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MP: ‘बेहया’ नज्म शेयर करने पर दर्ज FIR रद्द, हाईकोर्ट बोला- आलोचना करना मौलिक अधिकार
Sat, 09 May 2026 02:37 PM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Sat, 09 May 2026 02:37 PM IST
सार
जबलपुर हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर उर्दू नज़्म ‘बेहया’ का हिस्सा शेयर करने पर शिक्षक फैजान अंसारी के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द कर दी। कोर्ट ने कहा कि पब्लिक डोमेन में मौजूद साहित्य को बिना बदलाव साझा करना और आलोचना करना संविधान के अनुच्छेद 19(1) के तहत मौलिक अधिकार है।
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(फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जबलपुर हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर मशहूर शायर शोएब कियानी की उर्दू नज़्म ‘बेहया’ का हिस्सा शेयर करने के मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि किसी कविता या नज़्म को बिना बदलाव के साझा करना और कड़े शब्दों में राय या आलोचना करना संविधान के तहत मिले मौलिक अधिकारों के दायरे में आता है। यह आदेश हाईकोर्ट के जस्टिस बीपी शर्मा की एकलपीठ ने फैजान अंसारी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
शिक्षक के खिलाफ दर्ज किया गया था मामला
बैतूल निवासी फैजान अंसारी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया था कि वह पेशे से शिक्षक हैं और उनका रिकॉर्ड पूरी तरह बेदाग है। उनके खिलाफ पहले कभी कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं हुआ। याचिका में कहा गया कि उन्होंने 22 जुलाई को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर मशहूर उर्दू नज़्म ‘बेहया’ का एक हिस्सा अपलोड किया था। उन्होंने पोस्ट में किसी प्रकार का कमेंट, बदलाव या अतिरिक्त संदेश नहीं जोड़ा था।
ये भी पढ़ें- NCRB रिपोर्ट में खुलासा: पुलिस हिरासत से आरोपी फरार होने में मध्य प्रदेश देश में अव्वल
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पुलिस ने फोन कर बुलाया, मोबाइल किया जब्त
याचिकाकर्ता के अनुसार, पोस्ट वायरल होने के बाद चिचोली पुलिस ने उन्हें शाम के समय फोन कर थाने बुलाया और उनका मोबाइल फोन जब्त कर लिया। उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी कि वीडियो का कंटेंट आपत्तिजनक और कथित तौर पर महिलाओं के प्रति नफरत फैलाने वाला था। इसके बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 353(2) के तहत मामला दर्ज कर लिया।
हाईकोर्ट ने कहा- कानून का गलत इस्तेमाल हुआ
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने केवल पब्लिक डोमेन में उपलब्ध नज़्म का हिस्सा सोशल मीडिया पर शेयर किया था और उसमें किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की गई थी। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि राय व्यक्त करना और आलोचना करना संविधान के अनुच्छेद 19(1) के तहत संरक्षित मौलिक अधिकार है। केवल किसी साहित्यिक रचना को साझा करने के आधार पर आपराधिक मामला दर्ज करना कानून की प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
हाईकोर्ट ने FIR निरस्त करने के दिए आदेश
सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने फैजान अंसारी के खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त करने के आदेश जारी कर दिए। कोर्ट के इस फैसले को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में अहम माना जा रहा है।
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शिक्षक के खिलाफ दर्ज किया गया था मामला
बैतूल निवासी फैजान अंसारी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया था कि वह पेशे से शिक्षक हैं और उनका रिकॉर्ड पूरी तरह बेदाग है। उनके खिलाफ पहले कभी कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं हुआ। याचिका में कहा गया कि उन्होंने 22 जुलाई को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर मशहूर उर्दू नज़्म ‘बेहया’ का एक हिस्सा अपलोड किया था। उन्होंने पोस्ट में किसी प्रकार का कमेंट, बदलाव या अतिरिक्त संदेश नहीं जोड़ा था।
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पुलिस ने फोन कर बुलाया, मोबाइल किया जब्त
याचिकाकर्ता के अनुसार, पोस्ट वायरल होने के बाद चिचोली पुलिस ने उन्हें शाम के समय फोन कर थाने बुलाया और उनका मोबाइल फोन जब्त कर लिया। उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी कि वीडियो का कंटेंट आपत्तिजनक और कथित तौर पर महिलाओं के प्रति नफरत फैलाने वाला था। इसके बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 353(2) के तहत मामला दर्ज कर लिया।
हाईकोर्ट ने कहा- कानून का गलत इस्तेमाल हुआ
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने केवल पब्लिक डोमेन में उपलब्ध नज़्म का हिस्सा सोशल मीडिया पर शेयर किया था और उसमें किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की गई थी। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि राय व्यक्त करना और आलोचना करना संविधान के अनुच्छेद 19(1) के तहत संरक्षित मौलिक अधिकार है। केवल किसी साहित्यिक रचना को साझा करने के आधार पर आपराधिक मामला दर्ज करना कानून की प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
हाईकोर्ट ने FIR निरस्त करने के दिए आदेश
सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने फैजान अंसारी के खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त करने के आदेश जारी कर दिए। कोर्ट के इस फैसले को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में अहम माना जा रहा है।
