{"_id":"65a559a883307abff40ac857","slug":"mp-high-court-appointment-to-post-of-projector-officer-was-done-illegally-barkatullah-university-replied-in-hc-2024-01-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"MP High Court: अवैधानिक तरीके से हुई थी प्रोजेक्ट ऑफिसर पद पर नियुक्ति, बरकतउल्ला विवि ने HC में दिया जवाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
MP High Court: अवैधानिक तरीके से हुई थी प्रोजेक्ट ऑफिसर पद पर नियुक्ति, बरकतउल्ला विवि ने HC में दिया जवाब
Mon, 15 Jan 2024 10:08 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: अरविंद कुमार
Updated Mon, 15 Jan 2024 10:08 PM IST
सार
प्रोजेक्ट ऑफिसर पद पर नियुक्ति अवैधानिक तरीके से हुई थी। मामले में बरकतउल्ला विवि ने जबलपुर हाईकोर्ट में जवाब दिया है।
विज्ञापन
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजधानी भोपाल की बरकतुल्ला विश्वविद्यालय में प्रोजेक्ट ऑफिसर के पद पर नरेन्द्र त्रिपाठी की नियुक्ति अवैधानिक रूप से की गई थी। उक्त जवाब विवि की ओर से हाईकोर्ट में दिया गया है।
विज्ञापन
जस्टिस संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने मामले में कहा कि विश्वविद्यालय इस संबंध में कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है। एकलपीठ ने कहा कि चूंकि विश्वविद्यालय ने स्वयं गलत नियुक्ति की बात स्वीकार कर ली है। इसलिए अब याचिका में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं बनता। इस मत के साथ नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका निरस्त कर दी।
विज्ञापन
उल्लेखनीय है कि भोपाल के भगवान सिंह राजपूत की ओर से यह याचिका दायर की गई थी, जिसमें आरोप था कि नियमों को दरकिनार करते हुए विश्वविद्यालय में नरेन्द्र त्रिपाठी की नियुक्ति प्रोजेक्ट ऑफिसर के पद पर की है। बिना स्वीकृति के इस पद पर नियुक्ति दी गई। इसके अलावा नियुक्ति के पहले कोई विज्ञापन भी जारी नहीं किया गया और न ही भर्ती प्रक्रिया का पालन किया गया।
विज्ञापन
पूर्व सुनवाई पर न्यायालय ने विश्वविद्यालय प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। विवि की ओर से जवाब पेश कर यह स्वीकार किया गया कि यह नियुक्ति अवैधानिक तरीके से की गई है। न्यायालय ने कहा कि जब नियोक्ता और नियुक्तिकर्ता अधिकारी स्वयं इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि नियुक्ति गलत है तो इस मामले में हस्तक्षेप का कोई कारण नहीं बचता। अब विवि स्वयं कार्रवाई के लिए स्वतंत्र है।
