Adi Shankaracharya: अद्वैतलोक में दिखेगी भारत की समृद्ध स्थापत्य शैलियां, प्रतिमा अनावरण के साथ होगा शिलान्यास
अद्वैत दर्शन की जानकारी देने के लिए शोधार्थियों-विद्यार्थियों के लिए चार शोध केंद्र भी स्थापित किए जा रहे हैं। यह केंद्र आदि गुरु शंकराचार्य के चार शिष्यों के नाम पर आधारित होंगे। अद्वैत वेदांत आचार्य शंकर अंतरराष्ट्रीय संस्थान के प्रांगण के अंतर्गत यह चार शोध केंद्र रहेंगे।
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आदि शंकराचार्य की ज्ञानस्थली ओंकारेश्वर में 18 अगस्त को शंकरावतरणं कार्यक्रम में प्रतिमा अनावरण के साथ ही अद्वैत लोक शिलान्यास का पूजन कार्यक्रम भी होगा। मांधाता पर्वत पर स्थित अद्वैत लोक संग्रहालय में कारीगरों की कला का अनुपम दर्शन होगा। इसके साथ ही लोग भारतीय स्थापत्य कला का अनुभव कर पाएंगे। यह एकात्म धाम विविध क्षेत्रों की स्थापत्य कलाओं की पुरातात्विक शैली से प्रेरित रहेगा। धाम में मंदिर की वास्तुकला नागर शैली रहेगी। इसके साथ ही पारंपरिक वास्तुशिल्प तत्त्वों जैसे स्तंभ और छतरियों का उपयोग किया जाएगा। अद्वैत लोक में ठोस पत्थर की चिनाई और पाषाण की सहायता से निर्मित कारीगरी देखने को मिलेगी। आचार्य शंकर के जीवन प्रसंगों को भित्तिचित्रों और मूर्तियों के माध्यम से चित्रित किया जाएगा।
अद्वैत दर्शन की जानकारी देने के लिए शोधार्थियों-विद्यार्थियों के लिए चार शोध केंद्र भी स्थापित किए जा रहे हैं। यह केंद्र आदि गुरु शंकराचार्य के चार शिष्यों के नाम पर आधारित होंगे। अद्वैत वेदांत आचार्य शंकर अंतरराष्ट्रीय संस्थान के प्रांगण के अंतर्गत यह चार शोध केंद्र रहेंगे। इनके नाम हैं-अद्वैत वेदांत आचार्य पद्मपाद केंद्र, आचार्य हस्तमलक अद्वैत विज्ञान केंद्र, आचार्य सुरेश्वर सामाजिक विज्ञान अद्वैत केंद्र, आचार्य तोटक साहित्य अद्वैत केंद्र।
शोध केंद्र की स्थापत्य शिल्प कला में नागर, द्रविड़, उडि़या, मारू गुर्जर, होयसला, उत्तर भारतीय–हिमालयीन और केरल मंदिर स्थापत्य सहित पारंपरिक वास्तुकला शैलियों की शृंखला सम्मिलित होंगी। अद्वैत वेदांत आचार्य पद्मपाद केंद्र, भारत के पूर्वी क्षेत्र की संरचनात्मक शैली से प्रेरित होगी, वहीं, पुरी के जगन्नाथ मंदिर की संरचना से आचार्य सुरेश्वर सामाजिक विज्ञान अद्वैत केंद्र की वास्तुकला द्रविड़ शैली से प्रेरित रहेगी, शृंगेरी शारदापीठम और आसपास के मंदिरों से वास्तुकला सामिप्य रखने वाला गुजरात में स्थित द्वारका मंदिर, आचार्य हस्तमलक अद्वैत विज्ञान केंद्र की संरचना का मूल रहेगा। आचार्य तोटक साहित्य अद्वैत केंद्र की संरचना उत्तर भारत की स्थापत्य शैली में की जाएगी।
