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मध्यप्रदेश चुनाव 2018: चौथी बार सत्ता पाने के लिए भाजपा ले रही ‘परिवारवाद’ का सहारा?

Fri, 09 Nov 2018 04:20 PM IST
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Updated Fri, 09 Nov 2018 04:20 PM IST
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Madhya pradesh assembly election 2018: BJP promoting dynasty politics to win shivraj singh chauhan
शिवराज सिंह चौहान-अमित शाह
परिवारवाद के खिलाफ कड़ा रूख अपनाने वाली भाजपा इस बार के विधानसभा चुनाव में खुद परिवारवाद के चक्रव्यूह में फंसती नजर आ रही है। चौथी बार सत्ता में वापसी के लिए पार्टी इस बार परिवारवाद का सहारा लेने से भी परहेज नहीं कर रही। इसी कड़ी में पार्टी ने उम्मीदवारों के ‘जीत दर्ज करने की क्षमता’ को भी भुला दिया है। 
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टिकट बंटवारे को लेकर पहले से ही विरोध का सामना कर रही पार्टी के लिए परिवारवाद के मुद्दे पर जवाब देते नहीं बन रहा। अब तक भाजपा ने करीब 10 ऐसे प्रत्याशियों को टिकट दिया है, जो किसी न किसी नेता के परिवार से आते हैं। 
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176 उम्मीदवारों की पहली सूची में ही परिवारवाद की झलक दिख गई थी जब पार्टी ने गौरी शंकर शेजवार के बेटे मुदित शेजवार को सांची से टिकट दिया था। गौरी शंकर शेजवार ने पार्टी से इस बार चुनाव नहीं लड़ने की इच्छा जाहिर करते हुए नई पीढ़ी को मौका दिए जाने का अनुरोध किया था। 
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इसी तरह मंत्री हर्ष सिंह के बेटे विक्रम सिंह को सतना जिले के रामपुर बघेलान से टिकट दिया गया है। हर्ष सिंह ने स्वास्थ्य कारणों की वजह से सक्रिय राजनीति से निवृति की बात कही थी। इसी तरह राकेश प्रजापति को उनके पिता की जगह छतरपुर के चंदला (एससी), सांसद लक्ष्मी नारायण यादव के बेटे सुधीर यादव को और सुरखी से पिछला चुनाव महज 141 वोटों से जीतने वाली वर्तमान विधायक पारुल यादव की जगह उनके बेटे सचिन यादव को उम्मीदवार बनाया गया है। 

टीकमगढ जिले में भाजपा ने पूर्व मंत्री अखंड प्रताप सिंह के बेटे अभय यादव को पृथ्वीपुर से जबकि खरगापुर से पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के भतीजे राहुल लोधी को उम्मीदवार बनाया है। पिछले विधानसभा चुनाव में राहुल लोधी को कांग्रेस उम्मीदवार चंदा गौर ने इसी सीट पर 5,677 वोटों से हराया था। 

दूसरी और तीसरी सूची में भी परिवारवाद की भरपूर झलक दिखती है। पार्टी ने गोविंदपुरा से पूर्व मुख्यमंत्री और 10 बार से विधायक बाबूलाल गौड़ की बहू कृष्णा गौड़ को टिकट दिया है। दिलचस्प बात ये है कि पार्टी ने पहले इस सीट पर प्रदेश महासचिव वीडी शर्मा का नाम चुना था मगर बाबूलाल गौड़ के निर्दलीय चुनाव लड़ने की धमकी के बाद पार्टी ने अपने कदम पीछे खींच लिए। 

सबसे रोचक स्थिति इंदौर में देखने को मिली जहां लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन और कैलाश विजयवर्गीय के बीच अपने उम्मीदवार को टिकट दिलाने की होड़ लग गई। कैलाश विजयवर्गीय ने आकाश विजयवर्गीय को इंदौर 3 सीट से टिकट देने की मांग की। इस सीट से पिछले चुनाव में उषा ठाकुर विजयी हुई थी। उषा ठाकुर को विजयवर्गीय की सीट महू से टिकट दिया गया।


महू में कार्यकर्ता उन्हें बाहरी उम्मीदवार मान रहें हैं। कुछ ऐसी ही स्थिति उज्जैन जिले के घट्टिया सीट पर भी है जहां पार्टी ने कांग्रेस के पूर्व सांसद पूर्व प्रेमचंद गुड्डू के बेटे अजीत बोरासी को उम्मीदवार बनाया है। 
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