{"_id":"62fcf42215fdf214a911d264","slug":"madhya-pradesh-high-court-strict-in-fake-nursing-college-case","type":"story","status":"publish","title_hn":"Madhya Pradesh: फर्जी नर्सिंग कॉलेज मामले में हाईकोर्ट सख्त, कहा- कितने कॉलेजों पर की कार्रवाई, डिटेल पेश करो","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Madhya Pradesh: फर्जी नर्सिंग कॉलेज मामले में हाईकोर्ट सख्त, कहा- कितने कॉलेजों पर की कार्रवाई, डिटेल पेश करो
Wed, 17 Aug 2022 07:29 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 17 Aug 2022 07:29 PM IST
सार
फर्जी नर्सिंग कॉलजों के मामले में हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है। लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों ने नाराज कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि 24 घंटे में जानकारी दी जाए कि कितने नियम विरुद्ध कॉलेजों पर कार्रवाई की गई है।
विज्ञापन
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मध्य प्रदेश में संचालित को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका पर बुधवार को हुई सुनवाई के बाद हाईकोई के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने निर्देश जारी किए हैं कि कितने कॉलेज नियम अनुसार संचालित हैं और नियम विरुद्ध संचालित कॉलेज के खिलाफ की गई कार्रवाई का ब्यौरा 24 घंटों में पेश किया जाए। युगलपीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई गुरुवार को निर्धारित की है।
बता दें कि लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि शैक्षणिक सत्र 2020-21 में प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में 55 नर्सिंग कॉलेज को मान्यता दी गई थी। मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल ने निरीक्षण के बाद इन कॉलेजों की मान्यता दी थी। वास्तविकता में ये कॉलेज सिर्फ कागज में संचालित हो रहे हैं। ऐसा कोई कॉलेज नहीं है जो निर्धारित मापदण्ड पूरा करता है। अधिकांश कॉलेज की निर्धारित स्थल में बिल्डिंग तक नहीं है। कुछ कॉलेज सिर्फ चार-पांच कमरों में संचालित हो रहे हैं। ऐसे कॉलेज में प्रयोगशाला सहित अन्य आवश्यक संरचना नहीं है। बिना छात्रावास ही कॉलेज का संचालन किया जा रहा है। नर्सिंग कॉलेज को फर्जी तरीके से मान्यता दिए जाने के आरोप में मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल के रजिस्टार को पद से हटा दिया गया था। फर्जी नर्सिंग कॉलेज संचालित होने के संबंध में उन्होंने शिकायत की थी। शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं होने के कारण उक्त याचिका दायर की गई है। याचिका में साथ ऐसे कॉलेज की सूची तथा फोटो प्रस्तुत किए गए थे।
याचिका की सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने प्रदेश के सभी नर्सिंग कॉलेजों की निरीक्षण रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट के निर्देश पर प्रदेश के 453 नर्सिंग कॉलेज के मान्यता संबंधित ओरिजनल दस्तावेज पेश किए गए थे। युगलपीठ ने याचिकाकर्ता को दस्तावेज के निरीक्षण की अनुमति प्रदान की थी। निरीक्षण के बाद याचिकाकर्ता ने दस्तावेजों से 37759 पेज गायब होने की जानकारी हाईकोर्ट को दी थी। इसके अलावा 80 कॉलेज में ऐसे हैं जिसमें एक व्यक्ति उसकी समय में कई स्थानों में काम कर रहा है। दस कॉलेज में एक ही व्यक्ति एक समय में प्राचार्य है और उन कॉलेजों के बीच की दूरी सैकड़ों किलोमीटर है। टीचिंग स्टाफ भी एक समय में पांच-पांच कॉलेज में एक ही समय में सेवा दे रहा था। सुनवाई के बाद न्यायालय ने 24 घंटे में डिजिटल डाटा उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए थे।
विज्ञापन
पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से युगलपीठ को बताया गया था कि ग्वालियर खंडपीठ ने अपने क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आने वाले नर्सिंग कॉलेज की जांच के लिए एक कमेटी गठित करने के आदेश दिए थे। इस प्रकार जांच के लिए एक कमेटी गठित कर दी जाए। याचिकाकर्ता ने आपत्ति करते हुए बताया कि कमेटी ने सौफिया नर्सिंग कॉलेज तथा पिताम्बरा नर्सिंग कॉलेज को क्लीन चीट दी थी। इस दौरान कॉलेज के फैकल्टी दूसरे कॉलेज में पढ़ा रहे है। इसके बावजूद भी नर्सिंग काउंसिल ने उनका एफिलेशन रिन्यू कर दिया है। युगलपीठ ने नर्सिंग कॉलेज की फैकल्टी के संबंध में मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल तथा डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन को हलफनामा पेश करने के निर्देश जारी किए थे।
याचिका पर मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान पेश किए गए हलफनामे में बताया गया था कि फैकल्टी के संबंध में उन्होंने कॉलेजों को नोटिस जारी कर जानकारी मांगी थी। कॉलेज ने फैकल्टी के संबंध में उक्त जानकारी दी है। तीन कॉलेजों ने एक ही व्यक्ति को एक समय में अपना फैकल्टी बताया है। इसके अलावा MSc नर्सिंग का रेगुलर छात्र फैकल्टी के तौर पर बीसीसी नर्सिंग या डिप्लोमा कोर्स करने वाले छात्रों को पढ़ा रहा है। युगलपीठ ने कमेटी द्वारा ग्वालियर कोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश जारी किए थे।
