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खटुआ हत्याकांड: हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आवेदन पर पुलिस अधीक्षक से 24 घंटे में मांगा जवाब

Fri, 10 Dec 2021 12:34 PM IST
रवींद्र भजनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: रवींद्र भजनी Updated Fri, 10 Dec 2021 12:34 PM IST
सार

एससी खटुआ की मौत के मामले में उनकी पत्नी ने 2019 में दायर की थी याचिका। गन कैरिज फैक्ट्री में जूनियर वर्क मैनेजर थे एससी खटुआ। 2019 में सीबीआई जांच में पेशी के लिए दिल्ली गए थे और लौटे ही नहीं। 
 

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Khatua murder: High court seeks reply from Superintendent of Police in 24 hours on the application for CBI investigation
सांकेतिक फोटो। - फोटो : Social Media

विस्तार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ) में जूनियर वर्क मैनेजर एससी खटुआ की हत्या के मामले में जबलपुर एसपी को 24 घंटे में व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा है। खटुआ की हत्या जनवरी 2019 में हुई थी। उनकी पत्नी ने खटुआ हत्याकांड की जांच सीबीआई से कराने की मांग के साथ 2019 में ही याचिका लगाई थी। इस पर ही हाईकोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई की। 
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मामला 2019 का है। जीसीएफ को धनुष आर्टिलरी गन 155 एमएम को बनाने का प्रोजेक्ट मिला था। गन में उपयोग होने वाला वायरलेस रोलिंग बैरिंग का ठेका दिल्ली की सिद्धी सेल्स को दिया गया था। कंपनी ने चीन में बने माल पर मेड इन जर्मन की सील लगाकर वायरलेस रोलिंग बैरिंग सप्लाई की थी। दिल्ली सीबीआई इस मामले की जांच कर रही थी। पूछताछ के लिए खटुआ को बुलाया गया था। 17 जनवरी 2019 को खटुआ घर से तो निकले, पर लौटे नहीं। 20 दिन बाद 5 फरवरी को उनकी लाश सरकारी निवास से एक किमी दूर मिली थी। 
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फैक्ट्री क्षेत्र के मेन गेट पर लगे सीसीटीवी कैमरे से साफ है कि खटुआ लौट रहे हैं। इससे साफ है कि हत्या फैक्ट्री क्षेत्र में ही हुई है। आठ महीने बाद भी पुलिस आरोपियों को पकड़ नहीं पाई तो उनकी पत्नी मौसमी खटुआ ने जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी। इस मामले में पुलिस ने कोर्ट को बताया था कि भोपाल के मेडिको लीगल इंस्टीटयूट और सागर के एफएसएल को कपड़ों समेत अन्य साक्ष्यों को भेजा गया था। उसकी रिपोर्ट नहीं मिली है। 
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जस्टिस विशाल घगट की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। गुरुवार को पुलिस अधीक्षक ने व्यक्तिगत रूप से पेश न होने पर माफीनामा पेश किया था। साथ ही स्टेटस रिपोर्ट भी पेश की गई थी। उसे पढ़ने के बाद कोर्ट नाराज हो गया और उसने 24 घंटे के अंदर एसपी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दे दिया। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता मुकेश मिश्रा पेश हुए।
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