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मध्यप्रदेश चुनाव 2018: केंद्र की नीतियों के कारण जबलपुर में शिवराज के समर्थक बन गए विरोधी

Sat, 03 Nov 2018 09:50 AM IST
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Updated Sat, 03 Nov 2018 09:50 AM IST
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Madhya Pradesh assembly election 2018: electoral issues of people of Jabalpur
अमर उजाला चुनाव रथ जबलपुर में - फोटो : Amar Ujala
मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए 28 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। अमर उजाला आपको बता रहा है मध्यप्रदेश के जमीनी हालात और उन विषयों के बारे में जो इस बार चुनावी मुद्दे हैं। इसी के मद्देनजर अमर उजाला का चुनाव रथ पहुंचा जबलपुर। संवाददाता वैभव कुमार ने आम जनता और सियासी दलों से बात करके यहां मूड जानने की कोशिश की। 
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उन्होंने जाना कि आखिर जनता क्या चाहती है? उनके चुने हुए नेता उनकी उम्मीदों पर कितने खरे उतरे हैं? साथ ही यह भी जाना की जनता इस बार के चुनाव में किसे मौका देने का मन रखती है। टी वैली प्रायोजित अमर उजाला के खास लाइव कार्यक्रम सत्ता के सेमीफाइनल में जानिए कि जबलपुर इस बार किन मुद्दों पर वोट करने वाला है। 
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जबलपुर में लोगों में असंतोष की भावना है। केंद्र सरकार की नीतियों की वजह से इस बार यहां बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। 

स्थानीय लोगों ने कहा कि प्रत्याशी चुनकर चला जाता है, जनता परेशान रहती है। एक व्यक्ति ने कहा, "सबके मन में एक असंतोष है, शहर में इतने बड़े बड़े पदों पर लोग बैठे है, शहर में महामारी फैली, लेकिन कोई जागरूकता नहीं दिखी, कोई एक्टिव नहीं दिखा।" 
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एक अन्य शख्स ने कहा कि जब चुनाव आता है नेता जाग जाते हैं। आजादी के बाद से आज तक सड़क, बिजली, पानी, पर ही चुनाव लड़ते आए हैं। 

लेकिन जबलपुर की समस्या की बात करें तो जो समस्या राष्ट्रीय स्तर पर है वहीं राज्य स्तर पर है। जो वादे किए गए पूरे नहीं किए गए। 

उन्होंने कहा कि जबलपुर में सड़कों की हालत बहुत खराब है। स्वास्थ्य मंत्री जबलपुर से हैं। यहां महामारी फैली, जरा सी सक्रियता दिखाते, तो महामारी रूक जाती। लेकिन लापरवाही की गई। पानी की समस्या बहुत हद तक ठीक हुई है, लेकिन संतोषजनक नहीं है।

शिक्षा के क्षेत्र में बहुत काम किए जाने की जरूरत है। एजुकेशन बोर्ड के जो वादे किए थे, वो अपने लक्ष्य से बहुत पीछे हैं। 

लोगों ने कहा कि इस बार के चुनाव में दो तरह की हताशा है। शिवराज सरकार जैसा काम कर रही थी वो तो चल रही थी। शिवराज सिंह की एक धारा चल रही थी। लेकिन मोदी जी की नीतियों से बहुत से लोग डिसटर्ब हुए हैं। बहुत से लोग भाजपा के विरोध में आ गए हैं। समीकरण बदले नजर आएंगे। कुछ बदलाव आएगा। कम से कम विपक्ष तो मजबूत बनेगा।


युवाओं का कहना है कि रोजगार की स्थिति बहुत खराब है। हर काम ठेके पर दिए जाने से पूरा सिस्टम खराब हो गया है। मेहनत से किए गए काम का पूरा पेमेंट नहीं मिलता है। युवाओं ने मांग की कि कम से कम संविदा में रखा जाए या नौकरियों को नियमित किया जाना चाहिए। 
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