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Jabalpur: पूर्व बिशप पीसी सिंह को मिली सशर्त जमानत, ईओडब्ल्यू कार्यालय में जमा करना होगा पासपोर्ट

Tue, 17 Jan 2023 07:44 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Tue, 17 Jan 2023 07:44 PM IST
सार

शैक्षणिक संस्थाओं की राशि के दुरुपयोग करने तथा मिशन की संपत्ति का फर्जीवाड़ा करने के आरोप में गिरफ्तार पूर्व पीसी सिंह को हाईकोर्ट से राहत मिली है।  पूर्व बिशप को ईओडब्ल्यू में अपना पासपोर्ट जमा करवाना होगा।

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Jabalpur: Former Bishop PC Singh gets conditional bail, will have to submit passport in EOW office
पूर्व बिशप पीसी सिंह - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मध्यप्रदेश के जबलपुर में फर्जी तरीके से समिति का गठन कर  शैक्षणिक संस्थाओं की राशि के दुरुपयोग करने तथा मिशन की संपत्ति का फर्जीवाड़ा करने के आरोप में गिरफ्तार पूर्व पीसी सिंह को हाईकोर्ट से राहत मिली है। हाईकोर्ट जस्टिस नंदिता दुबे की एकलपीठ ने पूर्व बिशप को सशर्त जमानत का लाभ प्रदान किया है। पूर्व बिशप को ईओडब्ल्यू में अपना पासपोर्ट जमा करवाना होगा।
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गौरतलब है कि ईओडब्ल्यू जबलपुर की टीम ने 8 सितंबर को बिशप पीसी सिंह के नेपियर टाउन स्थित कार्यालय तथा घर में दबिश दी थी। दबिश के दौरान 80 लाख का सोना, एक करोड़ 65 लाख रुपये नगद, 48 बैंक खाते, 18352 यूएस डॉलर, 118 पाउंड, 9 लग्जरी गाड़ियां, 17 संपत्तियों के दस्तावेज मिले थे। दबिश के दौरान बिशप देश के बाहर थे। ईओडब्ल्यू ने बिशप को नागपुर एयरपोर्ट से 12 सितंबर को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था। था। ईओडब्ल्यू ने पूछताछ के लिए बिशप को चार दिन के रिमांड पर लिया था। रिमांड के दौरान उन्होंने 10 एफडी सहित 174 बैंक खातों की जानकारी दी थी। 
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उन्होंने मिशन कंपाउंड स्थित बेशकीमती जमीन खुद के नाम आधे दामों में खरीदी थी। बिशप रहते हुए उन्होंने जमीन बेची और क्रेता के तौर पर स्वयं खरीद ली। उनके खिलाफ देशभर के अलग-अलग राज्यों में 80 मामले दर्ज हैं। बिना अनुमति उन्होंने फर्जी तरीके से संस्था का रजिस्ट्रेशन करवाया था। पूर्व बिशप की तरफ से जमानत के लिए दूसरी बार आवेदन दायर किया गया था। एकलपीठ ने 10 जनवरी को सुनवाई के फैसला सुरक्षित रख लिया था।
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एकलपीठ द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि जमानत का लाभ आरोपी को कारावास से राहत देने का है। राज्य सरकार को भी आरोपी के भार से राहत मिलती है। अपराधिक मामले में आरोपी को राहत देने से इसलिए इनकार नहीं किया जा सकता कि उसने सामाजिक भावनों को आहत किया है। याचिकाकर्ता पिछले 120 दिनों से न्यायिक रक्षा में है और उसके खिलाफ न्यायालय में चालान पेश कर दिया गया है। उसे बिशप व मॉडरेटर पद से हटाकर प्रभावहीन कर दिया है। बैंक खाते भी सीज कर लिए गए हैं। एकलपीठ ने आरोपी को सशर्त जमानत का लाभ प्रदान किया है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल खरे तथा अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने पैरवी की।
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