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Jabalpur High Court: हाईकोर्ट ने कहा- नर्सों की हड़ताल अवैधानिक, सरकार 24 घंटे में पेश करे एक्शन टेकन रिपोर्ट

Fri, 14 Jul 2023 07:42 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: अरविंद कुमार Updated Fri, 14 Jul 2023 07:42 PM IST
सार

Jabalpur High Court: प्रदेश में विगत 10 जुलाई से चल रही नर्सों की हड़ताल को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि पूर्व याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने नर्सों की हड़ताल को अवैधानिक करार दिया था।

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Jabalpur High Court says Nurses strike is illegal government should submit action taken report in 24 hours
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर - फोटो : Social Media

विस्तार

जबलपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने वर्तमान में चल रही नर्सों को हड़ताल को अवैधानिक मानते हुए सरकार को 24 घंटे में एक्शन टेकन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश जारी किए हैं। याचिका पर शनिवार को सुनवाई निर्धारित की गई है।

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नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ पीजी नाजपांडे की तरफ से दायर याचिका में नर्सों की हड़ताल को चुनौती दी गई थी। याचिका में कहा गया था कि साल 2016 में नर्सों की हड़ताल के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उसके बाद नर्सों से अपनी हड़ताल वापस ली थी। याचिकाकर्ता ने इस स्वतंत्रता के साथ याचिका वापस ली थी कि भविष्य में नर्स हड़ताल करती हैं, तो वह दोबारा याचिका दायर कर सकेंगे।
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साल 2018 में नर्सों ने अपनी मांग के संबंध में हड़ताल की थी, जिसके खिलाफ उन्होंने याचिका दायर की थी। नर्सों द्वारा हड़ताल वापस लेने पर पूर्व की स्वतंत्रता के साथ उन्होंने याचिका वापस ली थी। इसके बाद नर्सों द्वारा अपने मांगों के समर्थन में 30 जून 2021 को प्रदेश व्यापी हड़ताल की गई थी। हाईकोर्ट ने नर्सों की हड़ताल को अवैधानिक घोषित करते हुए 24 घंटे में कार्य पर लौटने के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कोरोना महामारी के दौरान नर्सों के हड़ताल पर जाने की निंदा की थी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि जो नर्स काम पर नहीं लौटती हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए सरकार स्वतंत्र है।
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याचिका में कहा गया था कि उच्च न्यायालय पूर्व में ही नर्सों की हड़ताल को अवैधानिक घोषित कर चुका है। इसके बावजूद भी नर्स विगत 10 जुलाई से अपनी मांगों के समर्थन में हड़ताल कर रही हैं, जिसके कारण स्वास्थ्य सेवा प्रभावित हो रही हैं। याचिका की सुनवाई के बाद युगलपीठ ने हड़ताल को अवैधानिक मानते हुए आदेश जारी किए। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पैरवी की।

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