फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Jabalpur News ›   MP High Court Prosecution and accused should submit documents in case diary and charge sheet

MP High Court: केस डायरी और आरोप पत्र में अभियोजन व अभियुक्त प्रस्तुत करें दस्तावेज, हाईकोर्ट का अहम फैसला

Thu, 06 Mar 2025 09:40 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Thu, 06 Mar 2025 09:40 PM IST
सार

केस डायरी और आरोप पत्र में अभियोजन व अभियुक्त को दस्तावेज प्रस्तुत करने का फैसला सुनाया गया है। बता दें कि जबलपुर हाईकोर्ट ने ये फैसला सुनाया है।

विज्ञापन
MP High Court Prosecution and accused should submit documents in case diary and charge sheet
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जबलपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत तथा जस्टिस विवेक जैन अपने अहम आदेश में कहा है कि जांच अधिकारी केस डायरी व आरोप पत्र दाखिल करते समय अभियोजन तथा अभियुक्त के पक्ष संबंधित सभी दस्तावेज पेश करें। प्रकरण का विचारण प्रारंभ होने के पूर्व अभियुक्त को जांच के दौरान एकत्र की गई सभी सामग्री की प्रतियां उपलब्ध कराई जाएं।

विज्ञापन


जबलपुर निवासी अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के परिपालन में मध्यप्रदेश नियम और आदेश (आपराधिक) में निम्नलिखित संशोधन किए गए हैं। मध्यप्रदेश नियम और आदेश (आपराधिक) के तहत नियम 117-ए को लागू किया गया है। इस नियम के अनुसार, अभियुक्त को अपराधिक प्रकरण के विचारण के पूर्व जांच अधिकारी द्वारा जब्त किए गए सभी दस्तावेज, भौतिक वस्तुओं और गवाहों के बयान की सूची प्रदान की जानी चाहिए। इस सूची में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख होना चाहिए कि कौन-कौन से दस्तावेज और बयान अभियोजन पक्ष के लिए उपयोगी हैं और किसे बचाव पक्ष लिया जा सकता है। कोई साक्ष्य अभियुक्त के बचाव में है तो उसे भी केस डायरी और चार्जशीट में शामिल किया जाएगा और अभियुक्त को इसकी कॉपी दी जाएगी।
विज्ञापन


याचिका में कहा गया था कि केस डायरी और चार्जशीट में आरोपी को निर्दोष साबित करने वाली सामग्री को नजरअंदाज कर दिया जाता है। सिर्फ अभियोजन पक्ष के साक्ष्य प्रस्तुत किए जाते हैं। जो न्यायिक प्रक्रिया के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। युगलपीठ ने अपने आदेश में प्रदेश सरकार व पुलिस प्रशासन को निर्देशित किया है कि बीएनएसएस की धारा-193 के तहत केस डायरी और आरोप पत्र में अभियुक्त के खिलाफ और उसके पक्ष में मौजूद सभी साक्ष्य पारदर्शिता के साथ प्रस्तुत किए जाएं। इसके अलावा प्रकरण का विचारण प्रारंभ होने से पूर्व अभियुक्त को सभी प्रासंगिक दस्तावेज प्रदान किए जाएं।
विज्ञापन
विज्ञापन


किसी व्यक्ति पर कोई आरोप लगते हैं तो उसे यह जानने का पूरा अधिकार है कि जांच के दौरान कौन-कौन से साक्ष्य एकत्र किए गए हैं। भले ही साक्ष्य उसके पक्ष या विरोध में है। आरोपी को बचाव का पूरा अवसर मिलना चाहिए और अभियोजन पक्ष द्वारा किसी भी तरह की जानकारी छिपाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाई जानी चाहिए। न्यायिक प्रक्रिया का आधार निष्पक्षता और पारदर्शिता होती है। युगलपीठ ने पुलिस महानिदेशक को निर्देशित किया है कि एक सप्ताह में सभी फील्ड अधिकारियों को आवश्यक आदेश जारी करें। याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अधिवक्ता ने अपना पक्ष स्वयं रखा। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed