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Jabalpur: मां की हत्या करने वाले कैदी को राहत, हाईकोर्ट ने निरस्त की शेष कारावास की सजा

Wed, 21 Jun 2023 07:29 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Wed, 21 Jun 2023 07:29 PM IST
सार

अनूपपुर जिला न्यायालय द्वारा मां की हत्या के मामले में बेटे को आजीवन कारावास की सजा से दंडित किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की गई थी। इसमें हाईकोर्ट ने माना कि जिला न्यायालय ने जिला न्यायालय ने भौतिक पहलुओं की जांच किए बिना अभियोजन की यांत्रिकी रूप से पेश की गई कहानी पर भरोसा किया। हाईकोर्ट ने शेष कारावास निरस्त कर दिया है। 

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Relief for the prisoner who killed his mother, the High Court canceled the remaining sentence of imprisonment
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मां की हत्या के मामले में आजीवन कारावास से दंडित पुत्र को हाईकोर्ट से राहत मिली है। हाईकोर्ट जस्टिस सुजय पॉल तथा जस्टिस एके पालीवाल की युगलपीठ ने पाया कि जिला न्यायालय ने भौतिक पहलुओं की जांच किए बिना अभियोजन की यांत्रिकी रूप से पेश की गई कहानी पर भरोसा किया है। युगलपीठ ने आरोपी की शेष सजा निरस्त करने के आदेश जारी किए हैं।

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याचिकाकर्ता सुदामा सिंह राठौर ने अनूपपुर जिला न्यायालय द्वारा मां की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा से दंडित किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की गई थी। याचिकाकर्ता की तरफ से दायर अपील में कहा गया था कि उसकी मां मुन्नी बाई निवासी ग्राम भीलमट थाना जैतहारी की हत्या सितंबर 2019 में हो गई थी। वह मोजर बेयर कंपनी का विरोध कर रहा था, इसलिए पुलिस उससे दुर्भावना रखती थी। इसी कारण से उसे झूठा फंसाया गया है। वह 14 सितंबर 2019 से लेकर 12 अप्रैल 2021 तक न्यायिक अभिरक्षा में था। जिला न्यायालय अनूपपुर ने उसे 29 नवंबर 2022 को सजा से दण्डित किया था, तब से वह जेल में है।
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अपीलकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि एफएसएल रिपोर्ट के अनुसार मृतका के हाथ में मिले बाल उसके थे। जबकि मृतका व घटनास्थल की फोटो ली गई थी परंतु उन्हें न्यायालय के समक्ष पेश नहीं किया गया। इतना ही नहीं जिस पुलिस कर्मी की उपस्थिति में अपीलकर्ता के बाल का नमूना लिया गया वह न्यायालय में गवाही के लिए उपस्थित नहीं हुआ। जिला न्यायालय ने सिर्फ एफएसएल रिपोर्ट के आधार पर उसे सजा से दंडित किया है। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि इस बात पर अत्यधिक संदेह है कि मृतका के हाथ में अपीलकर्ता के बाल पाए गए या नहीं। जिला न्यायालय ने जिला न्यायालय ने भौतिक पहलुओं की जांच किए बिना अभियोजन की यांत्रिकी रूप से पेश की गई कहानी पर भरोसा किया और अपीलकर्ता को सजा से दंडित किया है। हाईकोर्ट ने अपीलकर्ता की शेष सजा निरस्त करने के आदेश जारी किए हैं। अपीलकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अंजना कुररिया ने पैरवी की। 

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