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मध्य प्रदेश: होमगार्ड जवानों के लिए खुशखबरी, नहीं होंगे अब कॉल ऑफ; सरकार ने हाईकोर्ट में दी जानकारी
Fri, 17 Dec 2021 05:49 PM IST
रवींद्र भजनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Fri, 17 Dec 2021 05:49 PM IST
सार
मध्य प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट में कहा है कि वह होमगार्ड जवानों को ड्यूटी से कॉल ऑफ नहीं करेगी। जिन्हें दो माह के अवैतनिक अवकाश (कॉल ऑफ) पर भेजा गया है, उन्हें भी इन दो माह का वेतन दिया जाएगा।
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश होमगार्ड के जवानों के लिए खुशखबरी आई है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि होमगार्ड जवानों को दो महीने के लिए ड्यूटी से कॉल ऑफ नहीं किया जाएगा। जिन्हें कॉल ऑफ किया गया है, उन्हें दो महीने का वेतन दिया जाएगा।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेश होने के बाद भी राज्य सरकार ने इस संबंध में प्रावधान नहीं किया है। दिसंबर में ही एक साल के बजाय तीन साल में दो महीने के लिए कॉल ऑफ का नियम लागू किया गया है। इसके खिलाफ याचिकाकर्ता शिवनारायण मिश्रा एवं अन्य 11 ने अवमानना याचिका दायर की है। इस पर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ और जस्टिस विजय शुक्ला की बेंच ने शुक्रवार को सुनवाई की। इस दौरान राज्य सरकार ने कहा कि वह कॉल ऑफ का नियम वापस ले रही है।
क्या है मामला
होमगार्ड जवानों के ड्यूटी के नियमों में बदलाव की मांग के साथ होमगार्ड एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर हाईकोर्ट ने होमगार्ड जवानों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को ड्यूटी नियम बदलने के आदेश दिए थे। इसके खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के आदेश को जस का तस रखा था। इसके बाद होमगार्ड जवानों के लिए प्रदेश सरकार ने नये ड्यूटी नियम तय किए थे। नए ड्यूटी नियमों में भी पहले की ही तरह एक साल में दो माह के लिए ड्यूटी से कॉल ऑफ का प्रावधान रखा गया था। इसका मतलब है कि होमगार्ड जवानों को साल में से 2 महीने अवैतनिक अवकाश पर भेज दिया जाता है। इसे ही कॉल ऑफ कहते हैं। हाईकोर्ट ने स्थगन दिया था। इसके बाद भी मई 2020 में होमगार्ड जवानों को दो महीने के लिए ड्यूटी से कॉल ऑफ करने के आदेश जारी हो गए। इसे लेकर अवमानना याचिका दायर हुई थी। सरकार की ओर से स्पष्टीकरण आने के बाद बेंच ने याचिका का निराकरण कर दिया। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता विकास महावर ने पैरवी की।
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दरअसल, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेश होने के बाद भी राज्य सरकार ने इस संबंध में प्रावधान नहीं किया है। दिसंबर में ही एक साल के बजाय तीन साल में दो महीने के लिए कॉल ऑफ का नियम लागू किया गया है। इसके खिलाफ याचिकाकर्ता शिवनारायण मिश्रा एवं अन्य 11 ने अवमानना याचिका दायर की है। इस पर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ और जस्टिस विजय शुक्ला की बेंच ने शुक्रवार को सुनवाई की। इस दौरान राज्य सरकार ने कहा कि वह कॉल ऑफ का नियम वापस ले रही है।
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क्या है मामला
होमगार्ड जवानों के ड्यूटी के नियमों में बदलाव की मांग के साथ होमगार्ड एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर हाईकोर्ट ने होमगार्ड जवानों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को ड्यूटी नियम बदलने के आदेश दिए थे। इसके खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के आदेश को जस का तस रखा था। इसके बाद होमगार्ड जवानों के लिए प्रदेश सरकार ने नये ड्यूटी नियम तय किए थे। नए ड्यूटी नियमों में भी पहले की ही तरह एक साल में दो माह के लिए ड्यूटी से कॉल ऑफ का प्रावधान रखा गया था। इसका मतलब है कि होमगार्ड जवानों को साल में से 2 महीने अवैतनिक अवकाश पर भेज दिया जाता है। इसे ही कॉल ऑफ कहते हैं। हाईकोर्ट ने स्थगन दिया था। इसके बाद भी मई 2020 में होमगार्ड जवानों को दो महीने के लिए ड्यूटी से कॉल ऑफ करने के आदेश जारी हो गए। इसे लेकर अवमानना याचिका दायर हुई थी। सरकार की ओर से स्पष्टीकरण आने के बाद बेंच ने याचिका का निराकरण कर दिया। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता विकास महावर ने पैरवी की।
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