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MP High court: फर्जी नर्सिंग कॉलेज मामले में कोर्ट सख्त, 24 घंटे में उपलब्ध करवाओ डिजिटल डाटा
Wed, 20 Jul 2022 10:48 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 20 Jul 2022 10:48 PM IST
सार
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि डाटा उपलब्ध नहीं करवाने पर न्यायालय सभी नर्सिंग कॉलेजों को बंद करने के आदेश पारित कर सकता है। याचिका पर अगली सुनवाई 22 जुलाई को निर्धारित है।
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
एमपी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने 24 घंटे के अंदर प्रदेश के 453 नर्सिंग कॉलेज की मान्यता तथा फैकल्टियों के संबंध में पूरा डिजिटल डाटा याचिकाकर्ता को उपलब्ध करवाने के निर्देश जारी किए हैं। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि डाटा उपलब्ध नहीं करवाने पर न्यायालय सभी नर्सिंग कॉलेजों को बंद करने के आदेश पारित कर सकता है। याचिका पर अगली सुनवाई 22 जुलाई को निर्धारित है।
लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि शैक्षणिक सत्र 2020-21 में प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में 55 नर्सिंग कॉलेज को मान्यता दी गई थी। मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल ने निरीक्षण के बाद इन कॉलेजों की मान्यता दी थी। वास्तविकता में ये कॉलेज सिर्फ कागज में संचालित हो रहे हैं। ऐसा कोई कॉलेज नहीं है जो निर्धारित मापदण्ड पूरा करता है। अधिकांश कॉलेज की निर्धारित स्थल में बिल्डिंग तक नहीं है। कुछ कॉलेज सिर्फ चार-पांच कमरों में संचालित हो रहे हैं। ऐसे कॉलेज में प्रयोगशाला सहित अन्य आवश्यक संरचना नहीं है। बिना छात्रावास ही कॉलेज का संचालन किया जा रहा है। नर्सिंग कॉलेज को फर्जी तरीके से मान्यता दिए जाने के आरोप में मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल के रजिस्टार को पद से हटा दिया गया था। फर्जी नर्सिंग कॉलेज संचालित होने के संबंध में उन्होंने शिकायत की थी। शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं होने के कारण उक्त याचिका दायर की गई है।
याचिका में साथ ऐसे कॉलेज की सूची तथा फोटो प्रस्तुत किए गए थे। याचिका में कहा गया था कि जब कॉलेज ही नहीं हैं तो छात्रों को कैसे पढ़ाया जाता होगा। याचिका की सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने प्रदेश के सभी नर्सिंग कॉलेजों की निरीक्षण रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट के निर्देश पर प्रदेश के 453 नर्सिंग कॉलेज के मान्यता संबंधित ओरिजनल दस्तावेज पेश किए गए थे। युगलपीठ ने याचिकाकर्ता को दस्तावेज के निरीक्षण की अनुमति प्रदान की थी।
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पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से युगलपीठ को बताया गया कि किस कॉलेज के कितने पेज के दस्तावेज हैं, इसका उल्लेख किया जाता है। हाईकोर्ट में पेष किए गए 453 नर्सिंग कॉलेज के दस्तावेजों में 37759 पेश गायब हैं। 80 कॉलेज ऐसे हैं, जिसमें एक व्यक्ति उसी समय में कई स्थानों में काम कर रहा है। दस कॉलेज में एक ही व्यक्ति एक समय में प्राचार्य था और उन कॉलेजों के बीच की दूरी सैकड़ों किलोमीटर थी। टीचिंग स्टाफ भी एक समय में पांच-पांच कॉलेज में एक ही समय में सेवा दे रहा था। पिछली सुनवाई के दौरान न्यायालय ने याचिकाकर्ता को डिजिटल डाटा उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए थे।
याचिका पर बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से बताया गया कि अभी तक उन्हें डिजिटल डाटा उपलब्ध नहीं करवाया गया है। सरकार की तरफ से बताया गया कि एग्जाम सहित अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज होने के कारण याचिकाकर्ता को पासवर्ड नहीं दिया गया है। सुनवाई के दौरान नर्सिंग कॉलेज एसोसिएशन की तरफ से इंटरविनर बनने का आवेदन पेश करते हुए याचिकाकर्ता का डाटा उपलब्ध नहीं करवाने का अनुरोध किया गया। युगलपीठ ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को पासवर्ड देने नहीं कहा गया है। उन्हे सिर्फ डाटा उपलब्ध करवाने कहा गया है। डाटा उपलब्ध नहीं करवाने पर न्यायालय सभी नर्सिंग कॉलेजों को बंद करने के निर्देश जारी कर सकती है। एसोसिएशन के 100 कॉलेजों की तरफ से इंटरविनर बनने का आवेदन पेश किया गया है, उनके अधिवक्ता डाटा उपलब्ध करवा दें। डाटा उपलब्ध करवाने की बजाय संस्थानों का पक्ष रखा जा रहा है। सुनवाई के बाद युगलपीठ ने उक्त निर्देश जारी किये। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आलोक बागरेचा, सरकार की तरफ से उप महाधिवक्ता स्वापनिल गांगुली हुए। इंटरविनर बनने के लिए अधिवक्ता सिद्धार्थ राधेलाल गुप्ता ने आवेदन दायर किया।
