के व उसके साथियों पर पत्थरों से हमला शुरू किया। जानकारी मिलने पर पहुंचे पांढुरना पक्ष के लोगों ने भी जवाब में पथराव शुरू कर दी। पांढुरना पक्ष एवं सावरगांव पक्ष के बीच इस पत्थरों की बौछारों से इन दोनों प्रेमियों की मृत्यु जाम नदी के बीच ही हो गई। जिसके बाद से इस मेले का आयोजन होता है।

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