{"_id":"6306201da1cfec577b2c578b","slug":"obc-reservation-in-mp-hearing-in-obc-reservation-case-will-continue-for-the-fourth-day","type":"story","status":"publish","title_hn":"OBC Reservation in MP: हाईकोर्ट में लगातार चौथे दिन सुना जाएगा मप्र में अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण का मामला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
OBC Reservation in MP: हाईकोर्ट में लगातार चौथे दिन सुना जाएगा मप्र में अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण का मामला
Wed, 24 Aug 2022 06:28 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 24 Aug 2022 06:28 PM IST
सार
मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण के संबंध में दायर 64 याचिकाओं पर लगातार तीसरे दिन भी सुनवाई जारी रही। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इंद्रा साहनी तथा मराठा आरक्षण के संबंध में पारित आदेश का हवाला दिया गया। समय समाप्त होने पर कोर्ट चौथे दिन भी सुनवाई जारी रहने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन
court new
- फोटो : istock
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण के संबंध में दायर 64 याचिकाओं पर लगातार तीसरे दिन भी सुनवाई जारी रही। न्यायालीन समय समाप्त होने के कारण हाईकोर्ट जस्टिस शील नागू तथा जस्टिस वीरेंन्द्र सिंह की युगलपीठ के चौथे दिन भी सुनवाई जारी रखने के आदेश जारी किए हैं।
गौरतलब है कि आशिता दुबे सहित अन्य की तरफ से प्रदेश सरकार द्वारा ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत किए जाने के खिलाफ तथा पक्ष में 64 याचिकाएं दायर की गई थीं। हाईकोर्ट ने कई लंबित याचिकाओं पर ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत दिए जाने पर रोक लगा दी थी। सरकार द्वारा स्थगन आदेश वापस लेने आवेदन दायर किया गया था। हाईकोर्ट ने सितम्बर 2021 को स्थगन आदेश वापस लेने से इनकार करते हुए संबंधित याचिकाओं को अंतिम सुनवाई के निर्देश जारी किए थे।
प्रदेश सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने महाधिवक्ता द्वारा अगस्त 2021 को दिए अभिमत के आधार पर पीजी नीट 2019-20 पीएससी के माध्यम से होने वाली मेडिकल अधिकारियों की नियुक्ति तथा शिक्षक भर्ती छोड़कर अन्य विभाग में ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत दिए जाने के आदेश जारी कर दिए। उक्त आदेश के खिलाफ भी हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
विज्ञापन
याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई तीसरे दिन भी जारी रही। ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत किए जाने के खिलाफ याचिकाकर्ताओं की तरफ से पक्ष रखते हुए सुप्रीम कोर्ट द्वारा इंद्रा साहनी तथा मराठा आरक्षण के संबंध में पारित आदेश का हवाला दिया गया, कहा है कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए तथा जातिगत गणना के हिसाब से आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता है।
महाजन आयोग की अनुशंसाओं के संबंध में युगलपीठ को बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश के अनुसार अनुशंसाएं अवैधानिक हैं। न्यायालीन समय समाप्त होने के कारण युगलपीठ ने चौथे दिन भी सुनवाई जारी रखने के निर्देश दिए हैं। तीसरे दिन अधिवक्ता अंशुमान सिंह व अधिवक्ता सुयश मोहन ने पक्ष रखा। सरकार की तरफ से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह उपस्थित हुए।
विज्ञापन
गौरतलब है कि आशिता दुबे सहित अन्य की तरफ से प्रदेश सरकार द्वारा ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत किए जाने के खिलाफ तथा पक्ष में 64 याचिकाएं दायर की गई थीं। हाईकोर्ट ने कई लंबित याचिकाओं पर ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत दिए जाने पर रोक लगा दी थी। सरकार द्वारा स्थगन आदेश वापस लेने आवेदन दायर किया गया था। हाईकोर्ट ने सितम्बर 2021 को स्थगन आदेश वापस लेने से इनकार करते हुए संबंधित याचिकाओं को अंतिम सुनवाई के निर्देश जारी किए थे।
विज्ञापन
प्रदेश सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने महाधिवक्ता द्वारा अगस्त 2021 को दिए अभिमत के आधार पर पीजी नीट 2019-20 पीएससी के माध्यम से होने वाली मेडिकल अधिकारियों की नियुक्ति तथा शिक्षक भर्ती छोड़कर अन्य विभाग में ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत दिए जाने के आदेश जारी कर दिए। उक्त आदेश के खिलाफ भी हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
विज्ञापन
याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई तीसरे दिन भी जारी रही। ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत किए जाने के खिलाफ याचिकाकर्ताओं की तरफ से पक्ष रखते हुए सुप्रीम कोर्ट द्वारा इंद्रा साहनी तथा मराठा आरक्षण के संबंध में पारित आदेश का हवाला दिया गया, कहा है कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए तथा जातिगत गणना के हिसाब से आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता है।
महाजन आयोग की अनुशंसाओं के संबंध में युगलपीठ को बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश के अनुसार अनुशंसाएं अवैधानिक हैं। न्यायालीन समय समाप्त होने के कारण युगलपीठ ने चौथे दिन भी सुनवाई जारी रखने के निर्देश दिए हैं। तीसरे दिन अधिवक्ता अंशुमान सिंह व अधिवक्ता सुयश मोहन ने पक्ष रखा। सरकार की तरफ से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह उपस्थित हुए।
