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Jabalpur: पुलिस आरक्षक भर्ती 2016-17 में आरक्षण विवाद, हाईकोर्ट ने गृह सचिव और डीजीपी से मांगा स्पष्टीकरण
Tue, 28 Jan 2025 09:22 PM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Tue, 28 Jan 2025 09:22 PM IST
सार
याचिका में भर्ती प्रक्रिया में ओबीसी के 889 पदों पर नियुक्ति न करने, जिला स्तर पर आरक्षण रोस्टर लागू न करने और मेरिट की अनदेखी का आरोप लगाया गया है। हाईकोर्ट की युगलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 13 फरवरी को तय की है।
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पुलिस आरक्षक भर्ती 2016-17 में जिलेवार आरक्षण लागू किये जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत तथा जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए लागू किये गये आरक्षण के संबंध में गृह सचिव और डीजीपी से स्पष्टीकरण मांगा है। युगलपीठ ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि मामले में स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया तो वे कार्रवाई के लिए तैयार रहे। युगलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 13 फरवरी को निर्धारित की है।
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छठवीं बटालियन जबलपुर में पदस्थ हल्के भाई व अन्य तरफ से दायर याचिका में कहा गया है कि मप्र पुलिस आरक्षक भर्ती 2016-17 के लिए गृह विभाग ने 14 हजार 283 पदों पर नियुक्ति का विज्ञापन जारी किया था। इसमें अनारक्षित वर्ग के लिए 8432, एससी के लिए 1917, एसटी के लिए 2521 और ओबीसी वर्ग के लिए 1411 पदों को आरक्षित किया गया था। याचिका में कहा गया था कि ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित 889 पदों पर नियुक्ति नहीं की गईं। भर्ती में जिला स्तर पर आरक्षण के रोस्टर को लागू नहीं किया गया। जिला बल व विशेष सशस्त्र बल के खाली पदों का भी विवरण नहीं दिया गया, जो अवैधानिक है।
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याचिका में कहा गया था कि नियुक्तियों में प्रतिभाशाली उम्मीदवारों की मेरिट को नजरअंदाज किया गया है। याचिकाकर्ताओं से कम अंक पाने वाले उम्मीदवारों को महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति दे दी गई, जो अनुचित है। याचिका की सुनवाई के बाद युगलपीठ ने उक्त निर्देश जारी किये। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर पी सिंह ने पक्ष रखा। हालांकि विस्तृत आदेश प्रतीक्षित है।
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