फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Lok Sabha Election 2024: BSP and SP have not yet achieved major success in MP Lok Sabha Election

Election: बसपा-सपा को मप्र में अब तक बड़ी कामयाबी नहीं, इस पार्टी के प्रत्याशी लोकसभा चुनाव जीते, पर यह विफल

Sun, 17 Mar 2024 12:55 PM IST
उदित दीक्षित कमलेश सेन
कमलेश सेन Published by: उदित दीक्षित Updated Sun, 17 Mar 2024 12:55 PM IST
सार

Lok Sabha Election: लोकसभा चुनाव में बसपा और सपा ने मध्य प्रदेश में भी अपना भाग्य आजमाया। बसपा को प्रदेश में कुछ सफलता मिली, लेककि यह क्रम लंबे समय तक नहीं चल पाया। प्रदेश में लोकसभा चुनाव में सपा के हाथ अब तक खाली रहे हैं। 

विज्ञापन
Lok Sabha Election 2024: BSP and SP have not yet achieved major success in MP Lok Sabha Election
प्रदेश में ऐसा रहा बसपा का प्रदर्शन। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश जैसा कि नाम से ही जाहिर है कि देश के मध्य में बसा प्रदेश। इस प्रदेश की सीमा पांच राज्यों से जुड़ी है। उत्तर प्रदेश से प्रदेश के सर्वाधिक 13 जिलों की सीमा छूती है। जाहिर है मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में यूपी का सर्वाधिक प्रभाव है। सीमावर्ती जिले  सांस्कृतिक और राजनैतिक माहौल में उत्तर प्रदेश से सर्वाधिक प्रभावित हैं। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के कमजोर होने के बाद क्षेत्रीय दलों ने अपनी पकड़ मजबूत बनाई। कांसीराम ने बहुजन समाज पार्टी का 14 अप्रैल 1984 को और मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी का 4 अक्तूबर 1992 को गठन किया। 
विज्ञापन


दोनों दलों ने यूपी में सत्ता प्राप्त की और लोकसभा चुनाव में भी अपना प्रभाव बढ़ाया था। मध्य प्रदेश में भी लोकसभा चुनाव में बसपा और सपा ने राजनीति में अपना भाग्य आजमाया। बसपा को कुछ सफलता मिली, परंतु यह क्रम लंबे समय तक नहीं चल पाया। वहीं, सपा के खाते में प्रदेश में लोकसभा चुनाव में अब तक कोई सफलता हासिल नहीं हुई। 
विज्ञापन




1991 में बसपा ने 21 उम्मीदवार उतारे
1989 में प्रदेश के लोकसभा चुनाव में बसपा ने 35 उम्मीदवार चुनाव मैदान में खड़े किए, जिसमें से 32 की जमानत जब्त हो गई थी, उसे राज्य में 4.28 प्रतिशत मत प्राप्त हुए थे। 1991 में बसपा ने 21 उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे थे। यह वर्ष बसपा के लिए सफलता का रहा और रीवा लोकसभा सीट पर बसपा के भीमसिंह पटेल ने कुल डाले गए मतों में से 32.79 प्रतिशत मत प्राप्त कर कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे श्रीनिवास तिवारी को पराजित किया था।  
विज्ञापन
विज्ञापन


पूर्व मुख्यमंत्री सकलेचा को हराया 
1996 के चुनाव में बसपा को प्रदेश में आशातीत सफलता मिली थी। सतना से बसपा के सुखलाल कुशवाह ने 28.37 प्रतिशत मत प्राप्त कर भाजपा के वरिष्ठ नेता और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरेंद्र कुमार सकलेचा को पराजित किया था। रीवा से बसपा के बुद्धसेन पटेल ने 26.91 मत प्राप्त कर भाजपा की प्रवीण कुमारी को पराजित किया था। इस तरह 1996 के चुनाव में बसपा ने दो सीटों पर विजय प्राप्त कर रिकॉर्ड बनाया था।  1998 से 2004 तक हुए तीन लोकसभा चुनाव में बसपा को निराश ही होना पड़ा था, उसे कोई सफलता हासिल नहीं हुई बल्कि प्रदेश में उसे प्राप्त होने वाला मत प्रतिशत भी कम हुआ। 2009 के लोकसभा चुनाव में रीवा से बसपा के देवराज सिंह पटेल ने 28.49 प्रतिशत मत प्राप्त कर भाजपा के मणि चंद्र त्रिपाठी को पराजित कर विजय प्राप्त की थी।

2014 के बाद लगा झटका 
2014 और 2019 में बसपा का मत प्रतिशत भी काफी कम हुआ और उसे कोई सफलता हासिल नहीं हुई, बल्कि 2019 के लोकसभा चुनाव में उसने 25 उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारा था, सबकी जमानत जब्त हो गई थी।  
बहुजन समाजवादी को प्रदेश में हासिल हुई  सफलता देख समाजवादी पार्टी ने भी मध्य प्रदेश की राजनीति में अपना भाग्य आजमाया। 

सपा ने उम्मीदवार उतारे, सबकी जमानत जब्त हुई
1996 के लोकसभा चुनाव में सपा ने 3 उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे। उन्हें प्रदेश में डाले गए मतों में से मात्र 0.8 प्रतिशत मत प्राप्त हुए थे। 1998 से 2019 प्रदेश के चुनाव में सपा ने उम्मीदवार खड़े किए परंतु सभी की जमानत जब्त होती गई। उनके खाते में प्रदेश से कोई सफलता हासिल नहीं हुई। बसपा को जो प्रदेश में सफलता हासिल हुई, वह यूपी की सीमा से जुड़े क्षेत्रों में ही हासिल हुई। जाहिर है कि उन क्षेत्रों में यूपी का प्रभाव था।  

2024 के लोकसभा चुनाव में भी सपा और बसपा निश्चित ही प्रदेश में उम्मीदवार खड़े करेगी। लेकिन, देखना यह है कि उन्हें कितनी सफलता हासिल होती है।   

एक रोचक जानकारी भी 
प्रदेश के पहले चुनाव 1951-52 में मध्य भारत, मध्य प्रदेश, विंध्य प्रदेश, बिलासपुर और भोपाल आज के मध्य प्रदेश का हिस्सा थे। कुछ हिस्सों को राज्य पुनर्गठन आयोग ने महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में सम्मिलित कर नए मध्य प्रदेश का निर्माण किया था। पहले चुनाव में मतपत्रों के लिए मतपेटियों की आपूर्ति देश के कई निर्माताओं ने की थी। प्रदेश में ग्वालियर से ग्वालियर इंजीनियरिंग वर्क्स ने प्रति मतपेटी 6 रुपये 12 आना में सप्लाई की थी। देश के अन्य आपूर्तिकर्ताओं ने भी मतपेटियां दी थी। मध्य प्रदेश को 1,41,850, मध्य भारत 53,016, भोपाल 5050, बिलासपुर 680 और विंध्य प्रदेश में 23,000 मतपेटियां उपयोग के लिए प्राप्त हुई थीं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed