Jabalpur News: दो जंगली हाथियों को जंगल में छोड़ा, तीसरे की एक्सपर्ट कमेटी करेगी जांच, सरकार ने दिया जवाब
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सरकार ने बताया कि पकड़े गए दो जंगली हाथियों को कॉलर आईडी लगाकर जंगल में छोड़ा गया है। एक अन्य हाथी की रिहाई पर एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट के बाद निर्णय होगा। याचिका में हाथियों को पकड़ने की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई गई। अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।
विस्तार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ को सरकार ने सूचित किया कि दो पकड़े गए जंगली हाथियों को कॉलर आईडी लगाकर जंगल में छोड़ दिया गया है। कॉलर आईडी विदेश से मंगाई गई है। कान्हा टाइगर रिजर्व में रखे गए एक अन्य जंगली हाथी की जांच एक्सपर्ट कमेटी करेगी, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर उसे जंगल में छोड़ने पर निर्णय लिया जाएगा।
रायपुर निवासी नितिन सिंघवी की याचिका में कहा गया है कि जंगली हाथियों को पकड़ने का कदम केवल अंतिम उपाय के रूप में अपनाया जाना चाहिए। मध्य प्रदेश में इसे पहले विकल्प के रूप में अपनाने के आरोप लगाए गए हैं। जंगली हाथियों के कारण किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं, घरों में तोड़फोड़ हो रही है, और लोगों की मृत्यु तक हो चुकी है।
सरकार का पक्ष
सरकार की रिपोर्ट में बताया गया कि 2017 से अब तक 10 जंगली हाथियों को पकड़ा गया है। इनमें से दो हाथियों को छोड़ दिया गया है, और एक की रिहाई पर कमेटी की रिपोर्ट के बाद विचार होगा। याचिका पर पिछली सुनवाई में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हाथियों की मौत का मामला उठाया गया था। सरकार ने यह भी बताया कि हाथियों को कंट्रोल करने वाले विशेषज्ञों की सहायता के लिए 6 सदस्यीय एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया गया है, जिसमें सेंटर ऑफ एलिफेंट स्टडी के प्रोफेसर राजीव टी.एस. को शामिल किया गया है।
हाईकोर्ट ने मामले में याचिकाकर्ता को सुझाव पेश करने के निर्देश दिए थे। याचिकाकर्ता ने दूसरे राज्यों के विशेषज्ञों की सहायता लेने की सिफारिश की है। सरकार ने इस पर विचार करने के लिए समय मांगा। अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने पैरवी की।
