{"_id":"615cc71e8ebc3e4aff130b60","slug":"madhya-pradesh-cabinet-approves-land-exchange-scheme-for-atal-expressway-under-bharatmala-project","type":"story","status":"publish","title_hn":"भारतमाला परियोजना: अटल एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहित जमीन के बदले मिलेगी जमीन, कैबिनेट ने दी मंजूरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भारतमाला परियोजना: अटल एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहित जमीन के बदले मिलेगी जमीन, कैबिनेट ने दी मंजूरी
Wed, 06 Oct 2021 03:13 AM IST
Kuldeep Singh
पीटीआई, भोपाल
पीटीआई, भोपाल
Published by: Kuldeep Singh
Updated Wed, 06 Oct 2021 03:13 AM IST
सार
मंगलवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की वर्चुअल बैठक हुई। जिसमें निर्णय लिया गया कि अटल पथ के निर्माण से प्रभावित लोगों को निजी जमीन के बदले सरकारी जमीन दी जाएगी। प्रस्तावित अटल प्रगति पथ मध्यप्रदेश के श्योपुर, मुरैना और भिंड जिलों से होकर गुजरेगा।
विज्ञापन
शिवराज सिंह चौहान
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल ने भारतमाला परियोजना के तहत क्रियान्वित की जा रही एक्सप्रेस-वे परियोजना 313 किलोमीटर लंबे अटल प्रगति पथ के लिए अधिग्रहित की जा रही निजी जमीन के बदले सरकारी जमीन देने के प्रस्ताव को मंगलवार को मंजूरी दे दी है।
विज्ञापन
मध्यप्रदेश सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि मंगलवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की वर्चुअल बैठक हुई। जिसमें निर्णय लिया गया कि अटल पथ के निर्माण से प्रभावित लोगों को निजी जमीन के बदले सरकारी जमीन दी जाएगी।
विज्ञापन
इसके अनुसार, प्रभावित मालिकों को दी जाने वाली सरकारी जमीन निजी जमीन की कीमत से दोगुनी होगी। इसी तरह अधिग्रहीत संपत्तियों (भवन) का दोगुना मूल्य उसके मालिकों को दिया जाएगा।
विज्ञापन
यह प्रस्तावित अटल प्रगति पथ मध्यप्रदेश के श्योपुर, मुरैना और भिंड जिलों से होकर गुजरेगा। यह परियोजना केंद्र की भारतमाला परियोजना में शामिल है। राज्य सरकार इस परियोजना के लिए भूमि निःशुल्क उपलब्ध करा रही है।
तीनों जिलों में कुल 1,300 हेक्टेयर निजी भूमि, 1,523 हेक्टेयर सरकारी भूमि और 270 हेक्टेयर वन भूमि की आवश्यकता होगी। आवश्यक भूमि के कुल 3093 हेक्टेयर में से 1,523 हेक्टेयर भूमि पहले ही सितंबर 2020 में केंद्र को हस्तांतरित कर दी गई थी।
बयान में कहा गया है कि कुल 270 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन की प्रक्रिया चल रही है। इस परियोजना के लिए सारी जमीन सौंपने का काम दिसंबर 2021 तक पूरा किया जाना है।
