जबलपुर: लोन जारी नहीं किया, फिर भी काटते रहे किस्त; बैंक को 1.57 लाख रुपये लौटाने का आदेश
जबलपुर जिला उपभोक्ता आयोग ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को बिना ऋण राशि जारी किए काटी गई छह ईएमआई के 1,57,059 रुपये 7 प्रतिशत ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है। बैंक को 18 हजार रुपये क्षतिपूर्ति और परिवाद व्यय भी देना होगा।
विस्तार
मकान खरीदने के लिए 25 लाख रुपये का होम लोन स्वीकृत होने के बावजूद सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने ऋण की राशि वास्तविक रूप से जारी नहीं की। इसके बावजूद बैंक उपभोक्ताओं के खाते से ईएमआई काटता रहा। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, जबलपुर ने इसे सेवा में कमी और अनुचित व्यापार प्रथा मानते हुए बैंक को काटी गई 1,57,059 रुपये की राशि 7 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा मानसिक कष्ट के लिए 15 हजार रुपये और परिवाद व्यय के रूप में 3 हजार रुपये देने को भी कहा है।
जबलपुर निवासी घनश्याम कुमार यादव और बबीता देवी की ओर से दायर परिवाद में बताया गया कि दिसंबर 2022 में मकान खरीदने के लिए 25 लाख रुपये का ऋण लिया गया था। बैंक ने ऋण खाते में राशि अंतरित कर विक्रेताओं के नाम डिमांड ड्राफ्ट तैयार किए, लेकिन मूल विक्रय विलेख और संपत्ति के दस्तावेज जमा नहीं होने के कारण ड्राफ्ट अपने पास ही रखे। इस वजह से संपत्ति का पंजीयन नहीं हो सका।
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परिवाद के अनुसार, उपभोक्ताओं के अनुरोध पर अगस्त 2023 में ऋण खाता बंद कर डिमांड ड्राफ्ट निरस्त कर दिए गए। इसके बावजूद बैंक ने छह ईएमआई के माध्यम से उनके खाते से कुल 1,57,059 रुपये काट लिए। उपभोक्ताओं ने राशि वापस मांगी, लेकिन बैंक ने उसे लौटाने से इनकार कर दिया। बैंक की ओर से तर्क दिया गया कि उपभोक्ताओं के हस्ताक्षरयुक्त अधिकार पत्र के आधार पर बचत खाते से ऋण की किस्तें काटी गई थीं।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि किस्त काटने का अधिकार पत्र ऋण अनुबंध की मूल शर्तों की पूर्ति का विकल्प नहीं हो सकता। जब तक ऋण राशि का वास्तविक वितरण नहीं हो जाता, तब तक बैंक को किस्तों की वसूली का अधिकार नहीं था।
आयोग ने माना कि बैंक ने ऋण राशि अपने नियंत्रण में रखी और उसका लाभ उपभोक्ताओं को नहीं मिला, लेकिन इसके बावजूद उनके खाते से किस्तें वसूलता रहा। यह अनुचित लाभ अर्जित करने जैसा है। आयोग ने बैंक को आदेश दिया है कि वह काटी गई 1,57,059 रुपये की राशि 7 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाए। साथ ही मानसिक कष्ट के लिए 15 हजार रुपये और परिवाद व्यय के रूप में 3 हजार रुपये का भुगतान भी करे। आदेश के अनुसार, बैंक को समस्त राशि का भुगतान 60 दिनों के भीतर करना होगा।
