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Jabalpur: राशि वसूलने के लिए 24 घंटे में करें सख्त कार्रवाई, छात्रवृत्ति घोटाले के मामले में कोर्ट सख्त
Mon, 24 Apr 2023 07:20 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: अरविंद कुमार
Updated Mon, 24 Apr 2023 07:20 PM IST
सार
कॉलेज संचालाकों से पैरा मेडिकल छात्रवृत्ति घोटाले की राशि नहीं वसूले जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से राशि वसूली की कार्रवाई के संबंध में रिपोर्ट पेश की।
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जबलपुर हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जबलपुर हाईकोर्ट ने सरकार की कार्रवाई पर नाराजगी व्यक्त करते हुए 24 घंटे में कॉलेजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं। याचिका पर अगली सुनवाई 26 अप्रैल को निर्धारित की गई है। लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल की तरफ से दायर की गई याचिका में बताया गया कि साल 2009 से 2015 के बीच हुए प्रदेश के सैकड़ों पैरा मेडिकल कॉलेज ने छात्रवृत्ति के नाम पर करोड़ों रुपये का घोटाला किया था।
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पैरा मेडिकल कॉलेज संचालकों ने फर्जी छात्रों को प्रवेश दर्शाकर सरकार से करोड़ों रुपये की राशि छात्रवृत्ति के रूप में प्राप्त की थी। घोटाले के संबंध में प्रदेश सरकार द्वारा जांच के आदेश दिए गए थे। जांच में घोटाले के आरोप सही पाए गए थे, जिसके बाद सरकार की तरफ से कॉलेज से राशि वसूलने का निर्णय लिया गया था।
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याचिका में कहा गया था कि राज्य शासन द्वारा छात्रवृत्ति घोटाला करने वाले कॉलेज से राशि वसूलने के लिए किसी तरह की कार्रवाई राज्य सरकार नहीं कर रही है। पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने पाया था कि कई अवसर प्रदान करने के बावजूद भी सरकार की तरफ से जवाब पेश नहीं किया गया है। युगलपीठ ने 25 हजार रुपये की कॉस्ट लगाते हुए सरकार को जवाब पेश करने के लिए अंतिम समय प्रदान किया था।
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पिछली सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से पेश किए गए जवाब में बताया गया कि 24 करोड रुपये में से चार करोड़ रुपये की राशि वसूल की गई है। इंदौर खंडपीठ ने पांच करोड़ रुपये की राशि वसूली करने पर रोक लगा रखी है। शेष राशि वसूली के लिए कॉलेज के खिलाफ आरआरसी जारी की गई है। युगलपीठ ने राशि वसूली में सरकार के रवैये पर नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित याचिकाएं सुनवाई के लिए मुख्यपीठ में स्थानांतरित करने के आदेश जारी किए थे।
याचिका पर सोमवार को दो चरण में सुनवाई हुई। सरकार की तरफ से दो संस्थाओं से चार लाख 76 हजार रुपये की वसूली की गई है। दूसरे चरण में हुई सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से बताया गया कि दो संस्थाओं के बैंक एकाउंट सीज कर दिए हैं। याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि सरकार एक तरफ कर्ज ले रही है और दूसरी तरफ अपनी राशि वसूली में सालों लगा रही है। युगलपीठ ने सरकार के रवैये पर नाराजगी व्यक्त करते हुए आदेश जारी किए। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आलोक वागरेजा ने पैरवी की।
