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Jabalpur News: मानव तस्करी के आरोप में डॉ. लाल को राहत, हाईकोर्ट ने खारिज की एफआईआर
Mon, 23 Sep 2024 10:46 PM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Mon, 23 Sep 2024 10:46 PM IST
सार
मानव तस्करी एक्ट में डॉ अजय लाल के खिलाफ दर्ज एफआईआर हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। कोर्ट ने आदेश में कहा है कि डेढ दशक पूर्व का इतिहास कुरेदना ना सिर्फ विधि-विरूद्ध है बल्कि उक्त बालकों के अधिकारों का हनन भी है। कोर्ट ने अभिनिर्धारित किया है कि उक्त संस्थान द्वारा दत्तक ग्रहण में दिए गए दोनों बालकों के संदर्भ में जो आरोप एफआईआर में लगाए गए हैं, वे निराधार हैं।
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high court
विस्तार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मानव तस्करी और जुवेनाइल एक्ट के तहत दमोह स्थित आधारशिला संस्थान के पदाधिकारी डॉ अजय लाल के खिलाफ दर्ज एफआईआर को खारिज कर दी है। हाईकोर्ट जस्टिस संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि डेढ दशक पूर्व का इतिहास कुरेदना ना सिर्फ विधि-विरूद्ध है बल्कि उक्त बालकों के अधिकारों का हनन भी है।
कोर्ट ने अभिनिर्धारित किया है कि उक्त संस्थान द्वारा दत्तक ग्रहण में दिए गए दोनों बालकों के संदर्भ में जो आरोप एफआईआर में लगाए गए हैं, वे निराधार हैं। गौरतलब है कि डॉ लाल के खिलाफ 7 अगस्त को राष्ट्रीय बाल अधिकार के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो की तरफ से प्रेषित शिकायत पर थाना दमोह में मानव तस्करी और किशोर न्याय की धारा 80 के तहत प्रकरण पंजीबद्ध हुआ था। उन पर आरोप था कि दो बालकों को नियम विरुद्ध तरीके से गोद दिया गया है। इसके बाद नियमानुसार उनकी निगरानी नही की।
याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा, शशांक शेखर व अधिवक्ता भूपेश तिवारी ने पक्ष रखते हुए एकलपीठ को बताया कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो द्वारा दुर्भावनापूर्वक तथा याचिकाकर्ता की सामाजिक छवि को धूमिल करने के उद्देश्य से एफआईआर दर्ज कराई गई थी। याचिकाकर्ता के खिलाफ जो आरोप लगाए गए हैं वह निराधार है। किशोर न्याय अधिनियम के तहत माता-पिता की सहमति से दोनों को गोद दिया गया था। पूर्व में जो दो अपराधिक प्रकरण डॉ लाल के विरुद्ध पंजीबद्ध किए गए थे, उनमें से एक प्रकरण में हाईकोर्ट ने एक एफआईआर निरस्त और दूसरे प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने सत्र न्यायालय में चल रही ट्रायल को स्टे कर दिया गया है।
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कोर्ट ने अभिनिर्धारित किया है कि उक्त संस्थान द्वारा दत्तक ग्रहण में दिए गए दोनों बालकों के संदर्भ में जो आरोप एफआईआर में लगाए गए हैं, वे निराधार हैं। गौरतलब है कि डॉ लाल के खिलाफ 7 अगस्त को राष्ट्रीय बाल अधिकार के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो की तरफ से प्रेषित शिकायत पर थाना दमोह में मानव तस्करी और किशोर न्याय की धारा 80 के तहत प्रकरण पंजीबद्ध हुआ था। उन पर आरोप था कि दो बालकों को नियम विरुद्ध तरीके से गोद दिया गया है। इसके बाद नियमानुसार उनकी निगरानी नही की।
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याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा, शशांक शेखर व अधिवक्ता भूपेश तिवारी ने पक्ष रखते हुए एकलपीठ को बताया कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो द्वारा दुर्भावनापूर्वक तथा याचिकाकर्ता की सामाजिक छवि को धूमिल करने के उद्देश्य से एफआईआर दर्ज कराई गई थी। याचिकाकर्ता के खिलाफ जो आरोप लगाए गए हैं वह निराधार है। किशोर न्याय अधिनियम के तहत माता-पिता की सहमति से दोनों को गोद दिया गया था। पूर्व में जो दो अपराधिक प्रकरण डॉ लाल के विरुद्ध पंजीबद्ध किए गए थे, उनमें से एक प्रकरण में हाईकोर्ट ने एक एफआईआर निरस्त और दूसरे प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने सत्र न्यायालय में चल रही ट्रायल को स्टे कर दिया गया है।
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