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MP News: पत्रकार ने मंत्री और उसके भाई से बताया जान को खतरा, हाईकोर्ट ने गृह सचिव, DGP को जारी किया नोटिस
Thu, 05 Oct 2023 08:39 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Thu, 05 Oct 2023 08:39 AM IST
सार
MP News: बालाघाट निवासी मिलिंद ठाकरे की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि वह सामाजिक कार्यकर्ता व पत्रकार है। उसने मंत्री रामकिशोर कांवरे के भाई राजकुमार कांवरे के खिलाफ आवाज उठाई थी। जिसके कारण वह लोग उससे दुर्भावना रखने लगे।
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MP हाईकोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
मध्यप्रदेश सरकार में आयुष मंत्री व परसावाड़ा विधायक रामकिशोर कांवरे व उनके भाई से खुद व परिवार को खतरा होने की आशंका व्यक्त करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। जस्टिस संजय द्धिवेदी की एकलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए गृह सचिव, डीजीपी सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ता बालाघाट निवासी मिलिंद ठाकरे की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि वह सामाजिक कार्यकर्ता व पत्रकार है। उसने मंत्री रामकिशोर कांवरे के भाई राजकुमार कांवरे के खिलाफ आवाज उठाई थी। जिसके कारण वह लोग उससे दुर्भावना रखने लगे। उसे झूठे मामले में फंसाने की धमकियां दी जा रहीं है। जिससे कारण उसे तथा परिवार को खतरा बना हुआ है।
याचिका में कहा गया था कि राजकुमार कांवरे को 2003 में हत्या के आरोप में दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर परिवीक्षा अधिनियम के तहत उसे जेल से बाहर ले आया गया। उसकी पूर्ववत विभिन्न आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता बनी हुई है। परिवीक्षा अधिनियम में साफ किया गया है कि जेल से बाहर आने पर आपराधिक गतिविधियां साबित होने पर वापस जेल आना पड़ता है। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है। आवेदक की ओर से कहा गया कि वह राजकुमार कांवरे के भ्रष्टाचार, अवैध रेत खनन, शराब की अवैध बिक्री और जुआ में संरक्षण को उजागर कर चुका है। इसीलिए वह उससे दुर्भावना रखता है। याचिका की सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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याचिकाकर्ता बालाघाट निवासी मिलिंद ठाकरे की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि वह सामाजिक कार्यकर्ता व पत्रकार है। उसने मंत्री रामकिशोर कांवरे के भाई राजकुमार कांवरे के खिलाफ आवाज उठाई थी। जिसके कारण वह लोग उससे दुर्भावना रखने लगे। उसे झूठे मामले में फंसाने की धमकियां दी जा रहीं है। जिससे कारण उसे तथा परिवार को खतरा बना हुआ है।
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याचिका में कहा गया था कि राजकुमार कांवरे को 2003 में हत्या के आरोप में दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर परिवीक्षा अधिनियम के तहत उसे जेल से बाहर ले आया गया। उसकी पूर्ववत विभिन्न आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता बनी हुई है। परिवीक्षा अधिनियम में साफ किया गया है कि जेल से बाहर आने पर आपराधिक गतिविधियां साबित होने पर वापस जेल आना पड़ता है। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है। आवेदक की ओर से कहा गया कि वह राजकुमार कांवरे के भ्रष्टाचार, अवैध रेत खनन, शराब की अवैध बिक्री और जुआ में संरक्षण को उजागर कर चुका है। इसीलिए वह उससे दुर्भावना रखता है। याचिका की सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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