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MP HC: पट्टे-संपत्ति स्वामी के आवेदन RO ने किया निरस्त, शासकीय भूमि पर अतिक्रमण मामले में रिज्वाइंडर पेश

Fri, 08 Sep 2023 09:59 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: अरविंद कुमार Updated Fri, 08 Sep 2023 09:59 PM IST
सार

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के भतीजे पर शासकीय भूमि पर अतिक्रमण मामले में हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ तथा जस्टिस एके सिंह की युगलपीठ ने रिज्वाइंडर पर जवाब पेश करने समय प्रदान करते हुए अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की है।
 

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MP HC RO rejected application of lease-property owner submitted a rejoinder in encroachment case
जबलपुर हाईकोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

होशंगाबाद में नगर पालिका की 60 हजार वर्गफीट जमीन पर तत्कानील विधानसभा अध्यक्ष के भतीजे द्वारा अतिक्रमण किए जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका पर शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान अनावेदक की तरफ से पेश किए गए रिज्वाइंडर में कहा गया कि राजस्व विभाग द्वारा पटटे व भूमि स्वामी का आवेदन पहले ही खारिज किया जा चुका है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ तथा जस्टिस एके सिंह की युगलपीठ ने रिज्वाइंडर पर जवाब पेश करने समय प्रदान करते हुए अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।

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याचिकाकर्ता वीरेंद्र यादव की तरफ से साल 2018 में दायर की गई याचिका में कहा गया है कि अरुण शर्मा होशंगाबाद में नर्मदा एजुकेशन नामक संस्था का संचालन करते हुए संस्था के संचालक होने के साथ-साथ वह विधानसाभ अध्यक्ष सीताशरण शर्मा के भतीजे हैं। संस्था की आड़ में उन्होंने नगर पालिका की 60 हजार वर्गफीट जमीन पर कब्जा कर रखा है। इस संबंध में जनसुनवाई के दौरान जिला कलेक्टर से शिकायत की गई थी। कलेक्टर ने शिकायात पर जांच के निर्देश नायब तहसीलदार को दिए थे।
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नायब तहसीलदार द्वारा एसडीएम को सौंपी गई रिपोर्ट में शिकायत को सही बताते हुए कहा है कि नर्मदा एजुकेशन संस्था ने शासकीय जमीन पर कब्जा कर रखा है। नगर पालिका के सीएमओ को अतिक्रमण हटाने उचित कार्यवाही करनी चाहिए। नायब तहसील की जांच रिपोर्ट के बावजूद भी शासकीय जमीन को मुक्त करवाने किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं किए जाने को चुनौती दी गई थी।
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याचिका में आरोप लगाते हुए कहा गया है कि विधानसभा अध्यक्ष के राजनीतिक प्रभाव के कारण उसके भतीजे के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। अनावेदक की तरफ से पेश किए गए जवाब में कहा गया था कि उक्त जमीन साल 1957 में सोसायटी से खरीदी थी। इसके बाद साल 1988 में जमीन के पट्टे के लिए आवेदन किया था।


याचिकाकर्ता की तरफ से लिखित आवेदन में कहा गया था कि उक्त जमीन एजुकेशन सोसायटी को आवंटित की गई थी। एजुकेशन सोसायटी को आवंटित जमीन बेची नहीं जा सकती है। राजस्व अधिकारी ने उनकी रजिस्ट्री को अवैध माना है। इसके अलावा राजस्व अधिकारी ने उनके पटटे का आवेदन भी खारिज कर दिया है। रिज्वाइंडर पर जवाब पेश करने के लिए आवेदक ने समय प्रदान करने का आग्रह किया, जिसे स्वीकार करते हुए उक्त आदेश जारी किये गये। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता केके गौतम ने पैरवी की।

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