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लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि शैक्षणिक सत्र 2020-21 में प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में 55 नर्सिंग कॉलेज को मान्यता दी गई थी। मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल ने निरीक्षण के बाद इन कॉलेजों की मान्यता दी थी। वास्तविकता में ये कॉलेज सिर्फ कागज में संचालित हो रहे हैं। ऐसा कोई कॉलेज नहीं है जो निर्धारित मापदण्ड पूरा करता है। अधिकांश कॉलेज की निर्धारित स्थल में बिल्डिंग तक नहीं है। कुछ कॉलेज सिर्फ चार-पांच कमरों में संचालित हो रहे हैं। ऐसे कॉलेज में प्रयोगशाला सहित अन्य आवश्यक संरचना नहीं है। बिना छात्रावास ही कॉलेज का संचालन किया जा रहा है। नर्सिंग कॉलेज को फर्जी तरीके से मान्यता दिए जाने के आरोप में मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल के रजिस्टार को पद से हटा दिया गया था। फर्जी नर्सिंग कॉलेज संचालित होने के संबंध में उन्होंने शिकायत की थी। शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं होने के कारण उक्त याचिका दायर की गई है।
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याचिका में साथ ऐसे कॉलेज की सूची तथा फोटो प्रस्तुत किए गए थे। याचिका में कहा गया था कि जब कॉलेज ही नहीं हैं तो छात्रों को कैसे पढ़ाया जाता होगा। याचिका की सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने प्रदेश के सभी नर्सिंग कॉलेजों की निरीक्षण रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट के निर्देश पर प्रदेश के 453 नर्सिंग कॉलेज के मान्यता संबंधित ओरिजनल दस्तावेज पेश किए गए थे। युगलपीठ ने याचिकाकर्ता को दस्तावेज के निरीक्षण की अनुमति प्रदान की थी।
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पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से युगलपीठ को बताया गया कि किस कॉलेज के कितने पेज के दस्तावेज हैं, इसका उल्लेख किया जाता है। हाईकोर्ट में पेष किए गए 453 नर्सिंग कॉलेज के दस्तावेजों में 37759 पेश गायब हैं। 80 कॉलेज ऐसे हैं, जिसमें एक व्यक्ति उसी समय में कई स्थानों में काम कर रहा है। दस कॉलेज में एक ही व्यक्ति एक समय में प्राचार्य था और उन कॉलेजों के बीच की दूरी सैकड़ों किलोमीटर थी। टीचिंग स्टाफ भी एक समय में पांच-पांच कॉलेज में एक ही समय में सेवा दे रहा था। पिछली सुनवाई के दौरान न्यायालय ने याचिकाकर्ता को डिजिटल डाटा उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए थे।
याचिका पर बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से बताया गया कि अभी तक उन्हें डिजिटल डाटा उपलब्ध नहीं करवाया गया है। सरकार की तरफ से बताया गया कि एग्जाम सहित अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज होने के कारण याचिकाकर्ता को पासवर्ड नहीं दिया गया है। सुनवाई के दौरान नर्सिंग कॉलेज एसोसिएशन की तरफ से इंटरविनर बनने का आवेदन पेश करते हुए याचिकाकर्ता का डाटा उपलब्ध नहीं करवाने का अनुरोध किया गया। युगलपीठ ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को पासवर्ड देने नहीं कहा गया है। उन्हे सिर्फ डाटा उपलब्ध करवाने कहा गया है। डाटा उपलब्ध नहीं करवाने पर न्यायालय सभी नर्सिंग कॉलेजों को बंद करने के निर्देश जारी कर सकती है। एसोसिएशन के 100 कॉलेजों की तरफ से इंटरविनर बनने का आवेदन पेश किया गया है, उनके अधिवक्ता डाटा उपलब्ध करवा दें। डाटा उपलब्ध करवाने की बजाय संस्थानों का पक्ष रखा जा रहा है। सुनवाई के बाद युगलपीठ ने उक्त निर्देश जारी किये। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आलोक बागरेचा, सरकार की तरफ से उप महाधिवक्ता स्वापनिल गांगुली हुए। इंटरविनर बनने के लिए अधिवक्ता सिद्धार्थ राधेलाल गुप्ता ने आवेदन दायर किया।
