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MP News: CBI पात्र पाए गए नर्सिंग कॉलेज की दोबारा जांच करे, हाईकोर्ट ने वीडियो-फोटोग्राफी कराने के दिए निर्देश
Tue, 28 May 2024 08:09 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: अरविंद कुमार
Updated Tue, 28 May 2024 08:09 PM IST
सार
जबलपुर हाईकोर्ट ने कहा, जुडिशल मजिस्ट्रेट की उपस्थित में सीबीआई पात्र पाए गए नर्सिंग कॉलेज की दोबारा जांच करे। हाईकोर्ट ने वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कराने के निर्देश दिए हैं।
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जबलपुर हाईकोर्ट ने आदेश जारी किए हैं कि जुडिशल मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में पात्र पाए गए 169 नर्सिंग कॉलेज की दोबारा जांच सीबीआई द्वारा की जाए। जस्टिस संजय द्विवेदी तथा जस्टिस एके पालीवाल की युगलपीठ ने सीबीआई को निर्देशित किया है कि जांच की वीडियोग्राफी व फोटोग्राफी करवाई जाए। इस दौरान कॉलेज के संचालक पर प्राचार्य भी अनिवार्य रूप से उपस्थित रहेंगे। याचिका पर अगली सुनवाई 15 जुलाई को निर्धारित की गई है।
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लॉ स्टूडेंट एसोसिएशन की तरफ से फर्जी नर्सिंग कॉलेजों को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने प्रदेश में संचालित 364 नर्सिंग कॉलेजों में से 56 कॉलेज की जांच पर सर्वोच्च न्यायालय में जांच पर स्थगन आदेश जारी किए हैं। सीबीआई के द्वारा 308 नर्सिंग कॉलेजों की जांच की गई थी। इसमें से 169 कॉलेज पात्र पाए गए हैं। जांच में 74 कॉलेज ऐसे हैं, जिसमें सुधार किया जा सकता है तथा 65 कॉलेज अपात्र हैं।
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याचिकाकर्ता की तरफ से हाईकोर्ट में पेश किए गए आवेदन में कहा गया था कि सीबीआई की तरफ से पेश की गई जांच रिपोर्ट पर विश्वास करते हुए नर्सिंग कॉलेजों के संचालन तथा छात्रों को परीक्षा में शामिल किए जाने के संबंध में हाईकोर्ट ने पूर्व में विस्तृत आदेश जारी किए थे। वर्तमान परिस्थिति में यह बात सामने आई है कि सीबीआई की पूरी जांच रिपोर्ट भरोसेमंद नहीं है। सीबीआई के जो अधिकारी नर्सिंग कॉलेजों की जांच का हिस्सा थे, उन पर भ्रष्टाचार में लिप्त का आरोप है।
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दिल्ली सीबीआई ने उनके खिलाफ एफआईआर कर उन्हें गिरफ्तार किया गया है। आवेदन के साथ सीबीआई दिल्ली द्वारा दर्ज एफआईआर की प्रति भी पेश की गई। आवेदन में कहा गया था कि ऐसी स्थिति में सीबीआई की जांच रिपोर्ट पर विश्वास नहीं किया जा सकता है। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद उक्त आदेश पारित किए। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आलोक बागरेचा ने पैरवी की।
रवि परमार ने कहा कि मध्यप्रदेश शासन ने सीबीआई जांच में अपात्र (अनसूटेबल) पाए गए 66 नर्सिंग कॉलेजों को सील करने के आदेश दिए हैं, जिससे स्पष्ट हो गया कि मध्यप्रदेश में फर्जी नर्सिंग कॉलेज संचालित हो रहे थे। हम भी लंबे समय से इसी बात की शिकायत कर रहे थे। लेकिन अधिकारियों द्वारा मामले को न सिर्फ दबाया जा रहा था, बल्कि उल्टे मुझे जेल भेज दिया जाता था।
परमार ने मांग करते हुए कहा कि जिन 66 नर्सिंग कॉलेज को सील करने के आदेश दिए हैं, उन कॉलेजों को मान्यता देने वाले अधिकारियों पर भी तत्काल कार्रवाई होना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी मुलाकात के लिए समय मांगा है। परमार ने कहा कि सीएम यादव अगर मुलाकात के लिए समय देते हैं तो कागजों में चल रहे कई अन्य कॉलेजों की लिस्ट भी साक्ष्य सहित उन्हें हम सौंपेंगे, जिससे जो मध्यप्रदेश नर्सिंग कालेजों ने जो गंदगी फैलाई है, उसका सफाया हो सके।
परमार ने कहा कि नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़े की लड़ाई हम अंतिम सांस तक लड़ेंगे। उन्होंने नर्सिंग माफियाओं से खतरे की भी आशंका व्यक्त की है। परमार ने कहा कि जो लोग सीबीआई अफसरों को खरीद सकते हैं, वो मेरे साथ कुछ भी कर सकते हैं। परमार ने राज्य सरकार से सुरक्षा मुहैया कराने की भी मांग की है।
