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MP High Court: साध्वी लक्ष्मीदास के सामने कोर्ट ने रखी शर्त, 90 लाख दो तभी होगी जमानत
Sat, 21 Dec 2024 09:46 PM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Sat, 21 Dec 2024 09:46 PM IST
सार
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने श्रीराम जानकी मंदिर आश्रम छिंदवाड़ा के महंत की राशि गबन मामले में साध्वी लक्ष्मी दास को 90 लाख रुपये जमा करने का आदेश दिया है।
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छिंदवाड़ा जिले में स्थित राम जानकी मंदिर आश्रम के महंत की मौत के बाद लगभग 89 लाख रुपये की राशि गबन करने की आरोपी साध्वी लक्ष्मी दास ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन दायर किया था। आवेदन के साथ उन्होंने अंडर प्रोटेस्ट 90 लाख रुपये जमा की पेशकश की। हाईकोर्ट जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने उन्हें अग्रिम जमानत का लाभ प्रदान करते हुए तीस दिनों में उक्त राशि सीजेएम के समक्ष जमा कराने के निर्देश दिए हैं।
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साध्वी लक्ष्मी दास की तरफ से दायर की गई आवेदन में कहा गया था कि छिंदवाड़ा स्थित राम जानकी मंदिर आश्रम के महंत कनकदास महाराज ने अयोध्या में रामलला के मंदिर निर्माण के बाद 2121 यज्ञ करवाने का संकल्प लिया था। उनकी सड़क हादसे में 17 अप्रैल 2023 को मृत्यु हो गयी थी। अभियोजन का आरोप है कि उनका भारतीय स्टेट बैंक, शाखा चौराई छिंदवाड़ा में एक कार्यात्मक बचत खाता था। इस बैंक खाते में 88,74,081 रुपये जमा थे और उसके द्वारा किसी व्यक्ति को नामित नहीं किया गया था।
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उनके फोन का उपयोग कर आवेदिका ने उक्त राशि दूसरे खाते में स्थानांतरित कर गबन किया। पुलिस ने शिकायत पर आवेदनकर्ता के खिलाफ धारा 420, 404 और 403 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। वह अंडर प्रोटेस्ट 90 लाख रुपये जमा करने तैयार है।
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एकलपीठ ने आवेदिका को अग्रिम जमानत का लाभ प्रदान करते हुए कहा है कि वह 30 दिनों के अंदर उक्त राशि सीजेएम समक्ष जमा करवाए। उक्त राशि अंतिम आदेश के उत्तराधिकारिक के अधीन होगी। आवेदक जांच अधिकारी के समक्ष इसकी रसीद प्रस्तुत करेगा। आवेदिका उक्त राशि जमा नहीं करती है तो जमानत आदेश की शर्तों में संशोधन के लिए कोई आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। अधिकारी व गिरफ्तारी प्राधिकारी की संतुष्टि के लिए पचास हजार रुपये की राशि का व्यक्तिगत बांड और समान राशि की एक सॉल्वेंट जमानत प्रस्तुत करने पर अग्रिम जमानत पर रिहा किया जाए। आवेदिका की तरफ से अधिवक्ता मनीष दत्त ने पैरवी की।
