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Court News: राजस्व अधिकारी को वसीयत की वास्तविकता तय करने का अधिकार नहीं, HC ने खारिज किया आदेश
Sun, 03 Sep 2023 11:02 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: अरविंद कुमार
Updated Sun, 03 Sep 2023 11:02 PM IST
सार
Jabalpur High Court: जबलपुर हाईकोर्ट ने कहा, राजस्व अधिकारी को वसीयत की वास्तविकता तय करने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने अतिरिक्त संभागायुक्त का आदेश खारिज कर दिया है।
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर
- फोटो : Social Media
विस्तार
वसीयत के आधार पर शासकीय अभिलेख में लाभार्थियों के नाम दर्ज किए जाने के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट जस्टिस जीएस अलुहवालिया ने अपने आदेश में कहा है कि राजस्व अधिकारी को अधिकार नहीं है कि वह वसीयत की वास्तविकता निर्धारित करे। वसीयत की वास्तविकता सक्षम न्यायालय निर्धारित कर सकता है।
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याकिचाकर्ता उर्मिला तिवारी की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि उनके पिता ने अपने बेटे कृपाराम तथा राजीव के नाम पर वसीयत की थी। वसीयत के आधार पर नाम दर्ज करवाने के लिए आवेदन पेश किया गया था और शासकीय अभिलेखों में उनका नाम दर्ज करने का आदेश तहसीलदार टीकमगढ़ द्वारा जारी किए गए थे, जिसके खिलाफ उन्होंने एसडीएम के समक्ष अपील दायर की थी। एसडीएम ने आदेश को निरस्त करते हुए कहा था कि सभी कानूनी हकदारों के नाम दर्ज किए जाएं।
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एसडीएम के आदेश के खिलाफ अतिरिक्त संभागायुक्त के समक्ष अपील दायर की गई थी। सुनवाई के बाद अतिरिक्त संभागायुक्त ने अपील को स्वीकार कर लिया, जिसके कारण याचिका दायर की गई है। एकलपीठ ने सुनवाई के बाद अतिरिक्त संभागायुक्त के आदेश को निरस्त करते हुए आदेश जारी किए। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि अनावेदक वसीयत की वैधता के लिए समक्ष न्यायालय की शरण लेने के लिए स्वतंत्र है।
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