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MP News: चिंकारा के शिकारियों पर क्यों नहीं हुई कार्रवाई, वन विभाग के अधिकारियों से हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
Wed, 06 Sep 2023 08:44 AM IST
अरविंद कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: अरविंद कुमार
Updated Wed, 06 Sep 2023 08:44 AM IST
सार
चिंकारा का शिकार कर उसके मीट का परिवहन करने वालों पर कार्रवाई न होने के मामले को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्ती से लिया है। वन विभाग के अधिकारियों से हाईकोर्ट ने जवाब मांगा है।
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर
- फोटो : Social Media
विस्तार
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने चिंकारा का शिकार कर उसके मीट का परिवहन करने वालों पर कार्रवाई न होने के मामले को सख्ती से लिया। चीफ जस्टिस रवि विजय मलिमठ और जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने मामले में अनावेदक वन अधिकारियों से पूछा है कि अब मामले में प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
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यह जनहित याचिका टीकमगढ़ निवासी प्रकाश प्रजापति की ओर से दायर की गई है, जिसमें कहा गया कि आबकारी अधिकारियों ने 20 मई 2010 को सफेद बोलेरो गाड़ी से अवैध शराब और चिंकारा का चार किलो मीट जब्त किया था। उसके बाद आबकारी विभाग ने तत्काल उक्त मीट को टीकमगढ़ के वन अधिकारियों को सौंप दिया। उसके दूसरे दिन मीट को जांच के लिए वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट देहरादून भेज दिया।
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अगस्त 2010 में रिपोर्ट आई, जिसमें पाया गया कि उक्त मीट चिंकारा का था। इसके बाद आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। याचिकाकर्ता ने आरटीआई के तहत डीएफओ टीकमगढ़ से उक्त मामले की जानकारी मांगी, लेकिन उसे अधूरी जानकारी दी गई। आबकारी विभाग से दस्तावेजों सहित पूरी जानकारी लेकर पीसीसीएफ को पत्र भेजकर कार्रवाई किए जाने की राहत चाही गई, लेकिन उसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिस पर हाईकोर्ट की शरण ली गई।
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मामले में वन विभाग के एडीशनल चीफ सेक्रेटरी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक भोपाल और वन मंडल अधिकारी टीकमगढ़ को पक्षकार बनाया गया है। सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब पेश करने कहा है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मनीष वर्मा ने पक्ष रखा।
