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MP High Court: सगे भाई को लीवर टिश्यू दान करने के लिए पत्नी की अनुमति आवश्यक नहीं, हाईकोर्ट का अहम फैसला

Tue, 06 Feb 2024 06:54 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: अरविंद कुमार Updated Tue, 06 Feb 2024 06:54 PM IST
सार

अपने शरीर का अंग सगे भाई को दान करने के मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने अहम निर्णय सुनाया है। अपने भाई की जान बचाने के लिए पत्नी की अनुमति आवश्यक नहीं है।

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MP High Court Wife permission not necessary to donate liver tissue to brother
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जस्टिस राज मोहन सिंह ने अपने अहम फैसले में कहा है कि सगे भाई को लीवर टिश्यू दान करने के लिए पत्नी की अनुमति आवश्यक नहीं है। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि आपत्ति करने वाली पत्नी को अधिक महत्व दिया गया है। जबकि याचिकाकर्ता स्वेच्छा से अपने भाई को लीवर टिश्यू देना चाहता है। उसकी इच्छा को कोई महत्व नहीं दिया गया, जो अपने अंग का दान देकर भाई की जान बचाना चाहता है।

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गुलमोहर कॉलोनी भोपाल निवासी विकास अग्रवाल तथा उसकी आभा अग्रवाल की तरफ से उक्त याचिका दायर की गई थी, जिसमें कहा गया था कि आभा तिवारी का पति तथा विकास का भाई का लीवर ट्रांस प्लांट मुम्बई स्थित कोकिला बेन हॉस्पिटल में होना था। मेडिकल जांच में विकास के लीवर टिश्यू अंग प्रत्यारोपण के लिए उचित पाये गये थे। विकास स्वेच्छा से लीवर टिश्यू प्रदान करने के लिए तैयार था। सभी मेडिकल कार्रवाई पूर्ण हो गई थी। विकास की पत्नी ने अंग दान के लिए सहमति देने से इनकार कर दिया था, जिसके कारण अस्पताल प्रबंधन ने अंग प्रत्यारोपण करने से इनकार कर दिया।
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एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि पति के स्वास्थ्य व जीवन की चिंता एक सामाजिक मानदंड है। लीवर ट्रांस प्लांट से उसके पति की मौत हो जायेगी, ऐसा नहीं सोचना चाहिये। सर्वोच्च न्यायालय सहित अन्य न्यायालय द्वारा पारित निर्णय का हवाला देते हुए एकलपीठ ने कहा है कि याचिकाकर्ता ने स्वेच्छा से उक्त निर्णय लिया है। पत्नी सहित कई अन्य उसमें दखलंदाजी नहीं कर सकता है। नोबेल पुरस्कार विजेता फ्रांसीसी दार्शनिक अल्बर्ट कैमस द्वारा लिखी पंक्ति अमुक्त दुनिया से निपटने का एक मात्र मार्ग यह है कि स्वतंत्र रूप से आपने की आपका अस्तित्व ही विरोध का कार्य है का उल्लेख करते हुए एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि एक व्यक्ति अपने बीमार भाई को लीवर दान करना चाहता है, राज्य सरकार की अनावश्यक हस्तक्षेप कार्रवाई उसमें बांधा न बने।

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