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MPPSC 2019: नई नॉर्मलाइजेशन लिस्ट बनाने के आदेश पर रोक, MPPSC ने दायर की थी अपील
Tue, 19 Dec 2023 08:42 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: अरविंद कुमार
Updated Tue, 19 Dec 2023 08:42 PM IST
सार
मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग 2019 की नई नॉर्मलाइजेशन लिस्ट बनाने के आदेश पर जबलपुर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। बता दें कि लिस्ट बनाने को लेकर एमपीपीएससी ने अपील दायर की थी।
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर एकलपीठ द्वारा एमपीपीएससी 2019 की मुख्य परीक्षा के रिजल्ट के आधार पर नई नार्मलाइजेशन लिस्ट बनाने के निर्देश दिए थे। एकलपीठ ने अनारक्षित वर्ग के याचिकाकर्ताओं को राहत प्रदान करते हुए उन्हे इंटरव्यू में शामिल करने के आदेश भी जारी किए थे, जिसके खिलाफ मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने एकलपीठ ने आदेश पर रोक लगा दी है।
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गौरतलब है कि संशोधित नियमों 2015 के तहत मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग ने पीएससी 2019 की परीक्षा का आयोजन किया था, जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने संशोधित नियम को अवैधानिक मनाते हुए पूर्व परीक्षा नियम अनुसार रिजल्ट जारी करने के आदेश जारी किए थे। पीएससी ने मुख्य परीक्षा रिजल्ट को निरस्त करते हुए नई सूची जारी की थी, जिसमें 2,721 आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा हेतु पात्र घोषित किया। मुख्य परीक्षा में पूर्व में हुए चयनित अभ्यार्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
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याचिका में कहा गया था कि मुख्य परीक्षा में उनका चयन हो गया है। चयनित होने के बावजूद भी उन्हें पुनः मुख्य परीक्षा के लिए बाध्य नहीं किया जाए। हाईकोर्ट की एकलपीठ ने मुख्य परीक्षा में चयनित अभ्यर्थियों तथा विशेष अभ्यर्थियों की अलग-अलग सूची तैयार कर इंटरव्यू के लिए नॉर्मलाइजेशन लिस्ट जारी करने के आदेश दिए थे। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा था कि आरक्षित वर्ग के 2,721 अभ्यर्थियों का स्पेशल मेंस परीक्षा का आयोजित किया जाए। समस्त अभ्यर्थियों के मुख्य परीक्षा के अंको का नॉर्मलाइजेशन करके साक्षात्कार की प्रक्रिया तीन महीने के अंदर पूरी की जाए, जिसके खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी दायर की गई थी, जो लंबित है।
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आयोग ने उच्च न्यायालय के आदेश पर विशेष मुख्य परीक्षा आयोजित नॉर्मलाइजेशन जारी की गई थी, जिससे कई अभ्यर्थी साक्षात्कार हेतु अयोग्य घोषित किया गया था। दायर याचिकाओं में कहा गया था कि एमपीपीएससी ने उन अभ्यर्थियों को भी नॉर्मलाइजेशन सूची में शामिल कर लिया है, जिन्होंने मुख्य परीक्षा क्लीयर नहीं की थी। मुख्य परीक्षा में सेलेक्शन होने के बावजूद भी उन्हें इंटरव्यू से वंचित कर दिया। एकलपीठ ने अपने आदेश में चार बिंदुओं का निर्धारित करते हुए अपने आदेश में कहा था कि नियम 2015 के पूर्व के नियम पालन किया जाए।
पूर्व में पारित आदेशानुसार, मुख्य परीक्षा के आधार पर नई सेलेक्शन लिस्ट बनाई जाए। एकलपीठ ने एमपीपीएससी द्वारा इंटरव्यू के लिए बनाई लिस्ट को निरस्त करते हुए पुनः नॉर्मलाइजेशन लिस्ट बनाने तथा याचिकाकर्ताओं को इंटरव्यू में शामिल करने के आदेश जारी किए हैं। एकलपीठ ने सर्वोच्च न्यायालय में लंबित याचिका के अंतिम आदेश के अनुसार आगामी कार्यवाही के आदेश जारी किए थे, जिसके खिलाफ एमपीपीएससी ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। अपील की सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने एकलपीठ के आदेश पर स्थगन आदेश जारी किए हैं। एमपीपीएससी की तरफ से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह तथा इंटर विनर की ओर से रामेश्वर सिंह ठाकुर और विनायक प्रसाद शाह ने पक्ष रखा।
