{"_id":"621cde6103eeb53211729318","slug":"madhya-pradesh-cbi-court-sentences-six-convicts-to-five-year-imprisonment-in-pmt-fraud","type":"story","status":"publish","title_hn":"मध्य प्रदेश: पीएमटी फर्जीवाड़े में सीबीआई कोर्ट ने छह दोषियों को पांच-पांच साल के कारावास की सजा सुनाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मध्य प्रदेश: पीएमटी फर्जीवाड़े में सीबीआई कोर्ट ने छह दोषियों को पांच-पांच साल के कारावास की सजा सुनाई
Mon, 28 Feb 2022 08:08 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Mon, 28 Feb 2022 08:08 PM IST
सार
मध्य प्रदेश के पीएमटी फर्जीवाड़े में सीबीआई की विशेष कोर्ट ने छह आरोपियों को पांच-पांच साल की सजा सुनाई है। साथ ही अर्थदंड भी लगाया गया है। सजा पाने वालों में साल्वर, छात्र व दलाल शामिल हैं। कोर्ट ने सभी को जेल भेज दिया है।
विज्ञापन
सांकेतिक फोटो
- फोटो : Social Media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सीबीआई के अधिवक्ता चंद्रपाल ने बताया कि मामला गुना कैंट थाने में 2010 का है। व्यापमं ने 20 जून 2010 को पीएमटी ली थी। गुना के पीजी कालेज में भी सेंटर था। पीएमटी की प्रवेश परीक्षा में परवेज आलम और अवधेश कुमार फर्जी परीक्षार्थी बनकर राजेश बघेल और प्रदीप उपाध्याय के स्थान पर शामिल हो रहे थे। परीक्षार्थियों को फोटो मिसमैच और सिग्नेचर में मिलान नहीं होने के चलते परीक्षा केंद्र पर पकड़ा गया था। उनसे पूछताछ की गई तो बताया कि दोनों साल्वर के रूप में परीक्षा देने आए हैं। केंद्राध्यक्ष ने दोनों को पुलिस के सुपुर्द कर दिया।
कड़ाई से पूछताछ की गई तो पता चला कि उन्हें उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में रहने वाले हरिनारायण सिंह ने बिचोलिया बनकर संपर्क किया था। जिसके बाद वो गुना सरकारी कालेज परीक्षा देने पहुंचे थे। इसके बदले में उन्हें पैसा मिला है। पुलिस ने अवधेश कुमार से 80 हजार व परवेज से 60 हजार रुपये बरामद किए। इनके पास एटीएम कार्ड भी था। इसके बाद पुलिस ने छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यह केस सीबीआई को स्थानांतरित हो गया। 2017 से सीबीआई ने इस केस की ट्रायल पूरी कराई।
आरोपी हरिनारायण सिंह एवं अवधेश कुमार हमीरपुर के रहने वाले हैं, जबकि परीक्षार्थी राजेश बघेल रतनपुरा आलीराजपुर और प्रदीप उपाध्याय प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। सॉल्वर परवेज मऊ उत्तर प्रदेश का रहने वाला है और दलाल वेदरतन राजपूत गोरखपुर का बताया गया है।
विज्ञापन
2013 परीक्षा के मामलों में अग्रिम जमानत के 6 आवेदन निरस्त
व्यापम मामलों में सुनवाई करते हुए सीबीआई के विशेष न्यायाधीश नीति राज सिंह सिसोदिया ने आवेदक गण के जमानत आवेदन पर विस्तृत बहस सुनने के उपरांत आवेदनों को निरस्त करने का आदेश पारित किया है। विशेष लोक अभियोजक सतीश दिनकर ने बताया कि पीएमटी वर्ष 2013 के मामलों में अनुसंधान के दौरान आवेदकों के विरुद्ध गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं। मेडिकल कॉलेज चिरायु के तत्कालीन चेयरमैन अजय गोयंनका एवं कॉलेज लेबल एडमिशन कमेटी के अन्य सदस्यगण जिनमें डॉक्टर रवि सक्सेना, एसएन सक्सेना, डॉक्टर बीएन भावसार, डॉक्टर वीरेंद्र मोहन आवेदनकर्ता सम्मिलित हैं। उनके द्वारा प्रथम दो एवं दूसरे राउंड की काउंसलिंग में डायरेक्टोरेट ऑफ मेडिकल एजुकेशन को सही जानकारी प्रस्तुत ना कर अनियमितता की है। 30 सितंबर 2013 के पश्चात 42 अपात्र अभ्यार्थियों को मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिया। ऐसी स्थिति में आरोपी गण अग्रिम जमानत के पात्र नहीं हैं।
विज्ञापन
कड़ाई से पूछताछ की गई तो पता चला कि उन्हें उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में रहने वाले हरिनारायण सिंह ने बिचोलिया बनकर संपर्क किया था। जिसके बाद वो गुना सरकारी कालेज परीक्षा देने पहुंचे थे। इसके बदले में उन्हें पैसा मिला है। पुलिस ने अवधेश कुमार से 80 हजार व परवेज से 60 हजार रुपये बरामद किए। इनके पास एटीएम कार्ड भी था। इसके बाद पुलिस ने छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यह केस सीबीआई को स्थानांतरित हो गया। 2017 से सीबीआई ने इस केस की ट्रायल पूरी कराई।
विज्ञापन
आरोपी हरिनारायण सिंह एवं अवधेश कुमार हमीरपुर के रहने वाले हैं, जबकि परीक्षार्थी राजेश बघेल रतनपुरा आलीराजपुर और प्रदीप उपाध्याय प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। सॉल्वर परवेज मऊ उत्तर प्रदेश का रहने वाला है और दलाल वेदरतन राजपूत गोरखपुर का बताया गया है।
विज्ञापन
2013 परीक्षा के मामलों में अग्रिम जमानत के 6 आवेदन निरस्त
व्यापम मामलों में सुनवाई करते हुए सीबीआई के विशेष न्यायाधीश नीति राज सिंह सिसोदिया ने आवेदक गण के जमानत आवेदन पर विस्तृत बहस सुनने के उपरांत आवेदनों को निरस्त करने का आदेश पारित किया है। विशेष लोक अभियोजक सतीश दिनकर ने बताया कि पीएमटी वर्ष 2013 के मामलों में अनुसंधान के दौरान आवेदकों के विरुद्ध गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं। मेडिकल कॉलेज चिरायु के तत्कालीन चेयरमैन अजय गोयंनका एवं कॉलेज लेबल एडमिशन कमेटी के अन्य सदस्यगण जिनमें डॉक्टर रवि सक्सेना, एसएन सक्सेना, डॉक्टर बीएन भावसार, डॉक्टर वीरेंद्र मोहन आवेदनकर्ता सम्मिलित हैं। उनके द्वारा प्रथम दो एवं दूसरे राउंड की काउंसलिंग में डायरेक्टोरेट ऑफ मेडिकल एजुकेशन को सही जानकारी प्रस्तुत ना कर अनियमितता की है। 30 सितंबर 2013 के पश्चात 42 अपात्र अभ्यार्थियों को मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिया। ऐसी स्थिति में आरोपी गण अग्रिम जमानत के पात्र नहीं हैं।
