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MP News: दमोह में मिशनरी स्कूल के द्वार के सामने बनाई दीवार पुलिस तत्काल तोड़े: हाईकोर्ट
Wed, 28 Jun 2023 10:46 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 28 Jun 2023 10:46 PM IST
सार
दमोह जिले के सेंटजांस सीनियर सेकंडरी स्कूल की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि स्कूल के सामने वाली रोड को स्वयं की संपत्ति बताते हुए पुलिस ने दीवार खडी कर दी है। मुख्यगेट के सामने दीवार खड़ी किए जाने के कारण लगभग दो हजार छात्र स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं।
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दमोह स्कूल के सामने बनी दीवार का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है।
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
मप्र हाईकोर्ट ने दमोह में पुलिस विभाग द्वारा एक मिशनरी स्कूल के मुख्य द्वार के सामने बनाई गई दीवार को तत्काल तोड़ने का आदेश दिया है। इस दीवार के कारण स्कूल को अनिश्चितकाल तक बंद करना पड़ा। पुलिस विभाग ने अपनी जमीन बताते हुए दीवार खड़ी कर दी थी, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
हाईकोर्ट के जस्टिस संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने पुलिस प्रशासन को निर्देशित किया कि वह स्कूल के मुख्य द्वार के सामने खडी की गई दीवार को तत्काल तोडे।
दमोह जिले के सेंटजांस सीनियर सेकंडरी स्कूल की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि स्कूल के सामने वाली रोड को स्वयं की संपत्ति बताते हुए पुलिस ने दीवार खडी कर दी है। मुख्यगेट के सामने दीवार खड़ी किए जाने के कारण लगभग दो हजार छात्र स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं। पुलिस जिस मार्ग को स्वयं की संपत्ति बता रही है वह सड़क है। साल 1989 से लोग व छात्र आवागमन के लिए उक्त मार्ग का उपयोग करते हैं। सडक का निर्माण प्रशासन द्वारा किया गया था।
22 जून को बना दी थी दीवार
याचिका में कहा गया है कि पुलिस विभाग ने बिना सूचना दिए 22 जून को स्कूल के मुख्य गेट के सामने दीवार खडी कर दी। इसके कारण छात्र स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं।
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पुलिस विभाग की है जमीन
याचिका की सुनवाई के दौरान शासन की तरफ से तर्क दिया गया कि उक्त जमीन पुलिस विभाग की है। दीवार बनाने जाने के खिलाफ याचिकाकर्ता को दीवानी प्रकरण दायर करना चाहिए था। नागरिक विवाद होने के कारण यह याचिका हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के योग्य नहीं है। इसके अलावा स्कूल तक पहुंचे के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध है। याचिकाकर्ता की तरफ से बताया गया कि जिस वैकल्पिक मार्ग का हवाला दिया जा रहा है वह निजी कॉलोनी से जाता है और बहुत संकरा है, जिसे रोड नहीं कह सकते हैं।
प्रशासन की बनाई सड़क बंद नहीं कर सकते
सुनवाई के बाद एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि उक्त सडक का निर्माण प्रशासन द्वारा किया गया है। ऐसे में उसे बंद नहीं किया जा सकता है। छात्रों की पढाई प्रभावित नहीं हो इसके लिए स्कूल के मुख्य गेट के सामने से बनाई गई दीवार को तत्काल हटाया जाए। एकलपीठ ने स्कूल को दीवानी केस दायर करने के लिए 30 दिन का समय प्रदान किया है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने पैरवी की।
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हाईकोर्ट के जस्टिस संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने पुलिस प्रशासन को निर्देशित किया कि वह स्कूल के मुख्य द्वार के सामने खडी की गई दीवार को तत्काल तोडे।
दमोह जिले के सेंटजांस सीनियर सेकंडरी स्कूल की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि स्कूल के सामने वाली रोड को स्वयं की संपत्ति बताते हुए पुलिस ने दीवार खडी कर दी है। मुख्यगेट के सामने दीवार खड़ी किए जाने के कारण लगभग दो हजार छात्र स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं। पुलिस जिस मार्ग को स्वयं की संपत्ति बता रही है वह सड़क है। साल 1989 से लोग व छात्र आवागमन के लिए उक्त मार्ग का उपयोग करते हैं। सडक का निर्माण प्रशासन द्वारा किया गया था।
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22 जून को बना दी थी दीवार
याचिका में कहा गया है कि पुलिस विभाग ने बिना सूचना दिए 22 जून को स्कूल के मुख्य गेट के सामने दीवार खडी कर दी। इसके कारण छात्र स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं।
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पुलिस विभाग की है जमीन
याचिका की सुनवाई के दौरान शासन की तरफ से तर्क दिया गया कि उक्त जमीन पुलिस विभाग की है। दीवार बनाने जाने के खिलाफ याचिकाकर्ता को दीवानी प्रकरण दायर करना चाहिए था। नागरिक विवाद होने के कारण यह याचिका हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के योग्य नहीं है। इसके अलावा स्कूल तक पहुंचे के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध है। याचिकाकर्ता की तरफ से बताया गया कि जिस वैकल्पिक मार्ग का हवाला दिया जा रहा है वह निजी कॉलोनी से जाता है और बहुत संकरा है, जिसे रोड नहीं कह सकते हैं।
प्रशासन की बनाई सड़क बंद नहीं कर सकते
सुनवाई के बाद एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि उक्त सडक का निर्माण प्रशासन द्वारा किया गया है। ऐसे में उसे बंद नहीं किया जा सकता है। छात्रों की पढाई प्रभावित नहीं हो इसके लिए स्कूल के मुख्य गेट के सामने से बनाई गई दीवार को तत्काल हटाया जाए। एकलपीठ ने स्कूल को दीवानी केस दायर करने के लिए 30 दिन का समय प्रदान किया है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने पैरवी की।
