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मध्यप्रदेश के चुनावी मैदान में बयानों का बवंडर, इधर जुबान फिसली उधर हमला तैयार

Fri, 16 Nov 2018 03:03 PM IST
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 16 Nov 2018 03:03 PM IST
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Madhya Pradesh Assembly Election 2018: Kamalnath statements shivraj attacks
कमलनाथ के बयान से आया तूफान
चुनाव हों और बयान न हों तो शायद लगेगा ही नहीं कि चुनाव हैं। चुनाव हों और बयानों को अपने हिसाब से तोड़ा-मरोड़ा न जाए तो भी लगेगा कि चुनाव हो ही नहीं रहे। मध्यप्रदेश में बयानों के तीर खूब उड़ रहे हैं। कोई घायल कर रहा है तो कोई हो रहा है तो कोई बता रहा है कि भैया, तीर खाली चला गया। 
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ताजा विवाद उठा है, कमलनाथ के बयान से। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने टिकट बंटवारे को लेकर कहा, "हमने जो जीतने वाली महिलाएं थीं, उनको टिकट दिया है। केवल कोटा और सजावट के लिए हम उस रास्ते में नहीं गए।" 
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दरअसल, कमलनाथ से सवाल पूछा गया था कि महिलाओं की भागीदारी की बात करने वाली पार्टी ने 230 विधानसभा सीटों पर महज 25 महिलाओं को टिकट क्यों दिया है। लेकिन जवाब में कमलनाथ की जुबां से जो फूटा, उससे चुनावी मैदान में बहुत कुछ फट पड़ा। 
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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से लेकर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने हल्ला बोल दिया। भाजपा को जैसे मुंहमांगी मुराद मिल गई। शिवराज ने एक चुनावी सभा में बयान पर पलटवार करते हुए कहा, "मुझे कमलनाथजी की बात पर आश्चर्य और दुख हुआ है। ये वो भूमि है जहां माताओं, बहनों, बेटियों को पूजा जाता है। द्रौपदी का अपमान हुआ करने वाले का वंश का विनाश हो गया था। महिलाएं सजावट का सामान नहीं हैं।"

स्मृति ईरानी ने कहा कि ये महिला सशक्तीकरण के प्रति कांग्रेस के दृष्टिकोण को बताता है।

'सजावट' का सच है क्या?

सारा बवाल इस सजावट शब्द और इसके मायने को लेकर है। कमलनाथ ने सफाई दी है कि उनका कहने का मतलब था कि कोई टिकट महज कोटा पूरा करने या सजावट के लिए नहीं होता। जिन महिलाओं का जनाधार था, उन्हें दिया गया है। शोभा ओजा तुरंत उनके समर्थन में कूदीं और कहा, "सजावट के लिए कहा, जो एक मुहावरा है यानी नाम के लिए। इसमें 'सामान' शब्द भाजपा ने लगाया। भाजपा झूठ बोलने में मास्टर है।"

लड़ाई चुनावी है तो जाहिर है किसी भाषाविद् की जरूरत भी नहीं समझी गई! जिसको सजावट में अपने भाषण की सजावट ढूंढ़नी थी, उसने ढूंढ़ ली। वैसे अंग्रेजी में बड़ा ही आम चलन है- For Decorative purpose only। यानी सिर्फ सजावट के तौर पर। जैसे किसी खिड़की पर पड़े पर्दे जिन्हें न खोल सकते हैं, न बंद कर सकते हैं, वो वहां सिर्फ सजावट के लिए मौजूद हों। या टेबल पर रखे सजावटी फल, जिन्हें खाया नहीं जा सकता। 

बयानों के वजन से डोलता जीत का तराजू

लेकिन, जब जंग चुनावी हो और एक-एक बयान की मापतौल से जीत के तराजू का झुकाव तय होता हो तो सावधानी बरतना जरूरी हो जाता है। अब कमलनाथ के बयान का असल मतलब क्या था, वो तो वही जानें लेकिन उनके एक बयान ने भाजपा को सौगात तो दे ही दी है। मामला सजावट से निकलकर पांडव और कौरव तक जा पहुंचा है। शिवराज सिंह चौहान ने इस बयान को लेकर कांग्रेस नेताओं को कौरवों की सेना करार दे दिया है। इससे पहले कमलनाथ अपने संघ वाले बयान पर भी खूब घेरे गए।

इससे पहले गुना के बूढ़े बालाजी क्षेत्र में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शिवराज सिंह चौहान पर हमला करते हुए कहा, "एक मामा कंस थे, दूसरे शकुनि और कलयुग में तीसरे मामा बल्लभ भवन में बैठे हैं।"

उधर, छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी ने शशि थरूर के बयान पर सीधा हमला बोला। शशि थरूर ने हाल ही में कहा था कि पंडित नेहरू की वजह से ही मोदी, प्रधानमंत्री बन सके क्योंकि उन्होंने ऐसा संस्थागत ढांचा खड़ा किया था जिसमें कोई भी इस उच्च पद पर पहुंच सके। मोदी ने इसका जिक्र करते हुए कहा, "अगर आपके भीतर लोकतंत्र की इतनी ही परंपरा है तो एक बार बस पांच साल के लिए गांधी परिवार के बाहर किसी व्यक्ति को पार्टी अध्यक्ष बना दें।"


अभी तो 10 दिन बाकी हैं। 10 ऐसे दिन जिनमें प्रधानमंत्री मोदी से लेकर राहुल गांधी तक मध्यप्रदेश में कई सभाएं करेंगे। यानी, तैयार रहिए कुछ और बयानों के लिए, बयानों के कुछ और मायनों के लिए, कुछ और चुनावी टक्करों के लिए।
 
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