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MP News: मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के फॉर्मूले को चुनौती, हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर मांगा जवाब
Thu, 04 Apr 2024 08:26 PM IST
दिनेश शर्मा
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, जबलपुर
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Thu, 04 Apr 2024 08:26 PM IST
सार
याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया है कि वह साल 2019 तथा 2020 की परीक्षा के इंटरव्यू में शामिल हुई थी। होल्ड किए गए 13 प्रतिशत में उनका नाम है। इसके संबंध में भी उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई है। होल्ड की गई दोनों वर्ग की 13 प्रतिशत सूची को गोपनीय रखा गया है।
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा अपनाये जा रहे 87:13 फार्मूले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट जस्टिस शील नागू तथा जस्टिस अमरनाथ केसरवानी की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। युगलपीठ ने एमपीपीएससी को निर्देशित किया है कि साल 2019 तथा 2020 की परीक्षाओं के लिए होल्ड किए गए 13 प्रतिशत चयनित दोनों वर्ग की सूची प्रस्तुत करें।
याचिकाकर्ता प्रज्ञा शर्मा, मोना मिश्रा, प्रियंका तिवारी सहित अन्य पांच की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि प्रदेश सरकार द्वारा ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया गया था। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने ओबीसी वर्ग के लिए बनाए गए आरक्षण पर रोक लगा दी थी। इसके बाद मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग ने 87:13 प्रतिशत का नया फॉर्मूला तैयार कर नियुक्ति प्रदान कर दी। इस फॉर्मूले के तहत नियुक्ति के लिए 13 प्रतिशत सामान्य तथा 13 प्रतिशत ओबीसी वर्ग के चयनित अभ्यर्थियों के रिजल्ट होल्ड कर लिए गए। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि ऐसा फॉर्मूला उनकी तरफ से नहीं दिया गया है।
याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया है कि वह साल 2019 तथा 2020 की परीक्षा के इंटरव्यू में शामिल हुई थी। होल्ड किए गए 13 प्रतिशत में उनका नाम है। इसके संबंध में भी उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई है। होल्ड की गई दोनों वर्ग की 13 प्रतिशत सूची को गोपनीय रखा गया है। एमपीपीएससी ने मनमाने तरीके से उक्त फॉर्मूला लागू किया है। याचिका की सुनवाई के बाद युगलपीठ ने राज्य सरकार तथा एमपीपीएससी को नोटिस जारी करते हुए होल्ड की गई 13 प्रतिशत अभ्यर्थियों की सूची पेश करने के आदेश जारी किए हैं। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने पैरवी की।
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याचिकाकर्ता प्रज्ञा शर्मा, मोना मिश्रा, प्रियंका तिवारी सहित अन्य पांच की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि प्रदेश सरकार द्वारा ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया गया था। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने ओबीसी वर्ग के लिए बनाए गए आरक्षण पर रोक लगा दी थी। इसके बाद मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग ने 87:13 प्रतिशत का नया फॉर्मूला तैयार कर नियुक्ति प्रदान कर दी। इस फॉर्मूले के तहत नियुक्ति के लिए 13 प्रतिशत सामान्य तथा 13 प्रतिशत ओबीसी वर्ग के चयनित अभ्यर्थियों के रिजल्ट होल्ड कर लिए गए। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि ऐसा फॉर्मूला उनकी तरफ से नहीं दिया गया है।
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याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया है कि वह साल 2019 तथा 2020 की परीक्षा के इंटरव्यू में शामिल हुई थी। होल्ड किए गए 13 प्रतिशत में उनका नाम है। इसके संबंध में भी उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई है। होल्ड की गई दोनों वर्ग की 13 प्रतिशत सूची को गोपनीय रखा गया है। एमपीपीएससी ने मनमाने तरीके से उक्त फॉर्मूला लागू किया है। याचिका की सुनवाई के बाद युगलपीठ ने राज्य सरकार तथा एमपीपीएससी को नोटिस जारी करते हुए होल्ड की गई 13 प्रतिशत अभ्यर्थियों की सूची पेश करने के आदेश जारी किए हैं। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने पैरवी की।
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