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OBC Reservation: सॉलिसिटर जनरल नहीं हुए उपस्थित, सुनवाई टली, 27 प्रतिशत आरक्षण पर रोक बरकरार
Mon, 25 Jul 2022 11:07 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Mon, 25 Jul 2022 11:07 PM IST
सार
मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण पर होने वाली सुनवाई टल गई है। सॉलिसिटर जनरल की अनुपस्थिति के कारण याचिका पर सुनवाई बढ़ाने का आग्रह किया गया था, जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 1 अगस्त को निर्धारित की है।
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MP High Court
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत किए जाने के संबंध में दायर 64 याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई होना थी। सरकार की तरफ से हाईकोर्ट जस्टिस शील नागू तथा जस्टिस डीडी बसंल की युगलपीठ से आग्रह किया गया कि प्रकरण में सॉलिसिटर जनरल पक्ष रखें। सॉलिसिटर जनरल की अनुपस्थिति के कारण याचिका पर सुनवाई बढ़ाने का आग्रह किया गया। युगलपीठ ने आग्रह को स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 1 अगस्त को निर्धारित की है। युगलपीठ ने पूर्व में पीएससी सहित अन्य विभाग में 27 ओबीसी आरक्षण पर रोक के आदेश को बरकरार रखा है।
गौरतलब है कि आशिता दुबे सहित अन्य की तरफ से प्रदेश सरकार द्वारा ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत किए जाने के खिलाफ तथा पक्ष में लगभग 60 से अधिक याचिकाएं दायर की गई थीं। हाईकोर्ट ने कई लंबित याचिकाओं पर ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत दिए जाने पर रोक लगा दी थी। सरकार द्वारा स्थगन आदेश वापस लेने के लिए आवेदन दायर किया गया था। हाईकोर्ट ने 1 सितम्बर 2021 को स्थगन आदेश वापस लेने से इनकार करते हुए संबंधित याचिकाओं को अंतिम सुनवाई के निर्देश जारी किए थे। प्रदेश सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने महाधिवक्ता द्वारा 25 अगस्त 2021 को दिए अभिमत के आधार पर पीजी नीट 2019-20, पीएससी के माध्यम से होने वाली मेडिकल अधिकारियों की नियुक्ति तथा शिक्षक भर्ती छोड़कर अन्य विभाग में 27 ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत दिए जाने के आदेश जारी कर दिए हैं। उक्त आदेश के खिलाफ भी हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
आरक्षण के खिलाफ दायर याचिकाओं में कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने साल 1993 में इंदिरा साहनी तथा साल 2021 में मराठा आरक्षण के मामले में स्पष्ट आदेश दिए हैं कि आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। प्रदेश में ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत किए जाने पर आरक्षण की सीमा 63 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से दायर जवाब में कहा गया था कि साल 2011 की जगगणना के अनुसार प्रदेश में ओबीसी वर्ग की संख्या लगभग 51 प्रतिशत है। पूर्व में सरकार की तरफ से ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के संबंध में जारी अंतरित रोक के आदेश को संशोधित करने आवेदन दायर किया था। जिसे न्यायालय ने खारिज कर दिया था। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आदित्य संघी तथा सरकार की तरफ से अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ने पैरवी की।
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गौरतलब है कि आशिता दुबे सहित अन्य की तरफ से प्रदेश सरकार द्वारा ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत किए जाने के खिलाफ तथा पक्ष में लगभग 60 से अधिक याचिकाएं दायर की गई थीं। हाईकोर्ट ने कई लंबित याचिकाओं पर ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत दिए जाने पर रोक लगा दी थी। सरकार द्वारा स्थगन आदेश वापस लेने के लिए आवेदन दायर किया गया था। हाईकोर्ट ने 1 सितम्बर 2021 को स्थगन आदेश वापस लेने से इनकार करते हुए संबंधित याचिकाओं को अंतिम सुनवाई के निर्देश जारी किए थे। प्रदेश सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने महाधिवक्ता द्वारा 25 अगस्त 2021 को दिए अभिमत के आधार पर पीजी नीट 2019-20, पीएससी के माध्यम से होने वाली मेडिकल अधिकारियों की नियुक्ति तथा शिक्षक भर्ती छोड़कर अन्य विभाग में 27 ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत दिए जाने के आदेश जारी कर दिए हैं। उक्त आदेश के खिलाफ भी हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
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आरक्षण के खिलाफ दायर याचिकाओं में कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने साल 1993 में इंदिरा साहनी तथा साल 2021 में मराठा आरक्षण के मामले में स्पष्ट आदेश दिए हैं कि आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। प्रदेश में ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत किए जाने पर आरक्षण की सीमा 63 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से दायर जवाब में कहा गया था कि साल 2011 की जगगणना के अनुसार प्रदेश में ओबीसी वर्ग की संख्या लगभग 51 प्रतिशत है। पूर्व में सरकार की तरफ से ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के संबंध में जारी अंतरित रोक के आदेश को संशोधित करने आवेदन दायर किया था। जिसे न्यायालय ने खारिज कर दिया था। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आदित्य संघी तथा सरकार की तरफ से अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ने पैरवी की।
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