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Jabalpur: एनआरआई कोटे के लिए ग्रामीण क्षेत्र में एक साल सेवा देने की अनिवार्यता नहीं, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

Thu, 08 Sep 2022 09:06 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Thu, 08 Sep 2022 09:06 PM IST
सार

एमबीबीएस कोर्स पूर्ण कर एनआरआई कोर्ट के छात्रों को ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देने के नियम में रियायत दी गई है। याचिका में कहा गया था कि सिर्फ एनआरआई कोर्ट के लिए विशेष रियायत देने संविधान के अनुच्छेद 14 व 19 का उल्लंघन है।

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Jabalpur: There is no compulsion to serve one year in rural areas for NRI quota, High Court seeks answer
court new - फोटो : istock

विस्तार

एमबीबीएस कोर्स पूर्ण कर एनआरआई कोर्ट के छात्रों पर एक साल तक ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देने का नियम प्रभावी नहीं होने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि सिर्फ एनआरआई कोर्ट के लिए विशेष रियायत देने संविधान के अनुच्छेद 14 व 19 का उल्लंघन है। याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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याचिकाकर्ता डॉ. रमेश यादव सहित अन्य 51 की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि निजी मेडिकल व डेंटल कॉलेज में 15 प्रतिशत सीट एनआरआई कोटे के लिए आरक्षित रहती है। मेरिट लिस्ट के अनुसार योग्य छात्रों का सिलेक्शन अन्य 85 प्रतिशत सीट पर किया जाता है। मप्र निजी मेडिकल और डेंटल प्रवेश नियम 2016 के अनुसार एमबीबीएस कोर्स पूरा करने के बाद योग्यता के आधार पर मैरिट लिस्ट से अनुसार दाखिला लेने वालों को एक साल ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएं देना अनिवार्य है। इसके लिए दाखिला पाने वालों छात्रों को बॉण्ड भी भरवाया जाता है।
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इसके विपरित एनआरआई कोटे के तहत प्रवेश पाने वाले छात्रों के लिए यह नियम प्रभावशाली नहीं है। वे एमबीबीएस कोर्स कर सीधे पीजी कोर्स में दाखिला ले सकते हैं। योग्यता के आधार पर दाखिला प्राप्त करने वालों को एक साल ग्रामीण क्षेत्र में सेवा देने के बाद पीजी कोर्स में दाखिला मिलेगा। इस प्रकार एनआरआई कोर्ट के छात्र उनके सीनियर हो जाएंगे। याचिका में कहा गया था कि यह नियम संविधान के अनुच्छेद 14 व 19 का उल्लंघन है। याचिका में प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा, संचालक चिकित्सा शिक्षा तथा संचालक जन स्वास्थ्य व परिवार कल्याण को अनावेदक बनाया गया था। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आदित्य संघी ने पैरवी की।
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