याचिका पर बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान युगलपीठ के समक्ष कमेटी की रिपोर्ट पेश की गई। सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से कहा गया कि वह किसी भी तरह की जांच के लिए तैयार है। नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल की तरफ से जांच कमेटी गठित करने का आग्रह किया गया। युगलपीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि जांच कमेटी को प्रदेश दर्शन नहीं करवाना है। युगलपीठ ने 24 घंटों में कितने कॉलेज नियम अनुसार संचालित हैं और नियम विरुद्ध तरीके से संचालित कॉलेज के खिलाफ की गई कार्रवाई का ब्यौरा पेश करने के निर्देश जारी किए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आलोक बागरेचा, नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल की तरफ से स्वप्निल गांगुली तथा सरकार की तरफ से अतिरिक्त महाधिवक्ता विक्रम सिंह ने पक्ष रखा।
विज्ञापन
बता दें कि लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि शैक्षणिक सत्र 2020-21 में प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में 55 नर्सिंग कॉलेज को मान्यता दी गई थी। मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल ने निरीक्षण के बाद इन कॉलेजों की मान्यता दी थी। वास्तविकता में ये कॉलेज सिर्फ कागज में संचालित हो रहे हैं। ऐसा कोई कॉलेज नहीं है जो निर्धारित मापदण्ड पूरा करता है। अधिकांश कॉलेज की निर्धारित स्थल में बिल्डिंग तक नहीं है। कुछ कॉलेज सिर्फ चार-पांच कमरों में संचालित हो रहे हैं। ऐसे कॉलेज में प्रयोगशाला सहित अन्य आवश्यक संरचना नहीं है। बिना छात्रावास ही कॉलेज का संचालन किया जा रहा है। नर्सिंग कॉलेज को फर्जी तरीके से मान्यता दिए जाने के आरोप में मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल के रजिस्टार को पद से हटा दिया गया था। फर्जी नर्सिंग कॉलेज संचालित होने के संबंध में उन्होंने शिकायत की थी। शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं होने के कारण उक्त याचिका दायर की गई है। याचिका में साथ ऐसे कॉलेज की सूची तथा फोटो प्रस्तुत किए गए थे।
विज्ञापन
याचिका की सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने प्रदेश के सभी नर्सिंग कॉलेजों की निरीक्षण रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट के निर्देश पर प्रदेश के 453 नर्सिंग कॉलेज के मान्यता संबंधित ओरिजनल दस्तावेज पेश किए गए थे। युगलपीठ ने याचिकाकर्ता को दस्तावेज के निरीक्षण की अनुमति प्रदान की थी। निरीक्षण के बाद याचिकाकर्ता ने दस्तावेजों से 37759 पेज गायब होने की जानकारी हाईकोर्ट को दी थी। इसके अलावा 80 कॉलेज में ऐसे हैं जिसमें एक व्यक्ति उसकी समय में कई स्थानों में काम कर रहा है। दस कॉलेज में एक ही व्यक्ति एक समय में प्राचार्य है और उन कॉलेजों के बीच की दूरी सैकड़ों किलोमीटर है। टीचिंग स्टाफ भी एक समय में पांच-पांच कॉलेज में एक ही समय में सेवा दे रहा था। सुनवाई के बाद न्यायालय ने 24 घंटे में डिजिटल डाटा उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए थे।
विज्ञापन
पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से युगलपीठ को बताया गया था कि ग्वालियर खंडपीठ ने अपने क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आने वाले नर्सिंग कॉलेज की जांच के लिए एक कमेटी गठित करने के आदेश दिए थे। इस प्रकार जांच के लिए एक कमेटी गठित कर दी जाए। याचिकाकर्ता ने आपत्ति करते हुए बताया कि कमेटी ने सौफिया नर्सिंग कॉलेज तथा पिताम्बरा नर्सिंग कॉलेज को क्लीन चीट दी थी। इस दौरान कॉलेज के फैकल्टी दूसरे कॉलेज में पढ़ा रहे है। इसके बावजूद भी नर्सिंग काउंसिल ने उनका एफिलेशन रिन्यू कर दिया है। युगलपीठ ने नर्सिंग कॉलेज की फैकल्टी के संबंध में मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल तथा डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन को हलफनामा पेश करने के निर्देश जारी किए थे।
याचिका पर मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान पेश किए गए हलफनामे में बताया गया था कि फैकल्टी के संबंध में उन्होंने कॉलेजों को नोटिस जारी कर जानकारी मांगी थी। कॉलेज ने फैकल्टी के संबंध में उक्त जानकारी दी है। तीन कॉलेजों ने एक ही व्यक्ति को एक समय में अपना फैकल्टी बताया है। इसके अलावा MSc नर्सिंग का रेगुलर छात्र फैकल्टी के तौर पर बीसीसी नर्सिंग या डिप्लोमा कोर्स करने वाले छात्रों को पढ़ा रहा है। युगलपीठ ने कमेटी द्वारा ग्वालियर कोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश जारी किए थे।
याचिका पर बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान युगलपीठ के समक्ष कमेटी की रिपोर्ट पेश की गई। सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से कहा गया कि वह किसी भी तरह की जांच के लिए तैयार है। नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल की तरफ से जांच कमेटी गठित करने का आग्रह किया गया। युगलपीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि जांच कमेटी को प्रदेश दर्शन नहीं करवाना है। युगलपीठ ने 24 घंटों में कितने कॉलेज नियम अनुसार संचालित हैं और नियम विरुद्ध तरीके से संचालित कॉलेज के खिलाफ की गई कार्रवाई का ब्यौरा पेश करने के निर्देश जारी किए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आलोक बागरेचा, नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल की तरफ से स्वप्निल गांगुली तथा सरकार की तरफ से अतिरिक्त महाधिवक्ता विक्रम सिंह ने पक्ष रखा।
