{"_id":"6441156a8b0e38c347015f35","slug":"mp-news-last-chance-for-investigation-against-ias-high-court-strict-on-corruption-charges-2023-04-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"MP News: आईएएस के खिलाफ जांच के लिए अंतिम अवसर, भ्रष्टाचार के आरोप पर हाईकोर्ट सख्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
MP News: आईएएस के खिलाफ जांच के लिए अंतिम अवसर, भ्रष्टाचार के आरोप पर हाईकोर्ट सख्त
Thu, 20 Apr 2023 04:05 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Thu, 20 Apr 2023 04:05 PM IST
सार
बालाघाट जिले के तत्कालीन कलेक्टर दीपक आर्य पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप मामले में हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने उच्चस्तरीय जांच के लिए सरकार को अंतिम अवसर प्रदान किया है।
विज्ञापन
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बालाघाट जिले के तत्कालीन कलेक्टर दीपक आर्य पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप की जांच उच्च स्तरीय कमेटी से करवाने के निर्देश दिए थे। एक साल बाद भी हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं किए जाने के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए सरकार को जांच के लिए अंतिम अवसर प्रदान किया है।
बता दें कि पूर्व विधायक किशोर समरीते की तरफ से दायर अवमानना याचिका में कहा गया था कि बालाघाट जिले के तत्कालीन कलेक्टर दीपक आर्य ने कस्टम मिलिंग व चावल के अवैध कारोबारियों, कान्हा स्थित रिसोर्ट संचालकों, रेत ठेकेदारों, कंस्ट्रक्शन कंपनी से रिश्वत के रूप में महंगे गिफ्ट खुद व परिजनों के नाम पर लिए थे। इस संबंध में उन्होंने केन्द्र सरकार से शिकायत की थी। केन्द्र सरकार ने शिकायत पर कार्रवाई के लिए राज्य सरकार को निर्देशित किया था। राज्य सरकार ने जांच बालाघाट कलेक्टर को सौंप दी थी। तत्कालीन कलेक्टर दीपक आर्य ने खुद पर लगे आरोपों की स्वयं जांच करते हुए क्लीन चिट प्रदान कर दी।
तत्कालीन कलेक्टर द्वारा खुद की जांच किए जाने के खिलाफ उन्होंने केन्द्र सरकार से शिकायत की थी। केन्द्र सरकार ने प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। मुख्य सचिव द्वारा शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं किए जाने के कारण उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने जनवरी 2022 को अपने आदेश में कहा था कि नियमानुसार जिस अधिकारी पर आरोप लगे हैं, उसकी जांच वरिष्ठ अधिकारी द्वारा की जानी चाहिए। युगलपीठ ने याचिका का निराकरण करते हुए शिकायत की जांच के लिए उच्च स्तरीय कमेटी गठित करने के आदेश जारी किए थे। शिकायत सही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारी पर तथा गलत पाए जाने पर याचिकाकर्ता के खिलाफ विधि अनुसार कार्रवाई के आदेश भी हाईकोर्ट ने पारित किए थे।
विज्ञापन
हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी जांच के लिए उच्च स्तरीय कमेटी गठित नहीं किए जाने के कारण उक्त अवमानना याचिका दायर की गई है। याचिका की सुनवाई के बाद युगलपीठ ने अनावेदक पीएस जीडीए दीप्ति गौड़ मुखर्जी तथा पीएस राजस्व मनीष रस्तोगी को नोटिस जारी किए हैं। याचिका पर गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने उच्चस्तरीय जांच के लिए सरकार को अंतिम अवसर प्रदान किया है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता शिवेन्द्र पांडे ने पैरवी की।
विज्ञापन
बता दें कि पूर्व विधायक किशोर समरीते की तरफ से दायर अवमानना याचिका में कहा गया था कि बालाघाट जिले के तत्कालीन कलेक्टर दीपक आर्य ने कस्टम मिलिंग व चावल के अवैध कारोबारियों, कान्हा स्थित रिसोर्ट संचालकों, रेत ठेकेदारों, कंस्ट्रक्शन कंपनी से रिश्वत के रूप में महंगे गिफ्ट खुद व परिजनों के नाम पर लिए थे। इस संबंध में उन्होंने केन्द्र सरकार से शिकायत की थी। केन्द्र सरकार ने शिकायत पर कार्रवाई के लिए राज्य सरकार को निर्देशित किया था। राज्य सरकार ने जांच बालाघाट कलेक्टर को सौंप दी थी। तत्कालीन कलेक्टर दीपक आर्य ने खुद पर लगे आरोपों की स्वयं जांच करते हुए क्लीन चिट प्रदान कर दी।
विज्ञापन
तत्कालीन कलेक्टर द्वारा खुद की जांच किए जाने के खिलाफ उन्होंने केन्द्र सरकार से शिकायत की थी। केन्द्र सरकार ने प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। मुख्य सचिव द्वारा शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं किए जाने के कारण उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने जनवरी 2022 को अपने आदेश में कहा था कि नियमानुसार जिस अधिकारी पर आरोप लगे हैं, उसकी जांच वरिष्ठ अधिकारी द्वारा की जानी चाहिए। युगलपीठ ने याचिका का निराकरण करते हुए शिकायत की जांच के लिए उच्च स्तरीय कमेटी गठित करने के आदेश जारी किए थे। शिकायत सही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारी पर तथा गलत पाए जाने पर याचिकाकर्ता के खिलाफ विधि अनुसार कार्रवाई के आदेश भी हाईकोर्ट ने पारित किए थे।
विज्ञापन
हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी जांच के लिए उच्च स्तरीय कमेटी गठित नहीं किए जाने के कारण उक्त अवमानना याचिका दायर की गई है। याचिका की सुनवाई के बाद युगलपीठ ने अनावेदक पीएस जीडीए दीप्ति गौड़ मुखर्जी तथा पीएस राजस्व मनीष रस्तोगी को नोटिस जारी किए हैं। याचिका पर गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने उच्चस्तरीय जांच के लिए सरकार को अंतिम अवसर प्रदान किया है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता शिवेन्द्र पांडे ने पैरवी की।
