फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Jabalpur News ›   MP High court stays diamond mining in Bakswaha forest

बक्सवाहा जंगल में हीरा खनन पर रोक: मप्र हाईकोर्ट ने कहा- पाषाण युग की रॉक पेंटिंग्स को नुकसान पहुंच सकता है

Wed, 27 Oct 2021 02:46 PM IST
रवींद्र भजनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: रवींद्र भजनी Updated Wed, 27 Oct 2021 02:46 PM IST
सार

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बक्सवाहा जंगल में हीरा खनन पर रोक लगा दी है। पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट में कहा गया है कि जंगल में रॉक पेंटिंग पाषाण युग के मध्यकाल की है। हीरा खनन से इन पेंटिंग को नुकसान पहुंच सकता है।  

विज्ञापन
MP High court stays diamond mining in Bakswaha forest
बक्सवाहा का जंगल, जहां हीरा खनन पर हाईकोर्ट ने रोक लगाई है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बक्सवाहा जंगल में हीरा खनन पर रोक लगा दी है। पुरातत्व विभाग ने जांच कर हाईकोर्ट को रिपोर्ट पेश की है। इसमें कहा गया है कि बक्सवाहा जंगल में रॉक पेंटिंग पाषाण युग के मध्यकाल की है। हीरा खनन से इन पेंटिंग को नुकसान पहुंच सकता है। रिपोर्ट पढ़ने के बाद हाईकोर्ट ने तत्काल प्रभाव से खनन पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए हैं।
विज्ञापन


मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय मलिमथ और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगल पीठ के सामने बक्सवाहा के जंगलों में हीरा खनन के खिलाफ दो याचिकाएं दायर की गई थी। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ पीजी नाजपांडे की याचिका में बक्सवाहा के जंगल में 25 हजार साल पहले की रॉक पेंटिंग को पुरातात्विक संपदा घोषित करने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया है कि रॉक पेंटिंग की जानकारी देने के बाद भी पुरातत्व विभाग ने इसे संरक्षित क्षेत्र घोषित नहीं किया है। इस क्षेत्र में 364 हैक्टेयर जमीन में प्रस्तावित हीरा खनन कभी भी शुरू हो सकता है। यह पेंटिंग पाषाण युग में मानव जीवन की जानकारी का महत्वपूर्ण स्रोत है। पर्यावरण तथा बक्सवाहा के जंगल से जुड़े बिंदु पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में भी याचिका दायर की गई थी। पुरातात्विक संपदा का मामला एनजीटी के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है, इस कारण हाईकोर्ट में यह याचिका दाखिल हुई है।
विज्ञापन


10-12 जुलाई के बीच हुआ था सर्वे
याचिकाकर्ता के वकील सुरेंद्र वर्मा ने बताया कि 10 से 12 जुलाई के बीच पुरातत्व विभाग ने बक्सवाहा जंगल में सर्वे का काम पूरा कर लिया था। इस रिपोर्ट को हाईकोर्ट में पेश किया गया। इसी सर्वे के आधार पर याचिकाकर्ता की ओर से खनन पर रोक लगाने की मांग की गई थी। पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस जंगल में कल्चुरी कल्चुरी और चंदेल काल की मूर्तियां और स्तंभ हैं। अगर कोई खनन गतिविधि होती है तो इस पुरासंपदा को नुकसान पहुंच सकता है। युगलपीठ ने इससे पहले याचिका की सुनवाई करते हुए पुरातत्व विभाग को सर्वे कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे।  
विज्ञापन
विज्ञापन


दूसरी याचिका में पर्यावरण को बनाया है मुद्दा
हरियाणा निवासी रमित बासु, महाराष्ट्र निवासी हर्षवर्धन मेलांता व उप्र निवासी पंकज कुमार ने एक और याचिका दाखिल की है। इसमें कहा गया है कि हीरा खनन के लिए आदित्य बिड़ला ग्रुप की एस्सल माइनिंग एंड इंड्रस्ट्री को छतरपुर स्थित बक्सवाहा के जंगल की 382 हैक्टेयर जमीन राज्य सरकार ने 50 साल की लीज पर दी है। इसके लिए सवा दो लाख पेड़ों को काटा जाना है. यह जंगल पन्ना टाइगर रिजर्व से लगा हुआ है और यह टाइगर कॉरिडोर में आता है। इसके लिए एनटीसीए और वाइल्ड लाइफ बोर्ड से अनुमति लेनी चाहिए थी, जो नहीं ली गई है। आवेदकों का कहना है कि वन्यजीवों को भी जीने का अधिकार है और अगर इन जंगलों को काटा गया तो वे कहां जाएंगे? बक्सवाहा जैसा जंगल बनने में हजारों साल लग जाते हैं। राज्य सरकार का लाभ के लिए जंगल को लीज पर देना गलत है। 
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed