फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Madhya Pradesh Assembly Election : Malwa-Nimar is kingmaker in state

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव : मालवा-निमाड़ है प्रदेश का ‘किंगमेकर’

Mon, 19 Nov 2018 03:52 AM IST
राजेश चतुर्वेदी, भोपाल
राजेश चतुर्वेदी, भोपाल Updated Mon, 19 Nov 2018 03:52 AM IST
विज्ञापन
Madhya Pradesh Assembly Election : Malwa-Nimar is kingmaker in state

पिछले तीन चुनावों से मध्यप्रदेश में सरकार बनाने का रास्ता मालवा-निमाड़ से होकर जाने लगा है। वर्ष 2000 तक यह भूमिका छत्तीसगढ़ के पास थी। मतलब जिस पार्टी को छत्तीसगढ़ में सफलता मिलती थी, भोपाल के वल्लभ भवन में उसका राज होता था। जब से छत्तीसगढ़ पृथक राज्य बना है, मालवा-निमाड़ मध्यप्रदेश का एक तरह से ‘किंगमेकर’ है। जिस पार्टी को यहां कामयाबी हासिल होती है, उसी का राजतिलक होता है।

विज्ञापन


मालवा-निमाड़ में 66 विधानसभा सीटें हैं। 2013 के चुनाव में 57 भाजपा के पास थीं और सिर्फ 9 कांग्रेस के पास। सीटों का यही अंतर सत्तारूढ़ भाजपा की सबसे बड़ी ताकत रहा है। अभी से नहीं, शुरू से। अपने बुरे दिनों में भी भाजपा यदि कहीं जमी रही तो इसी इलाके में। लिहाजा भाजपा और कांग्रेस, दोनों की ही निगाहें मालवा-निमाड़ पर हैं। दोनों ही दल अपनी-अपनी ताकत का बड़ा भाग इस इलाके में झोंक रहे हैं। 

विज्ञापन

राहुल गांधी इंदौर में रोड शो कर चुके हैं, किसान गोलीकांड की बरसी पर मंदसौर जा चुके हैं और प्रधानमंत्री मोदी ने भी रविवार को इंदौर में चुनावी सभा की। छह माह के भीतर उनका यह तीसरा दौरा था। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी पार्टी के अभियान की शुरूआत मालवा से की। मालवा-निमाड़ में उनकी सभाएं हो चुकी हैं। कांग्रेस भी पी. चिदंबरम, आनंद शर्मा जैसे बड़े नेताओं को भेज चुकी है।

राजनीतिक प्रेक्षक मानते हैं कि भाजपा के लिए इस बार मालवा-निमाड़ में नतीजा दोहरा पाना आसान नहीं है। इसका बड़ा कारण किसान, जीएसटी और नोटबंदी है। मंदसौर गोलीकांड में पांच किसानों की मौत के बाद से किसान नाराज हैं। उन्हें जो दाम चाहिए, वो नहीं मिल रहा है। कांग्रेस ने किसानों के 2 लाख तक के कर्ज माफ़ करने का वादा कर उन्हें अपनी तरफ लाने की कोशिश की है। 

भाजपा ने अधिकांश पुराने चेहरे चुनाव मैदान में उतारे हैं। कुछ स्थानों पर बागी भी डटे हुए हैं। भाजपा के ही लोग आरोप लगाते हैं कि 57 विधायकों के बावजूद मालवा-निमाड़ की राजनीतिक रूप से उपेक्षा की गई। इंदौर, धार, शाजापुर, झाबुआ, रतलाम, मंदसौर, नीमच, और अलीराजपुर को शिवराज मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। 

15 साल से लगातार सरकार के कारण एंटी इनकंबेंसी का बोझ भी भाजपा के साथ है। पर आरएसएस की ताकत ने पार्टी को आश्वस्त कर रखा है। वह मानकर चल रही है कि आंकड़ों में बड़ा फेरबदल नहीं होगा। उधर, कांग्रेस भी कुछ जगहों पर बागी चेहरों से जूझ रही है। उसे उम्मीद है कि एंटी इनकंबेंसी से उसे लाभ होगा। आदिवासी संगठन ‘जयस’ को चुनाव मैदान से दूर करके भी वह खुद को प्लस मान रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed